शेखर सुमन बोले — आबादी, नेता, सिस्टम और अशिक्षा हैं देश की सबसे बड़ी समस्याएँ
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता और होस्ट शेखर सुमन ने अपनी नई वेब सीरीज़ 'द पिरामिड स्कीम' के प्रमोशन के दौरान 7 जून 2026 को मुंबई में समाज की मौजूदा हालत पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती आबादी, कमज़ोर सिस्टम, नेताओं की भूमिका और अशिक्षा के चलते लोग बार-बार झूठे वादों और वित्तीय घोटालों के जाल में फँसते रहते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पिरामिड स्कीम पर आधारित यह सीरीज़ प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है।
मुख्य बयान: क्या बोले शेखर सुमन
शेखर सुमन ने कहा, 'एक बड़ी वजह है यहाँ की आबादी, नेता, सिस्टम और साक्षरता का स्तर। अशिक्षित होने के कारण बहुत सी बातें लोगों को समझ नहीं आतीं। कुछ लोग खुद बेवकूफ बनते हैं और मूर्ख बनाने वाले हमेशा तैयार रहते हैं।' उन्होंने आगे जोड़ा कि जो लोग रातों-रात अमीर बनाने का वादा करते हैं, उनसे सबसे पहले सावधान रहना चाहिए।
जल्दी अमीर बनाने की स्कीमों पर कड़ी चेतावनी
सुमन ने तेज़ी से पैसा कमाने के प्रलोभन देने वालों को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'जो कहते हैं कि कल, परसों या महीने के अंत में आपको इतना पैसा मिल जाएगा — सबसे पहले उन्हें पकड़ो।' उनका तर्क था कि अगर पैसा कमाना इतना आसान होता, तो दुनिया में कोई गरीब न बचता — यह सीधे तौर पर एक घोटाला है।
अपना निजी अनुभव भी साझा किया
अभिनेता ने बताया कि वर्ष 2000 में किसी व्यक्ति ने उन्हें भी इसी तरह की एक स्कीम में शामिल होने के लिए समझाने की कोशिश की थी। शुरुआत में प्रस्ताव आकर्षक लगा, लेकिन उन्हें जल्द ही शक हो गया और उन्होंने समय रहते उस जाल को पहचान लिया। यह किस्सा उन्होंने इसलिए साझा किया ताकि लोग समझें कि ऐसे प्रस्ताव कितने भरोसेमंद लग सकते हैं।
'द पिरामिड स्कीम': सीरीज़ और स्टारकास्ट
द वायरल फीवर (TVF) द्वारा निर्मित यह सीरीज़ पिरामिड स्कीम की दुनिया पर आधारित है, जिसमें लोग जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में किस तरह फँसते हैं, यह दर्शाया गया है। सीरीज़ में शेखर सुमन के अलावा रणवीर शौरी, श्रेयांश पांडे, परमवीर चीमा, अंजन श्रीवास्तव, अल्फिया जाफरी, आशीष राघव, अखिलेंद्र मिश्रा और स्मिता बंसल जैसे कलाकार हैं। सीरीज़ का निर्देशन आशीष आर. शुक्ला और श्रेयांश पांडे ने किया है।
शिक्षा और जागरूकता ही है असली हल
शेखर सुमन का मानना है कि जब तक देश में शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा, लोग ऐसे झाँसों में फँसते रहेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी 'आसान पैसे' के प्रस्ताव में बिना सोचे-समझे न पड़ें और जागरूकता को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएँ। उनकी यह बात सीरीज़ की थीम से परे एक सामाजिक संदेश के रूप में सामने आई।