तमिलनाडु CM विजय-पत्नी संगीता तलाक मामला: चेंगलपट्टू कोर्ट में सुनवाई फिर टली, 7 अगस्त को अगली तारीख
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच लंबित तलाक मामले में चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में 15 जून 2026 को निर्धारित सुनवाई एक बार फिर स्थगित हो गई। दोनों पक्ष व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हुए, जिसके चलते अगली सुनवाई की तारीख 7 अगस्त 2026 तय की गई है।
सुनवाई क्यों टली
सोमवार को जब मामला सुनवाई के लिए आया, तब न तो मुख्यमंत्री विजय और न ही उनकी पत्नी संगीता अदालत में पेश हुईं। हालाँकि दोनों पक्षों के अधिवक्ता उपस्थित रहे और उन्होंने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। दोनों की गैरहाजिरी को देखते हुए चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट ने अगली तारीख 7 अगस्त मुकर्रर कर दी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति का अनुरोध
इससे पहले दोनों पक्षों ने अदालत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की अनुमति माँगी थी। बताया गया है कि मुख्यमंत्री पद पर होने के कारण विजय को कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है, जिससे उनका अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना कठिन है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए पहले 15 जून की तारीख दी थी, जो अब आगे बढ़ा दी गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
संगीता ने दिसंबर 2025 में चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने विवाह को विघटित करने की माँग की और कहा कि दोनों के बीच ऐसे मतभेद उत्पन्न हो गए हैं जिनका समाधान संभव नहीं है। याचिका में गुजारा भत्ते की माँग भी शामिल है। यह पहली बार नहीं है जब इस मामले की सुनवाई टली हो — इससे पहले भी कई अवसरों पर दोनों पक्ष व्यक्तिगत रूप से अदालत में नहीं आए।
विजय की राजनीतिक और सार्वजनिक छवि
तमिल फिल्म उद्योग के लोकप्रिय अभिनेता रहे सी. जोसेफ विजय ने राजनीति में कदम रखते हुए तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की स्थापना की और बाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद तक पहुँचे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी सार्वजनिक छवि और प्रभाव दोनों में वृद्धि हुई है। ऐसे में उनके निजी जीवन से जुड़ा यह तलाक मामला राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया की निरंतर निगाह में है।
आगे क्या होगा
अब सभी की नज़रें 7 अगस्त 2026 की सुनवाई पर होंगी। यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों पक्ष उस दिन अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होते हैं या सुनवाई एक बार फिर टलती है।