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असद भोपाली पुण्यतिथि: 'मैंने प्यार किया' के गीतों ने बनाया सलमान को स्टार, मृत्युशय्या पर मिला फिल्मफेयर

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असद भोपाली पुण्यतिथि: 'मैंने प्यार किया' के गीतों ने बनाया सलमान को स्टार, मृत्युशय्या पर मिला फिल्मफेयर

सारांश

असद भोपाली — वो शायर जिनकी कलम ने 'कबूतर जा जा जा' से सलमान खान को स्टार बनाया, लेकिन जीवन के आखिरी पलों में बीमारी के बावजूद फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। 9 जून को उनकी पुण्यतिथि पर याद करें उस फनकार को जिसके गीत चार दशक बाद भी दिलों में जिंदा हैं।

मुख्य बातें

गीतकार असद भोपाली का निधन 9 जून 1990 को हुआ था; उनका असली नाम असदुल्लाह खान था।
जन्म 10 जुलाई 1921 को भोपाल, मध्य प्रदेश में; पिता मुंशी अहमद खान अरबी-फारसी के शिक्षक थे।
वर्ष 1949 में फजली ब्रदर्स ने मुशायरे में खोजा और मुंबई फिल्म करियर की शुरुआत हुई।
1989 की फिल्म 'मैंने प्यार किया' के गीत — 'दिल दीवाना' , 'कबूतर जा जा जा' , 'मेरे रंग में रंगने वाली' — ने सलमान खान को स्टार बनाने में अहम भूमिका निभाई।
1990 में 'दिल दीवाना' गीत के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, लेकिन बीमारी के कारण समारोह में शामिल नहीं हो सके।
100 से अधिक फिल्मों में गीत लिखे; परिवार में दो पत्नियों से तीन पुत्र — ताज , ताबिश और गालिब असद भोपाली ।

हिंदी सिनेमा के मशहूर शायर और गीतकार असद भोपाली का निधन 9 जून 1990 को हुआ था। उनकी लेखनी ने 'कबूतर जा जा जा' और 'वो जब याद आए, बहुत याद आए' जैसे कालजयी गीत हिंदी सिनेमा को दिए, जो आज भी संगीत प्रेमियों के जेहन में ताज़े हैं। 1949 से 1990 तक के चार दशकों के करियर में उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में अपनी कलम चलाई।

भोपाल से मुंबई तक का सफर

असद भोपाली का असली नाम असदुल्लाह खान था। उनका जन्म 10 जुलाई 1921 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुआ था। उनके पिता मुंशी अहमद खान अरबी और फारसी के शिक्षक थे, जिस संस्कारी माहौल में असद की शायरी की जड़ें पड़ीं। कॉलेज के दिनों से ही वे मुशायरों में अपनी रचनाएँ सुनाने लगे थे।

वर्ष 1949 में भोपाल के एक मुशायरे में फजली ब्रदर्स की नज़र उन पर पड़ी। उनके अनूठे अंदाज़ ने फजली ब्रदर्स को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने 28 वर्षीय असद को फिल्म के लिए चुन लिया — और यहीं से मुंबई में उनके करियर की नींव रखी गई।

पारसमणी से मैंने प्यार किया तक

वर्ष 1963 में फिल्म 'पारसमणी' के लिए असद भोपाली ने 'वो जब याद आए, बहुत याद आए' और 'हंसता हुआ नूरानी चेहरा' जैसे गीत लिखे, जिन्होंने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा 'सौ बार जनम लेंगे' और 'दिल का सूना साज तराना ढूंढेगा' जैसी रचनाएँ भी उनकी कलम की देन हैं।

उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ आया वर्ष 1989 में, जब सलमान खान की फिल्म 'मैंने प्यार किया' रिलीज़ हुई। असद भोपाली द्वारा लिखे 'दिल दीवाना बिन सजना के माने ना', 'मेरे रंग में रंगने वाली' और 'कबूतर जा जा जा' ने दर्शकों के दिल जीत लिए। माना जाता है कि इन गीतों ने सलमान खान को बॉलीवुड का नया सितारा बनाने में अहम भूमिका निभाई।

जीवन के अंतिम पलों में मिला सम्मान

असद भोपाली को वर्ष 1990 में 'दिल दीवाना' गीत के लिए प्रतिष्ठित फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाज़ा गया। लेकिन बीमारी के चलते वे पुरस्कार समारोह में शामिल नहीं हो सके। यह सम्मान उन्हें उनके जीवन के अंतिम दिनों में मिला — और 9 जून 1990 को उनका निधन हो गया।

व्यक्तिगत जीवन

असद भोपाली ने दो विवाह किए। पहली पत्नी आयशा से उनके दो पुत्र — ताज और ताबिश — तथा छह पुत्रियाँ हुईं। दूसरी पत्नी से उनके पुत्र गालिब असद भोपाली हुए, जो स्वयं भी शायरी से जुड़े रहे।

गौरतलब है कि असद भोपाली का जीवन संघर्षों और सृजन का अनूठा संगम था। उनके गीत आज भी हिंदी सिनेमा की विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं, और आने वाली पीढ़ियाँ उनकी लेखनी को याद करती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उन गीतों के रचयिता को वह सार्वजनिक पहचान कभी नहीं मिली जिसके वे हकदार थे। यह उस दौर की बात है जब गीतकार की भूमिका को अभिनेता या संगीतकार की तुलना में हमेशा दोयम दर्जे का माना गया। असद भोपाली की विरासत इस बात की याद दिलाती है कि सिनेमा की आत्मा शब्दों में बसती है — और उन शब्दों के रचनाकारों को उचित श्रेय देना अभी भी अधूरा काम है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असद भोपाली का निधन कब हुआ?
असद भोपाली का निधन 9 जून 1990 को हुआ था। निधन से कुछ समय पहले ही उन्हें 'दिल दीवाना' गीत के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था, लेकिन बीमारी के कारण वे समारोह में शामिल नहीं हो सके।
'मैंने प्यार किया' में असद भोपाली ने कौन-से गीत लिखे थे?
1989 की फिल्म 'मैंने प्यार किया' में असद भोपाली ने 'दिल दीवाना बिन सजना के माने ना', 'मेरे रंग में रंगने वाली' और 'कबूतर जा जा जा' जैसे लोकप्रिय गीत लिखे। इन गीतों को सलमान खान के करियर की नींव रखने वाला माना जाता है।
असद भोपाली को फिल्मफेयर अवॉर्ड किस गीत के लिए मिला?
असद भोपाली को वर्ष 1990 में 'दिल दीवाना' गीत के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह उनके जीवन का अंतिम और सबसे बड़ा पुरस्कार था।
असद भोपाली का फिल्मी करियर कैसे शुरू हुआ?
वर्ष 1949 में भोपाल के एक मुशायरे में फजली ब्रदर्स ने 28 वर्षीय असद भोपाली की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें फिल्म के लिए चुना। इसके बाद वे मुंबई आए और अपने चार दशक लंबे करियर की शुरुआत की।
राष्ट्र प्रेस
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