नाना पाटेकर की याद: मुकेश ऋषि बोले — '100 रुपए का वह तोहफा आज भी दिल में है', अतुल कस्बेकर और मालिनी अवस्थी भावुक
सारांश
मुख्य बातें
दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके करीबी मित्रों और सहयोगियों की यादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। फिल्म जगत के जाने-माने अभिनेता मुकेश ऋषि, प्रसिद्ध फोटोग्राफर अतुल कस्बेकर और लोकप्रिय लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने नाना के साथ बिताए अनमोल पलों को साझा करते हुए उन्हें एक बेमिसाल इंसान और दिल से जुड़े कलाकार के रूप में याद किया।
अतुल कस्बेकर की यादें: खाना परोसने वाला बड़ा कलाकार
फोटोग्राफर और नाना के करीबी मित्र अतुल कस्बेकर ने भावुक होते हुए कहा, 'मैं नाना को तब से जानता हूं, जब मैंने फोटोग्राफी शुरू की थी। नाना के साथ मेरा रिश्ता काफी खास था। वह मुझे एक ऐसे लोकल महाराष्ट्रियन लड़के के रूप में देखते थे, जो फोटोग्राफी की दुनिया में कुछ बड़ा करना चाहता था। वह हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते थे और मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते थे। उनका मेरे सिर पर हमेशा हाथ रहा।'
अतुल ने एक पुराने किस्से को याद करते हुए बताया कि एक बार जब उन्हें पुणे में फोटो प्रदर्शनी के लिए जाना था, तो नाना ने खुद फोन करके पूछा कि टीम में कितने लोग हैं। जब अतुल अपने आठ से दस सहयोगियों के साथ नाना के फार्म हाउस पहुंचे, तो नाना ने उन सभी के लिए घर की रसोई में खाना बनवाया और खुद अपने हाथों से सभी को परोसा। अतुल ने कहा, 'इतने बड़े कलाकार होने के बावजूद उन्होंने कभी किसी को खुद से छोटा महसूस नहीं होने दिया। नाना बेहद साधारण इंसान थे।'
मालिनी अवस्थी का श्रद्धांजलि — 'अभिनेता से भी बड़े इंसान थे नाना'
लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कहा, 'नाना जितने शानदार अभिनेता थे, उससे भी ज़्यादा अच्छे इंसान थे। उनकी कई फिल्में ऐसी हैं, जिन्हें लोग सिर्फ नाना पाटेकर को देखने के लिए याद करते हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नाना ने कारगिल युद्ध के समय देश की सेवा की थी और फिल्मों के अलावा पुणे के पास अपने गांव में खेती करते थे तथा ग्रामीणों की मदद के लिए सदा तत्पर रहते थे।
मालिनी ने आगे कहा, 'नाना ने अपने जीवन में जो कमाया, उसका इस्तेमाल जरूरतमंद लोगों की मदद और मराठी सिनेमा के विकास के लिए किया। जिस दौर में उन्होंने अभिनय की शुरुआत की, उस समय फिल्म जगत में कई दिग्गज मौजूद थे, लेकिन नाना ने अपनी अलग शैली और अभिनय के दम पर खुद की एक अनूठी पहचान बनाई।'
मुकेश ऋषि का भावुक किस्सा — 100 रुपए का अनमोल तोहफा
अभिनेता मुकेश ऋषि ने फिल्म 'कोहराम' के दौरान नाना के साथ काम करने की यादें साझा कीं, जिसकी शूटिंग जम्मू और कटरा में हुई थी। उन्होंने बताया कि नाना शूटिंग खत्म होने के बाद भी किसी बड़े सितारे की तरह अलग नहीं रहते थे, बल्कि सभी से आम इंसान की तरह मिलते थे।
मुकेश ने एक यादगार किस्सा सुनाते हुए कहा, 'नाना सभी को जन्मदिन की बधाई देते थे। एक बार उन्होंने मुझे भी जन्मदिन की बधाई देते हुए 100 रुपए गिफ्ट के तौर पर दिए थे।' उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी कभी-कभी नाना के लिए खाना बनाती थीं और एक बार राजमा पकाने पर नाना ने हंसते हुए कहा था कि 'तुम अपने तरीके से बनाओ, मैं अपने तरीके से बनाऊंगा।'
समय के पक्के, ज़मीन से जुड़े इंसान
मुकेश ऋषि ने नाना के अनुशासन और सादगी को याद करते हुए कहा कि वह काम को लेकर बेहद गंभीर और समय के पक्के थे — सेट पर वक्त पर पहुंचते थे और समय की बर्बादी उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं थी। वह गांव में रहना पसंद करते थे और अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखते थे। मुकेश ने कहा, 'उन्होंने अपनी ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जी। उम्र या आंकड़े उनके लिए मायने नहीं रखते, असल मायने उस इंसान के होते हैं, जो अपने पीछे यादें छोड़ जाता है।'
गौरतलब है कि नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में दशकों तक अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनके जाने से बॉलीवुड ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जो परदे पर जितना तीव्र था, परदे के पीछे उतना ही इंसानी था — और यही उनकी असली विरासत है।