मानसी जोशी रॉय ने खुलासा किया: 2015 में क्यों बंद की गणेशोत्सव की परंपरा, 2023 में कैसे लौटे बप्पा
सारांश
मुख्य बातें
टीवी अभिनेत्री मानसी जोशी रॉय, जो इन दिनों सीरियल 'लक्ष्मी निवास' में नज़र आ रही हैं, ने गणेशोत्सव को लेकर एक भावुक खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि 2015 में उन्होंने घर में गणपति बप्पा का स्वागत बंद कर दिया था — और इसकी वजह कोई अश्रद्धा नहीं, बल्कि त्योहार के बढ़ते सामाजिक दायरे में आस्था का खो जाना था। करीब एक दशक बाद 2023 में उनके पति रोहित रॉय की पहल पर बप्पा एक बार फिर सादगी से घर लौटे।
कैसे भागदौड़ में खो गया भगवान से जुड़ाव
मानसी ने बताया कि पहले हर साल उनके घर गणपति पधारते थे और डेढ़ दिन से तीन दिन तक मूर्ति की स्थापना होती थी। लेकिन धीरे-धीरे आयोजन का दायरा बढ़ता गया — मेहमानों का आना-जाना, खाने-पीने की व्यवस्था और तैयारियों में इतनी व्यस्तता हो गई कि उन्हें लगा वे बप्पा से अपना जुड़ाव खोती जा रही हैं।
उन्होंने कहा, 'एक साल अचानक मुझे एहसास होता है कि मैं उनसे अपना जुड़ाव खोती जा रही हूं क्योंकि मैं बाकी चीजों में बहुत ज़्यादा व्यस्त रहने लगी थी।'
ननद की बात ने किया विचार मज़बूत
जब मानसी ने यह बात अपनी ननद से साझा की — जो उनसे भी ज़्यादा धार्मिक हैं और वर्षों से बप्पा को घर लाती रही हैं — तो ननद ने भी इस भावना से सहमति जताई। ननद ने कहा, 'हम सब चीजों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि मैं अपने भगवान से बात ही नहीं कर पाई।' उन्हें भी एहसास हुआ था कि उत्सव एक बड़े सोशल इवेंट में बदल गया है।
ऐतिहासिक संदर्भ: तिलक की विरासत और आज का उत्सव
मानसी ने गणेशोत्सव के सामाजिक इतिहास पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा, 'हम सभी जानते हैं कि ये धार्मिक त्योहार के तौर पर शुरू नहीं हुआ था — इसे लोकमान्य तिलक ने शुरू किया था ताकि अंग्रेजों को शक हुए बिना लोगों को एक जगह इकट्ठा किया जा सके।' अभिनेत्री के अनुसार, वह सार्वजनिक चेतना अब एक विशाल सामाजिक आयोजन में रूपांतरित हो गई है, जहाँ लोग कई घरों में जाने की जल्दी में रहते हैं और जिनके यहाँ बप्पा आते हैं वे खुद पूरे समय सामाजिक दायित्वों में उलझे रहते हैं।
2015 में फैसला, 2023 में वापसी
इन्हीं भावनाओं के चलते अभिनेत्री ने 2015 में घर में गणेशोत्सव बंद करने का निर्णय लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बप्पा साल भर उनके घर के मंदिर और उनकी प्रार्थनाओं में मौजूद रहे — बस विधिवत उत्सव नहीं होता था।
फिर 2023 में पति रोहित रॉय ने कहा, 'मैं इस साल गणेश चतुर्थी पर गनु को घर लाना चाहता हूं, लेकिन साधारण तरीके से।' और रोहित ने ठीक वैसा ही किया। मानसी ने बताया, 'अब मैं और मेरे पति बिल्कुल वैसा ही करते हैं।' देर रात शांत माहौल में बप्पा के सामने बैठकर उन्हें जो जुड़ाव महसूस होता था, वही भाव अब घर में फिर से लौट आया है।
आस्था और सादगी का संदेश
मानसी जोशी रॉय का यह अनुभव उन लाखों परिवारों की कहानी से मेल खाता है जो त्योहारों में बाहरी तामझाम और भीतरी शांति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं। उनकी इस यात्रा — जुड़ाव खोने से सादगी भरी वापसी तक — ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। आगे देखना होगा कि क्या उनकी यह कहानी दूसरों को भी त्योहारों को अपने मूल रूप में मनाने के लिए प्रेरित करती है।