इलिनोइस हिंदू मंदिर हमले की कोशिश: 105 अमेरिकी सांसदों ने FBI से जांच की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के इलिनोइस राज्य में ऑरोरा स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) मंदिर में सामूहिक गोलीबारी की कथित साजिश के मामले में 105 अमेरिकी सांसदों ने फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) को पत्र लिखकर व्यापक संघीय जांच की माँग की है। सांसदों ने इस घटना को एक संभावित संघीय हेट क्राइम बताते हुए भारतीय-अमेरिकी और दक्षिण एशियाई समुदायों के विरुद्ध बढ़ते खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
घटनाक्रम: कैसे हुई हमले की कोशिश
अभियोजकों के अनुसार, इलिनोइस के पैलेटाइन निवासी 19 वर्षीय एलेक्जेंड्रोस पापोराकिस 11 अक्टूबर 2026 को गोलीबारी के इरादे से मंदिर पहुँचा था। हालाँकि, राइफल में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण वह बिना हमला किए भाग निकला। उसी दिन एक सहकर्मी ने पुलिस को उसकी कथित वापसी की योजना के बारे में सूचित किया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
अभियोजकों का आरोप है कि पापोराकिस ने खुद को नव-नाजी बताते हुए भारतीय मूल के लोगों के विरुद्ध हिंसा का विवरण करने वाला आठ पन्नों का श्वेत वर्चस्ववादी घोषणापत्र तैयार किया था। जांचकर्ताओं ने उसके पास से एक राइफल, सैकड़ों गोलियाँ, बॉडी आर्मर और श्वेत वर्चस्ववादी सामग्री बरामद की है। उस पर आतंकवादी धमकी देने और हथियारों के अवैध कब्जे का आरोप लगाया गया है। यह उल्लेखनीय है कि अदालत में अभी तक आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं।
द्विदलीय अपील और प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता
इस द्विदलीय पत्र की अगुवाई भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने की, जो हमले की कोशिश के दिन अपने परिवार के साथ उसी मंदिर में पूजा कर रहे थे। मंगलवार, 21 अक्टूबर 2026 को FBI निदेशक काश पटेल को भेजे गए इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में अमेरिकी कांग्रेस के सभी भारतीय-अमेरिकी सदस्य, इलिनोइस हाउस का पूरा डेमोक्रेटिक प्रतिनिधिमंडल और सीनेटर डिक डरबिन, टैमी डकवर्थ, एंडी किम तथा क्रिस वैन हॉलेन शामिल हैं।
सांसदों ने FBI से यह जानने की माँग की कि क्या जांच में नस्लीय और धार्मिक दोनों पक्षपातों की पड़ताल की जा रही है, और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने कथित हमले की योजना बनाने या उसे बढ़ावा देने में मदद की। पत्र में 29 अक्टूबर 2026 तक लिखित जवाब माँगा गया है।
दक्षिण एशियाई समुदाय पर बढ़ते खतरे
पत्र में सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट के सितंबर 2026 के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया कि जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर 5,42,000 से अधिक दक्षिण एशियाई विरोधी नफरत भरे पोस्ट आए। अध्ययन के अनुसार ऐसे पोस्ट की मासिक संख्या जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच लगभग 240 प्रतिशत बढ़ गई।
कार्नेगी एंडोमेंट के एक अलग सर्वेक्षण में पाया गया कि 48 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी उत्तरदाताओं ने 2025 की शुरुआत से अपने समुदाय को निशाना बनाने वाले नस्लवादी ऑनलाइन पोस्ट अक्सर देखे हैं।
सरकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आलोचना
सांसदों ने संघीय एजेंसियों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की सितंबर 2026 की उस पोस्ट का जिक्र किया जिसमें एक सिख व्यक्ति की तस्वीर के साथ लिखा था, 'हमारी सड़कों से उतर जाओ, तुम्हें गाड़ी चलाना नहीं आता मिस्टर सिंह।' आलोचना के बाद यह पोस्ट हटा दी गई, जबकि DHS ने स्पष्ट किया कि यह एक घातक सड़क दुर्घटना के एक विशेष आरोपी के बारे में थी।
सांसदों ने टेक्सास विश्वविद्यालय के फुटबॉल मैच में दक्षिण एशियाई दर्शकों के बारे में शिक्षा विभाग की एक पोस्ट का भी उल्लेख किया। सांसदों ने लिखा, 'हम मानते हैं कि इस तरह के संदेश नस्लीय और धार्मिक रूढ़ियों को सरकारी वैधता देने का जोखिम रखते हैं।'
आगे क्या होगा
सांसदों ने FBI से संभावित रूप से लक्षित पूजा स्थलों की पहचान कर स्थानीय अधिकारियों के साथ खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता के बारे में जानकारी माँगी है। पत्र में कहा गया, 'किसी को भी अपने वंश, रंग-रूप या आस्था के कारण निशाना बनाए जाने का डर नहीं होना चाहिए।' 29 अक्टूबर की समय-सीमा को देखते हुए FBI की प्रतिक्रिया और संघीय जांच की दिशा पर सबकी नजरें टिकी हैं।