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श्रीदेवी को 'हिम्मतवाला' ने दी पहचान, पर खुद मानती थीं बदनसीब — कैसे बनीं भारत की पहली महिला सुपरस्टार

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श्रीदेवी को 'हिम्मतवाला' ने दी पहचान, पर खुद मानती थीं बदनसीब — कैसे बनीं भारत की पहली महिला सुपरस्टार

सारांश

'हिम्मतवाला' ने श्रीदेवी को स्टार बनाया, पर उन्हें डर था कि ग्लैमर की यह पहचान उनके गंभीर अभिनय को दबा देगी। उस डर को उन्होंने 'चालबाज', 'लम्हे' और 'इंग्लिश-विंग्लिश' से गलत साबित किया — और बन गईं भारतीय सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार।

मुख्य बातें

श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के शिवकाशी में हुआ; मात्र 4 वर्ष की आयु में बाल कलाकार बनीं।
1983 की 'हिम्मतवाला' ने उन्हें हिंदी सिनेमा में स्थापित किया, लेकिन 'श्रीदेवी: क्वीन ऑफ हार्ट्स' पुस्तक के अनुसार वह इस सफलता को बदकिस्मती मानती थीं।
'चालबाज' , 'लम्हे' , 'मिस्टर इंडिया' और 'चांदनी' जैसी फिल्मों से उन्होंने अभिनय की बहुमुखी प्रतिभा साबित की।
2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया; उन्हें हिंदी सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार माना जाता है।
24 फरवरी 2018 को दुबई में 54 वर्ष की आयु में निधन; 2017 की 'मॉम' उनकी अंतिम पूर्ण फिल्म रही।

भारतीय सिनेमा की दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी का करियर जितना चमकदार था, उतना ही जटिल भी। 1983 में आई फिल्म 'हिम्मतवाला' ने उन्हें रातोंरात हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित अभिनेत्री बना दिया — लेकिन 'श्रीदेवी: क्वीन ऑफ हार्ट्स' पुस्तक में दर्ज उनके पुराने साक्षात्कारों के अनुसार, वह इसी सफलता को अपनी बदकिस्मती मानती थीं। 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के शिवकाशी में जन्मी श्रीदेवी ने बाल कलाकार से लेकर भारत की पहली महिला सुपरस्टार तक का सफर तय किया।

बचपन से पर्दे तक का सफर

श्रीदेवी का असली नाम श्री अम्मा यंगर अय्यपन था। मात्र चार वर्ष की आयु में वह बाल कलाकार के रूप में दक्षिण भारतीय सिनेमा में नजर आईं। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ — चारों भाषाओं की फिल्मों में काम करते हुए उन्होंने बचपन में ही अपनी पहचान बना ली। मलयालम फिल्म 'पूमपट्टा' में अभिनय के लिए उन्हें केरल राज्य फिल्म पुरस्कार भी मिला।

1976 की तमिल फिल्म 'मूंद्रु मुदिचु' में उन्होंने रजनीकांत और कमल हासन के साथ काम किया। इसके बाद '16 वैयाथिनिले', 'सिगप्पु रोजक्कल' और 'मूंद्रम पिराई' ने उन्हें दक्षिण की अग्रणी अभिनेत्रियों में स्थापित किया। हिंदी सिनेमा में उनकी पहली मुख्य भूमिका 1979 की 'सोलवा सावन' में थी, जो अपेक्षित पहचान नहीं दिला सकी।

'हिम्मतवाला' की सफलता और मन का डर

1983 में जीतेंद्र के साथ आई 'हिम्मतवाला' ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। फिल्म के गाने, श्रीदेवी का नृत्य और उनकी ग्लैमरस उपस्थिति दर्शकों में अत्यंत लोकप्रिय हुई। वह अचानक हिंदी सिनेमा की सर्वाधिक चर्चित चेहरा बन गईं।

किंतु 'श्रीदेवी: क्वीन ऑफ हार्ट्स' पुस्तक में उनके पुराने साक्षात्कारों के हवाले से उल्लेख है कि श्रीदेवी इस सफलता को अपने लिए पूरी तरह शुभ नहीं मानती थीं। उनकी चिंता यह थी कि इस फिल्म के बाद दर्शक और निर्माता उन्हें केवल ग्लैमरस और खूबसूरत अभिनेत्री के रूप में देखेंगे, और उनकी गंभीर अभिनय क्षमता को नजरअंदाज कर देंगे। यह बात 'हिम्मतवाला' से पहले 'सदमा' में उनके प्रशंसित किंतु व्यावसायिक रूप से असफल प्रदर्शन के संदर्भ में और भी गहरी थी — श्रीदेवी चाहती थीं कि उनके भीतर का गंभीर अभिनेता भी पहचाना जाए।

