बालाजी मंदिर हमले पर अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति की चेतावनी: नफरत हिंसा में बदल रही है
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने 23 अक्टूबर 2026 को एक विशेष इंटरव्यू में आगाह किया कि अमेरिका में भारतीय और हिंदू समुदाय के विरुद्ध बढ़ती नफरत भरी बयानबाजी अब सीधे हिंसा का रूप ले रही है। उन्होंने शिकागो के निकट बालाजी मंदिर पर 11 अक्टूबर को हुए कथित हमले के प्रयास का हवाला देते हुए कहा कि केवल हमलावर की बंदूक जाम होने से एक बड़ा नरसंहार टला। साथ ही, उन्होंने एफबीआई (FBI) पर सवाल उठाया कि कथित तौर पर दो साल से चल रही इस साजिश की जानकारी एजेंसी को पहले क्यों नहीं मिली।
मंदिर हमले का विवरण
राजा कृष्णमूर्ति ने बताया कि 11 अक्टूबर को बालाजी मंदिर में नवरात्रि उत्सव मनाया जा रहा था, जिसमें उनका परिवार भी शामिल था। मंदिर के बाहर एक बंदूकधारी AR-15 शैली के हथियार और 300 से अधिक गोलियों के साथ बड़े पैमाने पर हत्याकांड की तैयारी में था। उन्होंने कहा, 'हमें बिल्कुल नहीं पता था कि मंदिर के बाहर एक बंदूकधारी मौजूद है। वह बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या करने की तैयारी में था।'
सांसद के अनुसार, हमलावर ने एक गोली चलाई, लेकिन उसके बाद हथियार में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे एक भीषण त्रासदी टल सकी। आरोपी पर हथियारों से जुड़े आरोपों के साथ-साथ कथित तौर पर आतंकवाद से संबंधित एक आरोप भी लगाया गया है।
एफबीआई की चुप्पी पर सवाल
कृष्णमूर्ति ने इस मामले में जाँच की माँग की थी, लेकिन उनके अनुसार अब तक FBI की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। जब उनसे FBI निदेशक काश पटेल की इस मामले पर चुप्पी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता। इसके बारे में आपको उनसे ही पूछना होगा।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यदि यह साजिश कथित तौर पर दो साल से चल रही थी, तो संघीय एजेंसियों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई। उनके मुताबिक, घरेलू हिंसक उग्रवाद की रोकथाम के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं लगाए जा रहे।
राजनीतिक नेताओं पर आरोप
कृष्णमूर्ति ने उन जनप्रतिनिधियों की आलोचना की जिन्होंने इस घटना की सार्वजनिक रूप से निंदा नहीं की। उन्होंने कहा, 'जब आप चुप रहते हैं, तो कई बार ऐसा लगता है कि आप जो हुआ उसे स्वीकार कर रहे हैं या उसका समर्थन कर रहे हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू, मुस्लिम, यहूदी, ईसाई या सिख — किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत हो, राजनीतिक नेताओं को खुलकर उसका विरोध करना चाहिए।
उन्होंने टेक्सास के एक 'MAGA' समर्थक उम्मीदवार बो फ्रेंच का उदाहरण दिया, जिन्होंने फुटबॉल मैच देखने आए भारतीय मूल के बच्चों को विदेशी आक्रांताओं की तरह प्रस्तुत किया था — जबकि उनमें से कई बच्चे टेक्सास में ही पैदा हुए थे। कृष्णमूर्ति के अनुसार, यह टिप्पणी अप्रवास से जुड़ी वैध चिंता नहीं, बल्कि शुद्ध नस्लीय पूर्वाग्रह को दर्शाती है।
शिक्षा विभाग की पोस्ट पर विरोध
कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी शिक्षा विभाग की एक सोशल मीडिया पोस्ट की भी आलोचना की, जिसमें टेक्सास विश्वविद्यालय के फुटबॉल मैच में बैठे श्वेत दर्शकों की तस्वीर के साथ 'मेक कॉलेज फुटबॉल ग्रेट अगेन' लिखा गया था। उनका कहना है कि ऐसी सामग्री बहिष्करण की मानसिकता को और मजबूत करती है।
उन्होंने चेतावनी दी, 'इस तरह आग में घी डालने से नफरत भरी भाषा और ज्यादा मजबूत और खतरनाक हो जाती है। फिर बस एक व्यक्ति को उस पर कार्रवाई करने की जरूरत होती है। हम अभी यही देख रहे हैं कि नफरत भरी बयानबाजी धीरे-धीरे हिंसा में बदल रही है।'
कौन हैं राजा कृष्णमूर्ति
राजा कृष्णमूर्ति इलिनॉय राज्य से अमेरिकी कांग्रेस में भारतीय मूल के सांसद हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा भारतीय-अमेरिकी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर एक प्रमुख आवाज माने जाते हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में अल्पसंख्यक और अप्रवासी समुदायों के खिलाफ घृणा-अपराधों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है। यह घटना और इस पर उठाए गए सवाल भारतीय-अमेरिकी समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक व्यापक और गहरी बहस को जन्म दे रहे हैं।