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शकील बदायूंनी की 110वीं जयंती: सरकारी नौकरी छोड़ बने हिंदी सिनेमा के अमर गीतकार

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शकील बदायूंनी की 110वीं जयंती: सरकारी नौकरी छोड़ बने हिंदी सिनेमा के अमर गीतकार

सारांश

सरकारी नौकरी छोड़ मुंबई का रुख करने वाले शकील बदायूंनी ने 89 फिल्मों को अमर गीत दिए। 'मन तड़पत हरि दर्शन को आज' से लेकर 'चौदहवीं का चांद' तक — उनकी कलम ने हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग को परिभाषित किया। 3 अगस्त को उनकी 110वीं जयंती है।

मुख्य बातें

शकील बदायूंनी का जन्म 3 अगस्त, 1916 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हुआ था; इस वर्ष उनकी 110वीं जयंती है।
उनका असली नाम शकील अहमद था; अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा के बाद दिल्ली में सरकारी नौकरी की, जो 1944 में छोड़कर मुंबई आ गए।
संगीतकार नौशाद के साथ जोड़ी बनाकर 'मुगल-ए-आजम' , 'मदर इंडिया' , 'बैजू बावरा' समेत कई कालजयी फिल्मों के गीत लिखे।
कुल 89 फिल्मों के लिए गीत लिखे और सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता।
20 अगस्त, 1970 को मुंबई में मात्र 53 वर्ष की आयु में निधन हुआ।

प्रसिद्ध गीतकार और शायर शकील बदायूंनी का जन्म 3 अगस्त, 1916 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हुआ था। इस वर्ष उनकी 110वीं जयंती है। हिंदी सिनेमा को उन्होंने ऐसे गीत दिए जो दशकों बाद भी श्रोताओं के दिलों में बसे हुए हैं। 20 अगस्त, 1970 को मुंबई में मात्र 53 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

शुरुआती जीवन और सरकारी नौकरी का त्याग

शकील बदायूंनी का असली नाम शकील अहमद था। बदायूं से गहरे जुड़ाव के कारण उन्होंने अपने नाम के साथ 'बदायूंनी' जोड़ा। प्रारंभिक शिक्षा के बाद वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पहुँचे और वहाँ से पढ़ाई पूरी कर दिल्ली में सरकारी सेवा में आ गए। दिल्ली प्रवास के दौरान ही उनकी काव्य-प्रतिभा मुशायरों में निखरने लगी। वर्ष 1940 में उन्होंने सलमा से निकाह किया और वर्ष 1944 में दिल्ली की नौकरी छोड़कर मुंबई की ओर रुख किया — एक ऐसा फैसला जिसने हिंदी सिनेमा का इतिहास बदल दिया।

नौशाद के साथ अविस्मरणीय जोड़ी

मुंबई आने के बाद शकील बदायूंनी और संगीतकार नौशाद की जोड़ी हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित जोड़ियों में से एक बन गई। दोनों ने पहली बार फिल्म 'दर्द' के लिए साथ काम किया, जो सुपरहिट रही। इसके बाद 'दीदार', 'बैजू बावरा', 'मदर इंडिया', 'मुगल-ए-आजम', 'गंगा जमुना' और 'मेरे मेहबूब' जैसी कालजयी फिल्मों के गीत इसी जोड़ी की कलम और सुर से निकले। अपने करियर में शकील ने कुल 89 फिल्मों के लिए गीत लिखे।

यादगार गीत और भजन

शकील बदायूंनी ने फिल्मी गीतों के साथ-साथ भजन रचना में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। फिल्म 'बैजू बावरा' का भजन 'मन तड़पत हरि दर्शन को आज...' आज भी भक्ति संगीत की श्रेष्ठ रचनाओं में गिना जाता है। उनके लिखे अन्य प्रसिद्ध गीतों में 'चौदहवीं का चांद', 'प्यार किया तो डरना क्या', 'न जाओ सैंया छुड़ा के बैयां कसम तुम्हारी', 'हुस्नवाले तेरा जवाब नहीं' और 'सुहानी रात ढल चुकी' शामिल हैं।

पुरस्कार और विरासत

शकील बदायूंनी को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किया गया। गौरतलब है कि महज 53 वर्ष के जीवनकाल में उन्होंने जो रचनात्मक विरासत छोड़ी, वह हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग की पहचान बन गई। उनकी 110वीं जयंती पर उनके गीत आज भी उतने ही प्रासंगिक और मर्मस्पर्शी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो उस दौर के किसी भी गीतकार के लिए असाधारण था। यह भी विचारणीय है कि एक सरकारी कर्मचारी ने सुरक्षित नौकरी छोड़कर अनिश्चित फिल्मी दुनिया को चुना और महज 53 वर्ष की आयु में 89 फिल्मों की विरासत छोड़ गए। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर उनके भजन-लेखन को नज़रअंदाज़ करती है, जबकि 'मन तड़पत हरि दर्शन को आज' जैसी रचनाएँ उनकी काव्य-गहराई का सबसे प्रामाणिक प्रमाण हैं।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शकील बदायूंनी कौन थे और उनकी 110वीं जयंती कब है?
शकील बदायूंनी हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित गीतकार और शायर थे, जिनका जन्म 3 अगस्त, 1916 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हुआ था। 3 अगस्त, 2026 को उनकी 110वीं जयंती मनाई जा रही है।
शकील बदायूंनी ने सरकारी नौकरी क्यों छोड़ी?
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पढ़ाई के बाद शकील ने दिल्ली में सरकारी नौकरी की, लेकिन मुशायरों में उनकी काव्य-प्रतिभा निखरती रही। वर्ष 1944 में उन्होंने नौकरी छोड़कर मुंबई का रुख किया और हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई।
शकील बदायूंनी के सबसे प्रसिद्ध गीत कौन-से हैं?
उनके सबसे यादगार गीतों में 'चौदहवीं का चांद', 'प्यार किया तो डरना क्या', 'न जाओ सैंया छुड़ा के बैयां', 'हुस्नवाले तेरा जवाब नहीं', 'सुहानी रात ढल चुकी' और भजन 'मन तड़पत हरि दर्शन को आज' शामिल हैं।
नौशाद और शकील बदायूंनी ने किन फिल्मों के लिए साथ काम किया?
नौशाद और शकील बदायूंनी की जोड़ी ने 'दर्द', 'दीदार', 'बैजू बावरा', 'मदर इंडिया', 'मुगल-ए-आजम', 'गंगा जमुना' और 'मेरे मेहबूब' समेत कई कालजयी फिल्मों के लिए काम किया। इनकी पहली साझेदारी फिल्म 'दर्द' से शुरू हुई थी।
शकील बदायूंनी को कौन-से पुरस्कार मिले और उनका निधन कब हुआ?
शकील बदायूंनी को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने करियर में 89 फिल्मों के लिए गीत लिखे। 20 अगस्त, 1970 को मुंबई में मात्र 53 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
राष्ट्र प्रेस
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