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शकील बदायूंनी: सपनों की राह पर चलकर बनाई अनोखी पहचान

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शकील बदायूंनी: सपनों की राह पर चलकर बनाई अनोखी पहचान

सारांश

शकील बदायूंनी, हिंदी सिनेमा के एक महान गीतकार, जिन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर शायरी में अपना करियर बनाया, की कहानी। उनका योगदान आज भी हमारे दिलों में जीवित है। जानें उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा।

मुख्य बातें

शकील बदायूंनी ने सपनों का पीछा करते हुए नया इतिहास रचा।
उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर शायरी में करियर बनाया।
उनके गीत आज भी हर पीढ़ी को पसंद आते हैं।
लगभग 90 फिल्में और तीन बार फिल्मफेयर पुरस्कार जीते।
उनकी लेखनी में गहराई और मिठास की अद्भुत मिसाल।

मुंबई, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पुराने दौर के गीत आज भी लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखते हैं। ऐसे सुनहरे समय के एक प्रसिद्ध गीतकार शकील बदायूंनी थे, जिनके गीतों में अद्भुत मिठास और गहराई होती थी, जो सीधे दिलों में उतर जाती थी।

उन्होंने 20 अप्रैल 1970 को अंतिम सांस ली, लेकिन उनके शब्द आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उनकी ज़िंदगी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने सुरक्षित रास्ता छोड़कर अपने सपनों का अनुसरण किया और एक नया इतिहास रचा।

शकील बदायूंनी का जन्म 3 अगस्त 1916 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था। उनका असली नाम शकील अहमद था, लेकिन उन्होंने अपने शहर का नाम 'तखल्लुस' के रूप में अपनाया। बचपन से ही उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ शायरी में गहरी रुचि थी। आगे की पढ़ाई के लिए वे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पहुंचे, जहां उन्होंने मुशायरों में भाग लेना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाने लगे।

पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने दिल्ली में सप्लाई ऑफिसर के रूप में सरकारी नौकरी शुरू की। उस समय सरकारी नौकरी को सुरक्षित माना जाता था। लेकिन शकील बदायूंनी का मन गीत लिखने में लगा रहता था। अंततः उन्होंने बड़ा निर्णय लिया और अपनी नौकरी छोड़ दी। यह कदम जोखिम भरा था, लेकिन उन्होंने साहस दिखाया और 1944 में मुंबई पहुंचे। यही निर्णय उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

मुंबई पहुँचने के बाद, उनकी मुलाकात फिल्म निर्माता ए.आर. करदार और महान संगीतकार नौशाद से हुई। उन्होंने पहली मुलाकात में ही अपनी शायरी से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने एक पंक्ति लिखी, ''हम दर्द का अफसाना दुनिया को सुना देंगे…'' यही पंक्ति उनके करियर की शुरुआत बनी। उन्हें फिल्म 'दर्द' के लिए गीत लिखने का मौका मिला और उनके गाने लोगों में बहुत लोकप्रिय हुए।

इसके बाद, शकील बदायूंनी और नौशाद की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए। 'बैजू बावरा', 'मदर इंडिया', और 'मुगल-ए-आजम' जैसी फिल्मों के गाने आज भी अमर हैं। 'प्यार किया तो डरना क्या' और 'मन तड़पत हरि दर्शन को आज' जैसे गीतों में उनकी लेखनी की गहराई स्पष्ट होती है।

उनकी विशेषता यह थी कि वे हर प्रकार के गीत लिख सकते थे। उन्होंने रोमांस, दर्द, भक्ति, और देशभक्ति—हर भावना को अपने शब्दों में ढाला। उनके गीत सरल भाषा में होते थे, लेकिन उनका प्रभाव बहुत गहरा होता था। यही कारण है कि उनके लिखे गाने आज भी हर पीढ़ी को पसंद आते हैं।

अपने करियर में शकील बदायूंनी ने लगभग 90 फिल्मों के लिए गीत लिखे और तीन बार फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त किए। उन्हें 'चौदहवीं का चांद', 'हुस्नवाले तेरा जवाब नहीं', और 'कहीं दीप जले कहीं दिल' जैसे गीतों के लिए सम्मान मिला। 20 अप्रैल 1970 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि कैसे एक व्यक्ति ने अपने सपनों का पीछा करते हुए न केवल खुद को बल्कि हिंदी सिनेमा को भी अमिट योगदान दिया। उनकी शायरी आज भी हर पीढ़ी को आकर्षित करती है, जो उनकी लेखनी की गहराई और सुंदरता को दर्शाती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शकील बदायूंनी का जन्म कब हुआ?
शकील बदायूंनी का जन्म 3 अगस्त 1916 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था।
शकील बदायूंनी ने कितनी फिल्मों के लिए गीत लिखे?
शकील बदायूंनी ने लगभग 90 फिल्मों के लिए गीत लिखे।
वे किस फिल्म के लिए पहले गीतकार बने?
उन्होंने फिल्म 'दर्द' के लिए गीत लिखने का अवसर प्राप्त किया।
उनका असली नाम क्या था?
उनका असली नाम शकील अहमद था।
उन्होंने कब अंतिम सांस ली?
उन्होंने 20 अप्रैल 1970 को अंतिम सांस ली।
राष्ट्र प्रेस
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