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सचिन पिलगांवकर की 'कापूसकोंडा': पारिवारिक फिल्मों से गहरे लगाव की वजह बताई

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सचिन पिलगांवकर की 'कापूसकोंडा': पारिवारिक फिल्मों से गहरे लगाव की वजह बताई

सारांश

क्राइम थ्रिलर के दौर में सचिन पिलगांवकर ने चुना एक अलग रास्ता — 'कापूसकोंडा' में रिटायर्ड पोस्टमैन का किरदार, जो अपने सबसे बड़े डर यानी कुत्ते के साथ रहने पर मजबूर हो जाता है। पिलगांवकर का कहना है कि पारिवारिक फिल्में पीढ़ियों को जोड़ती हैं — और यही उनका असली जुनून है।

मुख्य बातें

सचिन पिलगांवकर की फिल्म 'कापूसकोंडा' को दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
फिल्म में वे एक रिटायर्ड पोस्टमैन की भूमिका में हैं, जिन्हें कुत्तों से डर लगता है लेकिन एक कुत्ता उनके घर आ जाता है।
पिलगांवकर ने कहा पारिवारिक फिल्में कई पीढ़ियों को जोड़ने वाली यादें बनाती हैं।
असल जीवन में उनका कुत्ता 'जैक' परिवार का हिस्सा है — पर्दे पर किरदार और जीवन में व्यक्तित्व एकदम विपरीत।
मोहिते ने लिखा-निर्देशित किया; निर्माण स्टोरीवाला फिल्म और वी.

अनुभवी अभिनेता सचिन पिलगांवकर की हालिया रिलीज़ फिल्म 'कापूसकोंडा' को दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। मुंबई में फिल्म की चर्चा के दौरान पिलगांवकर ने खुलकर बताया कि पारिवारिक मनोरंजन वाली फिल्मों के प्रति उनका विशेष लगाव क्यों है और यह किरदार उनके लिए क्यों खास रहा।

पारिवारिक फिल्मों से लगाव की वजह

सचिन पिलगांवकर ने कहा, 'मुझे हमेशा ऐसी कहानियों का हिस्सा बनने में खुशी मिलती है, जो लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला सकें। आजकल हम बहुत सारी थ्रिलर और गंभीर विषयों वाली फिल्में देखते हैं। हालांकि, हर तरह की फिल्मों का अपना महत्व है, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसी फिल्मों में कुछ खास बात होती है, जिनका आनंद पूरा परिवार एक साथ बैठकर ले सकता है।' उनका मानना है कि इतने वर्षों के बाद भी दर्शकों का प्यार और स्नेह ही उनके लिए सबसे ज़्यादा मायने रखता है।

पिलगांवकर ने 'कापूसकोंडा' को लेकर कहा, 'इस फिल्म में हास्य, अपनापन, भावनाएं और सबसे बढ़कर, बहुत सारा दिल है। यह एक ऐसे रिश्ते के बारे में है जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। मुझे हमेशा से पारिवारिक फिल्में पसंद रही हैं, क्योंकि ये ऐसी यादें बनाती हैं, जिन्हें कई पीढ़ियां आपस में साझा कर सकती हैं।'

फिल्म की कहानी और किरदार

'कापूसकोंडा' में सचिन पिलगांवकर एक रिटायर्ड पोस्टमैन की भूमिका निभा रहे हैं, जिन्हें कुत्तों से अत्यधिक डर लगता है। उनके शांत पारिवारिक जीवन में तब उथल-पुथल मच जाती है जब अचानक एक कुत्ता उनके घर में आ धमकता है। किरदार स्पष्ट कह देता है कि या तो कुत्ता रहेगा या वह — लेकिन परिस्थितियाँ उन्हें उसी जीव के साथ रहने पर मजबूर कर देती हैं जिससे वे सर्वाधिक भयभीत हैं।

आज के दौर में जब सिनेमाघरों में क्राइम थ्रिलर, रहस्य और गंभीर ड्रामा का बोलबाला है, 'कापूसकोंडा' एक ताज़ा और सुखद बदलाव के रूप में सामने आती है। अपनापन, हास्य और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित यह फिल्म भिन्न पीढ़ियों के दर्शकों को एक साथ जोड़ने का प्रयास करती है।