करियर का स्वर्णिम दशक

1980 का दशक श्रीदेवी के करियर का सबसे उज्ज्वल काल रहा। 'तोहफा', 'नगीना', 'मिस्टर इंडिया', 'चांदनी', 'चालबाज' और 'लम्हे' जैसी फिल्मों में उन्होंने अत्यंत विविध भूमिकाएं निभाईं। 'मिस्टर इंडिया' में उनका हास्य अभिनय और प्रसिद्ध 'हवा हवाई' गाने का अंदाज आज भी अमर है। 'चालबाज' में दो विपरीत स्वभाव की बहनों का किरदार निभाकर उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

'लम्हे' में एक ही फिल्म में अलग-अलग उम्र और भावनाओं वाले किरदारों को उन्होंने जिस सहजता से जिया, वह उनकी अभिनय दक्षता का प्रमाण था। इस दौर में वह ऐसी महिला स्टार बन चुकी थीं जिनके नाम पर फिल्म चलती थी — एक ऐसा मुकाम जो हिंदी सिनेमा में किसी महिला ने पहले हासिल नहीं किया था।

विराम और वापसी

1996 में श्रीदेवी ने फिल्म निर्माता बोनी कपूर से विवाह किया। उनकी दो बेटियाँ — जान्हवी कपूर और खुशी कपूर — हैं। 1997 की 'जुदाई' के बाद उन्होंने करीब 15 वर्षों तक फिल्मों से दूरी बनाए रखी।

2012 में 'इंग्लिश-विंग्लिश' से उन्होंने पर्दे पर वापसी की। इस फिल्म में एक सामान्य गृहिणी के किरदार ने एक बार फिर साबित किया कि उनकी अभिनय क्षमता समय के साथ और परिपक्व हुई थी। 2017 में रिलीज हुई 'मॉम' उनकी अंतिम पूर्ण फिल्म रही।

सम्मान और विरासत

श्रीदेवी को कई बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिला और 2013 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री से सम्मानित किया। उन्हें भारतीय सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है।

24 फरवरी 2018 को दुबई में मात्र 54 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके जाने की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। उनकी विरासत आज भी हिंदी सिनेमा में जीवित है — एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में जिसने ग्लैमर और गहराई, दोनों को एक साथ साधा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह दरअसल हिंदी सिनेमा की उस पुरानी बीमारी की पहचान थी जो महिला कलाकारों को या तो ग्लैमर के खाँचे में रखती है या 'गंभीर' की छाप लगाकर बॉक्स ऑफिस से दूर कर देती है। श्रीदेवी ने 'चालबाज' और 'लम्हे' से यह विभाजन तोड़ा — व्यावसायिक और कलात्मक, दोनों मोर्चों पर एक साथ। यह विरोधाभास आज भी प्रासंगिक है: जब भी कोई महिला अभिनेत्री बड़ी व्यावसायिक सफलता पाती है, उसकी 'गंभीरता' पर सवाल उठते हैं। श्रीदेवी की विरासत इस सवाल का सबसे मुकम्मल जवाब है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीदेवी 'हिम्मतवाला' की सफलता को बदकिस्मती क्यों मानती थीं?
'श्रीदेवी: क्वीन ऑफ हार्ट्स' पुस्तक में दर्ज उनके पुराने साक्षात्कारों के अनुसार, उन्हें डर था कि इस ग्लैमरस सफलता के बाद दर्शक और फिल्म उद्योग उन्हें केवल खूबसूरत और नृत्य करने वाली अभिनेत्री के रूप में देखेंगे। वह चाहती थीं कि 'सदमा' जैसी फिल्मों में दिखाई उनकी गंभीर अभिनय क्षमता को भी पहचाना जाए।
श्रीदेवी ने फिल्मी करियर कब और कहाँ से शुरू किया?
श्रीदेवी ने मात्र चार वर्ष की आयु में दक्षिण भारतीय सिनेमा में बाल कलाकार के रूप में काम शुरू किया। उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में काम किया और मलयालम फिल्म 'पूमपट्टा' के लिए केरल राज्य फिल्म पुरस्कार भी जीता।
श्रीदेवी को भारत की पहली महिला सुपरस्टार क्यों कहा जाता है?
1980 के दशक में श्रीदेवी ऐसी पहली महिला अभिनेत्री बनीं जिनके नाम पर फिल्में चलती थीं — यानी उनकी उपस्थिति मात्र से फिल्म की व्यावसायिक सफलता सुनिश्चित मानी जाती थी। 'चांदनी', 'चालबाज', 'नगीना' और 'मिस्टर इंडिया' जैसी फिल्मों ने यह स्थान पक्का किया।
श्रीदेवी की अंतिम फिल्म कौन-सी थी और उनका निधन कब हुआ?
श्रीदेवी की अंतिम पूर्ण फिल्म 2017 में रिलीज 'मॉम' थी। 24 फरवरी 2018 को दुबई में मात्र 54 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
श्रीदेवी को कौन-से प्रमुख सम्मान मिले?
श्रीदेवी को कई बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिले और 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से नवाजा। उन्हें भारतीय सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार के रूप में व्यापक स्वीकृति मिली है।
राष्ट्र प्रेस
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