विजयेंद्र कुमेरिया बोले — 'अचानक शादी और जूम-जूम ड्रामा टीवी पर दोबारा नहीं लौटने चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता विजयेंद्र कुमेरिया ने हिंदी टेलीविजन के बदलते परिदृश्य पर खुलकर अपनी राय रखी है। 2011 में 'छोटी बहू 2' से छोटे पर्दे पर कदम रखने वाले विजयेंद्र ने करीब डेढ़ दशक के अपने अनुभव के आधार पर कहा कि 'अचानक शादी', ओवर-द-टॉप पारिवारिक विवाद और बार-बार दोहराए जाने वाले नाटकीय कैमरा ट्रिक्स — ये सब टीवी के पुराने फॉर्मूले हैं, जिनकी वापसी नहीं होनी चाहिए।
पुराने ट्रेंड्स का दौर
विजयेंद्र ने याद किया कि किस तरह पहले के शोज में कहानी आगे बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे और अक्सर हास्यास्पद विवादों का सहारा लिया जाता था। उन्होंने कहा, 'पुराने ट्रेंड्स की बात करें तो बहुत सारे हैं। अचानक शादी हो गई, फिर ऐसे ट्रैक कि नमक किसने डाल दिया, चना किसने ज्यादा उबाल दिया। इस तरह की चीजें पहले काफी दिखाई जाती थीं।' उनके अनुसार, ये तरकीबें एक वक्त में टीवी की पहचान बन गई थीं, लेकिन अब दर्शक इनसे आगे निकल चुके हैं।
जूम-जूम कैमरा और चीख-पुकार वाले सीन
अभिनेता ने ओवर-द-टॉप सिनेमैटोग्राफी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'हाई ड्रामा वाले सीन, जिसमें कोई लगातार चिल्ला रहा है, कैमरा गोल-गोल घूम रहा है, ट्रॉली शॉट चल रहा है और बार-बार जूम-जूम किया जा रहा है — ऐसी चीजें शायद कुछ जगहों पर अभी भी देखने को मिल सकती हैं।' उन्होंने स्वीकार किया कि पूरी तरह से यह चलन खत्म नहीं हुआ, लेकिन पहले के मुकाबले बड़ा बदलाव जरूर आया है।
बदलता दर्शक, बदलता कंटेंट
विजयेंद्र का मानना है कि आज का दर्शक पहले से कहीं अधिक समझदार हो चुका है। वह महज चौंकाने वाले ट्विस्ट के लिए नहीं, बल्कि किरदारों की भावनात्मक यात्रा से जुड़ने के लिए शो देखता है। उन्होंने कहा, 'टीवी की सबसे बड़ी ताकत उसकी पहुंच है। छोटे पर्दे के जरिए कलाकार सीधे घर-घर तक पहुंचते हैं, इसलिए जरूरी है कि कहानियां ऐसी हों, जिनसे लोग खुद को जोड़ सकें।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब OTT प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता के बीच टेलीविजन उद्योग अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कंटेंट में बदलाव कर रहा है।
वर्तमान में क्या कर रहे हैं विजयेंद्र
फिलहाल विजयेंद्र कुमेरिया अभिनेत्री ईशा सिंह के साथ शो 'जुही मूई' में नजर आ रहे हैं। यह शो एक युवा ऑटिस्टिक लड़की जुही सूरी की कहानी पर आधारित है, जो अपनी अलग सोच और प्रतिभा के बल पर एक ऐसे समाज में अपनी जगह बनाने की कोशिश करती है जो अक्सर उसे समझ नहीं पाता। यह शो उसी संतुलित और संवेदनशील कहानी कहने की दिशा में एक कदम माना जा सकता है, जिसकी वकालत विजयेंद्र खुद करते हैं।
आगे की राह
विजयेंद्र की यह बात उस व्यापक बहस का हिस्सा है जो टीवी उद्योग में कंटेंट की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से चल रही है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमुख चैनलों ने अपने शोज के फॉर्मेट में बदलाव किए हैं और दर्शकों की प्रतिक्रिया भी बेहतर हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उद्योग इस बदलाव को स्थायी रूप से अपना पाता है।