'द पिरामिड स्कीम' में रणवीर शौरी: 'शुरुआती दिनों में ऐसी कंपनी को करीब से देखा था'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता रणवीर शौरी इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज 'द पिरामिड स्कीम' को लेकर चर्चा में हैं, जो प्राइम वीडियो पर उपलब्ध है। यह सीरीज उन पिरामिड स्कीम्स और मल्टी-लेवल मार्केटिंग मॉडलों की पड़ताल करती है, जो त्वरित धन-लाभ का सपना दिखाकर लोगों को अपने जाल में फँसाते हैं। शो के प्रचार के दौरान रणवीर ने खुलासा किया कि वह स्वयं अपने शुरुआती दिनों में ऐसी एक कंपनी के कामकाज को नज़दीक से देख चुके हैं।
निजी अनुभव: जब रणवीर शौरी पिरामिड स्कीम की दुनिया से रूबरू हुए
रणवीर शौरी ने बताया, 'अपने शुरुआती दिनों में मैंने एक ऐसी कंपनी को करीब से देखा था, जिसका कामकाज पिरामिड स्कीम जैसा था। उस समय मेरा टीवी करियर शुरू नहीं हुआ था और मैं अलग-अलग इवेंट्स में हिस्सा लिया करता था। एक बार मैं ऐसी ही एक कंपनी के इवेंट में गया था।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कभी उस स्कीम का हिस्सा नहीं बने और न ही उसमें कोई निवेश किया, लेकिन उन्होंने उसके काम करने के तरीके को भीतर से समझा।
अभिनेता ने उस दौर की सामाजिक परिस्थितियों पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा, 'उस दौर में लोगों के पास आज जैसी जानकारी और जागरूकता नहीं थी। इंटरनेट और सोशल मीडिया का प्रभाव भी इतना नहीं था, इसलिए कई लोगों को ऐसी स्कीम पूरी तरह एक आकर्षक करियर ऑप्शन की तरह लगती थी।' उनके अनुसार, उस समय लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि वे कम समय में बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।
बदलते वक्त में बढ़ी जागरूकता
रणवीर का मानना है कि आज का दौर उस समय से काफी अलग है। उन्होंने कहा कि अब ज़्यादातर लोग किसी भी निवेश या कमाई के मॉडल को अपनाने से पहले उसकी पूरी जानकारी लेने की कोशिश करते हैं। 'आज परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं और लोग पहले की तुलना में ज़्यादा समझदार हो गए हैं' — यह उनका स्पष्ट मत है। यह बदलाव सोशल मीडिया और डिजिटल साक्षरता के प्रसार का परिणाम माना जा सकता है।
किरदार 'मनोज श्रीवास्तव' और आम आदमी की कहानी
सीरीज में रणवीर शौरी मनोज श्रीवास्तव नाम के एक सामान्य व्यक्ति का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने इस भूमिका को लेकर कहा, 'यह किरदार उन लाखों आम लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो जिंदगी की जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को दबाकर जीते हैं।' परिवार का खर्च, बच्चों की परवरिश और रोज़मर्रा की ज़रूरतों में उलझे लोगों के व्यक्तिगत सपने अक्सर पीछे छूट जाते हैं — यही इस किरदार की त्रासदी है।
रणवीर के अनुसार, 'ऐसे लोगों के भीतर बेहतर ज़िंदगी पाने की उम्मीद हमेशा मौजूद रहती है। यही उम्मीद कई बार उन्हें ऐसे अवसरों की ओर खींच ले जाती है, जो बाहर से बेहद आकर्षक दिखाई देते हैं।' शो में उनका किरदार इसी उम्मीद के कारण एक पिरामिड स्कीम के जाल में फँस जाता है।
निर्देशकों की भूमिका और शो का निर्माण
रणवीर ने इस भूमिका की चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा, 'इस किरदार को निभाना आसान नहीं था, क्योंकि इसमें आम आदमी की भावनाओं, उम्मीदों और कमज़ोरियों को सच्चाई के साथ दिखाना था।' उन्होंने इस भूमिका का श्रेय शो के निर्देशकों को दिया और कहा कि उनके मार्गदर्शन के बिना इस किरदार के साथ पूरा न्याय कर पाना मुश्किल होता।
'द पिरामिड स्कीम' का निर्माण 'द वायरल फीवर' ने किया है। सीरीज को श्रेयांश पांडे ने लिखा है, जबकि इसका निर्देशन आशीष आर. शुक्ला और श्रेयांश पांडे ने संयुक्त रूप से किया है। यह सीरीज वित्तीय धोखाधड़ी के एक ऐसे पहलू को उजागर करती है जो आज भी लाखों भारतीय परिवारों की ज़िंदगी को प्रभावित करता है।