रसिका दुग्गल की अपील: बच्चों के लिए बनें ज़्यादा फ़िल्में, 'लिटिल थॉमस' से जगी उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में फ़िल्म निर्माताओं से अपील की कि वे बच्चों के लिए ऐसी फ़िल्में बनाएँ जो उनकी जिज्ञासा को नज़रअंदाज़ करने के बजाय उसे सम्मान दें। आगामी फ़िल्म 'लिटिल थॉमस' में जेसी मिरांडा की भूमिका निभा रहीं रसिका का कहना है कि ऐसी कहानियाँ बच्चों को अपने अनुभवों और भावनाओं से जोड़ने का दुर्लभ अवसर देती हैं।
सिनेमा और बचपन का गहरा रिश्ता
रसिका ने कहा, 'सिनेमा आपकी दुनिया को बड़ा करने और कल्पना को बढ़ावा देने का एक शानदार तरीका है। बड़े होने पर हमारे मन में जो कई विचार आते हैं, उनका कनेक्शन अक्सर बचपन में देखी गई फ़िल्मों से होता है।' उनके अनुसार, बच्चों के लिए बनाई गई फ़िल्में उन्हें सवाल पूछने, कल्पना करने और अपने आसपास की दुनिया को समझने की स्वतंत्रता देती हैं।
अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के लिए बनी फ़िल्में हल्की-फुल्की या सतही हुए बिना भी पूरी तरह मनोरंजक हो सकती हैं। उनका ज़ोर इस बात पर है कि बच्चों की जिज्ञासा को कहानी का केंद्र बनाया जाए, न कि उसे दरकिनार किया जाए।
फ़िल्म निर्माताओं से अपील
रसिका ने कहा, 'मैं चाहूंगी कि ज़्यादा से ज़्यादा फ़िल्ममेकर ऐसी कहानियों को एक्सप्लोर करें जिन्हें बच्चे एन्जॉय कर सकें और जो उनकी कल्पना के लिए नई संभावनाएं खोलें।' उनका मानना है कि भारतीय सिनेमा में बाल-केंद्रित सामग्री की भारी कमी है और इस रिक्तता को भरने की ज़रूरत है।
गौरतलब है कि बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण हिंदी सिनेमा की माँग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन व्यावसायिक दबाव के चलते इस क्षेत्र में निवेश सीमित रहा है। ऐसे में 'लिटिल थॉमस' जैसी फ़िल्मों को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
'लिटिल थॉमस' की कहानी और किरदार
निर्देशक कौशल ओझा की यह फ़िल्म 1990 के दशक के गोवा में सात साल के थॉमस और उसके परिवार के जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाती है। आलोचकों का कहना है कि यह फ़िल्म मालगुडी डेज़ और रस्किन बॉन्ड की कहानियों की परंपरा को आगे बढ़ाती है।
फ़िल्म में गुलशन देवैया, रसिका दुग्गल और बाल कलाकार हृदांश पारेख मुख्य भूमिकाओं में हैं। रसिका जेसी मिरांडा का किरदार निभा रही हैं — एक ऐसी माँ जिसकी दुनिया उनके परिवार, उनकी बेकरी और संगीत के प्रति उनके प्रेम के इर्द-गिर्द घूमती है।
फ़िल्म का दृष्टिकोण
फ़िल्म में दुनिया को एक बच्चे की नज़र से देखने का प्रयास किया गया है, जहाँ बचपन की जिज्ञासाओं से जन्म लेने वाली सहज और अनपेक्षित बातचीत को प्रमुखता दी गई है। एक बच्चे के मासूम सवाल और उत्तर जानने की उसकी ज़िद कई दिलचस्प परिस्थितियाँ पैदा करती है, जो कहानी को एक अनूठा आकर्षण देती है।
यह फ़िल्म ऐसे समय में आ रही है जब भारतीय दर्शक ओटीटी और मल्टीप्लेक्स दोनों पर बाल-केंद्रित सामग्री की माँग कर रहे हैं। 'लिटिल थॉमस' इस माँग को पूरा करने की दिशा में एक सार्थक कदम मानी जा रही है।