नायला ग्रेवाल बोलीं — 'थप्पड़' से आगे, महिलाओं के मुद्दों पर सिनेमा को करना होगा और काम
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री नायला ग्रेवाल ने 13 सितंबर 2026 को मुंबई में एक बातचीत के दौरान कहा कि हिंदी सिनेमा को महिलाओं से जुड़े जरूरी मुद्दों को लगातार पर्दे पर जगह देनी चाहिए, और यह काम केवल बॉक्स ऑफिस की कमाई के नज़रिए से नहीं होना चाहिए। 'थप्पड़' (2020) जैसी सामाजिक रूप से सचेत फिल्म में काम कर चुकीं नायला का मानना है कि जब सिनेमा महिलाओं की परेशानियों और अधिकारों को दिखाता है, तो समाज में असली बातचीत शुरू होती है।
महिला केंद्रित सिनेमा की घटती संख्या पर चिंता
नायला ने कहा, 'महिलाओं से जुड़े मुद्दे मेरे लिए काफी मायने रखते हैं। मैं इस विषय को लेकर खुद काफी जागरूक हूं और ऐसी फिल्म में काम करना चाहती हूं, जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों को विस्तार से दिखाए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले कुछ सालों में इस तरह की फिल्मों की संख्या में कमी आई है और पहले जैसी पर्याप्त फिल्में अब देखने को नहीं मिलतीं।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब हिंदी फिल्म उद्योग में बड़े बजट की एक्शन और मनोरंजन केंद्रित फिल्मों की भरमार है, और सामाजिक विषयों पर बनने वाली फिल्में अपेक्षाकृत कम हो गई हैं।
'थप्पड़' और तापसी पन्नू की तारीफ
नायला ने निर्देशक अनुभव सिन्हा की फिल्म 'थप्पड़' में अपनी को-स्टार तापसी पन्नू की विशेष रूप से तारीफ की। उनके मुताबिक, 'तापसी ने घरेलू हिंसा और एक थप्पड़ के जरिए रिश्ते में सम्मान और बराबरी जैसे मुद्दों को सामने रखा था।' नायला ने खुद को 'खुशकिस्मत' बताया कि उन्हें ऐसी फिल्म में काम करने का अवसर मिला।
तापसी की आने वाली फिल्म 'गांधारी' का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह फिल्म बच्चों की तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे को सामने लाती है और यही इस तरह के सिनेमा की अहमियत को रेखांकित करता है।
महिलाओं की एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी
नायला ने महिला एकजुटता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, 'महिलाओं को दूसरी महिलाओं का साथ देना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। अगर महिलाएं ही एक-दूसरे को सपोर्ट नहीं करेंगी, तो फिर इस बदलाव की शुरुआत कौन करेगा।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सोच केवल फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है — समाज के हर तबके में महिलाओं के लिए बेहतर माहौल बनाने की जिम्मेदारी सभी की है।
बॉक्स ऑफिस से ऊपर है कहानी की अहमियत
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि महिला मुद्दों पर फिल्म बनाने से पहले केवल कमाई के आंकड़े देखना उचित नहीं है। 'ऐसी कहानियों की अहमियत उनकी कमाई से कहीं ज्यादा होती है। यह सवाल नहीं होना चाहिए कि फिल्म में कौन सा बड़ा पुरुष स्टार है — अगर कहानी जरूरी है, तो उसे सामने आना चाहिए।'
गौरतलब है कि नायला का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड में स्टार पावर और कमर्शियल व्यवहार्यता को लेकर बहस तेज हो रही है। आने वाले समय में वे किस तरह की परियोजनाओं से जुड़ती हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।