राज बब्बर का राजनीति पर दो टूक जवाब, पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में जल्द वापसी का संकेत
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राज बब्बर 26 अक्टूबर 2026 को अपने परिवार के साथ अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) पहुँचे और सभी की सुख-समृद्धि के लिए अरदास की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में पंजाबी सिनेमा में एक नए प्रोजेक्ट के साथ जल्द जुड़ने का संकेत दिया और राजनीति से दूरी बनाने के सवाल को सीधे खारिज किया।
राजनीति से दूरी पर क्या बोले बब्बर
मीडिया के सामने राजनीति से किनारा करने के सवाल पर राज बब्बर ने स्पष्ट कहा, 'मैंने किसी से दूरी नहीं बनाई, वाहेगुरु जैसा कहते हैं, हम उसी रास्ते पर चलते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2024 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा की गुरुग्राम सीट से हार के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर अटकलें तेज़ थीं।
पंजाबी इंडस्ट्री में वापसी का संकेत
पंजाबी सिनेमा पर अपनी राय रखते हुए बब्बर ने कहा, 'पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में अच्छी कहानियों पर काम हो रहा है। शानदार फिल्में बनाई जा रही हैं। हम भी जल्द ही इस इंडस्ट्री में काम करते नज़र आएंगे।' हालाँकि, उन्होंने प्रोजेक्ट का नाम, कहानी या अन्य विवरण साझा नहीं किया, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि वह किसी फिल्म में अभिनय करेंगे या किसी अन्य भूमिका में नज़र आएंगे।
पंजाबी सिनेमा से पुराना रिश्ता
राज बब्बर का पंजाबी सिनेमा से गहरा नाता रहा है। 'चन्न परदेसी', 'लौंग दा लश्कारा', 'माड़ी दा दीवा', 'माहौल ठीक है' और 'यारां नाल बहारां' जैसी फिल्मों से उन्होंने पंजाबी दर्शकों में अपनी विशेष पहचान बनाई। 2021 में वह पंजाबी कॉमेडी-हॉरर फिल्म 'भूत अंकल तुसी ग्रेट हो' में दिखे, और 2024 में रिलीज़ हुई फिल्म 'शाहकोट' में गुरु रंधावा और ईशा तलवार के साथ अभिनय किया।
राजनीतिक सफ़र पर एक नज़र
बब्बर ने 1989 में जनता दल के साथ राजनीति में कदम रखा। बाद में वह समाजवादी पार्टी से जुड़े और 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा पहुँचे। 1999 और 2004 में उन्होंने आगरा से लोकसभा चुनाव जीता। 2008 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) में शामिल हुए और 2009 में फिरोजाबाद से संसद पहुँचे। 2016 से 2019 तक वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे और 2015 में उत्तराखंड से दोबारा राज्यसभा सदस्य बने।
2024 की हार और अब आगे
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें गुरुग्राम सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। अब स्वर्ण मंदिर की यात्रा और पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में वापसी के संकेत के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि बब्बर अपने अभिनय और राजनीतिक जीवन को किस दिशा में ले जाते हैं।