चार पैरों वाले सह-कलाकार के साथ अनुभव

फिल्म में कुत्ते के साथ काम करने के अनुभव पर पिलगांवकर ने कहा, 'मुझे हमेशा से जानवरों से प्यार रहा है, और मेरा कुत्ता 'जैक' मेरे दिल के बहुत करीब है। वह हमारे परिवार का हिस्सा है, इसलिए इस फिल्म में एक कुत्ते के साथ काम करना मेरे लिए एक बहुत ही खास और अनोखा अनुभव रहा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पर्दे पर उनका किरदार कुत्तों से डरता है, जबकि असल ज़िंदगी में वे इन्हें बेहद पसंद करते हैं।

पिलगांवकर के अनुसार, 'कुत्तों के साथ हमारा जो रिश्ता होता है, वह बहुत खूबसूरत होता है। वे हमें जो प्यार, भरोसा और साथ देते हैं, वह पूरी तरह से निःस्वार्थ होता है।' यह विरोधाभास — पर्दे पर भय और असल जीवन में प्रेम — फिल्म की कॉमेडी को एक स्वाभाविक गहराई देता है।

फिल्म की निर्माण टीम

'कापूसकोंडा' को सचिन एस. एस. मोहिते ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म को पैनोरमा स्टूडियोज़ का सहयोग प्राप्त है और इसका निर्माण स्टोरीवाला फिल्म ने वी. पी. मौली ग्रुप के साथ मिलकर किया है। फिल्म से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए पिलगांवकर को उम्मीद है कि दर्शक इसे भी उतना ही प्यार देंगे जितना उनके पूरे सफर में मिला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक बड़े सिनेमाई सवाल की ओर इशारा करता है — क्या OTT और मल्टीप्लेक्स के युग में 'ऑल-एज एंटरटेनमेंट' के लिए अभी भी जगह है? 'कापूसकोंडा' जैसी फिल्में यह दिखाने की कोशिश करती हैं कि भावनात्मक सरलता को कमज़ोरी नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि बॉक्स ऑफिस पर सफलता ही यह तय करेगी कि क्या दर्शक वाकई 'हल्की' फिल्मों की ओर लौटना चाहते हैं, या यह सिर्फ एक नॉस्टेल्जिया-ड्रिवन चाहत है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिल्म 'कापूसकोंडा' किस बारे में है?
'कापूसकोंडा' एक पारिवारिक हास्य फिल्म है जिसमें सचिन पिलगांवकर एक रिटायर्ड पोस्टमैन का किरदार निभाते हैं जिन्हें कुत्तों से डर लगता है। जब एक कुत्ता उनके घर में आ जाता है, तो उनकी शांत ज़िंदगी में उथल-पुथल मच जाती है और वे उसी जीव के साथ रहने पर मजबूर हो जाते हैं जिससे वे सबसे ज़्यादा भयभीत हैं।
सचिन पिलगांवकर को पारिवारिक फिल्में क्यों पसंद हैं?
सचिन पिलगांवकर के अनुसार, पारिवारिक फिल्में ऐसी यादें बनाती हैं जिन्हें कई पीढ़ियां आपस में साझा कर सकती हैं। उनका मानना है कि पूरा परिवार एक साथ बैठकर जिस फिल्म का आनंद ले सके, उसमें एक अलग ही खासियत होती है।
'कापूसकोंडा' को किसने निर्देशित किया है?
'कापूसकोंडा' को सचिन एस. एस. मोहिते ने लिखा और निर्देशित किया है। इसका निर्माण स्टोरीवाला फिल्म ने वी. पी. मौली ग्रुप के साथ मिलकर किया है और इसे पैनोरमा स्टूडियोज़ का सहयोग प्राप्त है।
क्या सचिन पिलगांवकर को असल जीवन में भी कुत्तों से डर लगता है?
नहीं, पर्दे पर उनका किरदार कुत्तों से डरता है, लेकिन असल ज़िंदगी में सचिन पिलगांवकर को कुत्ते बहुत पसंद हैं। उनका अपना कुत्ता 'जैक' उनके परिवार का अहम हिस्सा है।
'कापूसकोंडा' को दर्शकों की कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है?
रिपोर्टों के अनुसार, 'कापूसकोंडा' को हालिया रिलीज़ के बाद दर्शकों की काफी अच्छी और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। सचिन पिलगांवकर को उम्मीद है कि दर्शक इस फिल्म को भी उतना ही प्यार देंगे जितना उनके पूरे करियर में मिला है।
राष्ट्र प्रेस
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