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विवेक रंजन अग्निहोत्री बोले — 'कला समाज का ऑपरेटिंग सिस्टम है, कलाकार दुनिया के असली कानून बनाने वाले'

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विवेक रंजन अग्निहोत्री बोले — 'कला समाज का ऑपरेटिंग सिस्टम है, कलाकार दुनिया के असली कानून बनाने वाले'

सारांश

विवेक रंजन अग्निहोत्री का मानना है कि कला महज मनोरंजन नहीं — वह सभ्यता का ऑपरेटिंग सिस्टम है। उनके अनुसार, क्रांति सड़कों पर आने से पहले कहानियों और फिल्मों में जन्म लेती है, और कलाकार ही वे असली विधायक हैं जो समाज की आत्मा को लिखते हैं।

मुख्य बातें

विवेक रंजन अग्निहोत्री ने 9 जून को इंस्टाग्राम पर कला और समाज के संबंध पर विस्तृत विचार साझा किए।
उन्होंने कला को समाज का 'ऑपरेटिंग सिस्टम' बताया और कलाकारों को 'दुनिया के असली कानून बनाने वाले' कहा।
उनके अनुसार, कोई भी समाज राजनीति बदलने से पहले अपनी कल्पना बदलता है — क्रांति पहले कहानियों, गानों और फिल्मों में दिखती है।
अग्निहोत्री ने कहा कि राजनीति व्यवहार नियंत्रित करती है , जबकि कला अर्थ को — सरकार कानून बनाती है, कला लोगों को उन कानूनों की ज़रूरत महसूस कराती है।
उन्होंने 'आर्ट' को वह अदृश्य दस्तावेज बताया जिससे सभी दृश्यमान कानून और संस्थाएं जन्म लेती हैं।

फिल्म निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने 9 जून को सोशल मीडिया पर कला और समाज के गहरे अंतर्संबंध पर अपने विचार साझा किए, जिसमें उन्होंने कला को समाज का 'ऑपरेटिंग सिस्टम' करार दिया। इंस्टाग्राम पर साझा की गई इस पोस्ट में उन्होंने तर्क दिया कि कलाकार केवल मनोरंजन के वाहक नहीं, बल्कि सभ्यता की आत्मा के निर्माता हैं।

कला और सामाजिक चेतना पर अग्निहोत्री के विचार

'द कश्मीर फाइल्स' जैसी चर्चित फिल्म के निर्देशक अग्निहोत्री अपने सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने लिखा, 'कला इंसानी चेतना का गठन है और कलाकार दुनिया के असली कानून बनाने वाले हैं।' उनके अनुसार, असली बदलाव बाहरी नियमों और व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि समाज की अंदरूनी सोच और सामूहिक कल्पनाशीलता से जन्म लेता है।

क्रांति की पूर्वपीठिका कला में होती है

अग्निहोत्री ने अपनी पोस्ट में यह भी रेखांकित किया कि कोई भी समाज अपनी राजनीति बदलने से पहले अपनी कल्पना बदलता है। उनके शब्दों में, 'क्रांति सड़कों पर आने से बहुत पहले कहानियों, गानों, पेंटिंग्स, फिल्मों और मिथकों में दिखाई देने लगती है।' यह विचार इस बात की ओर संकेत करता है कि संस्कृति और कला किसी भी सामाजिक परिवर्तन की वास्तविक प्रयोगशाला होती हैं।

राजनीति बनाम कला — अर्थ का नियंत्रण

अग्निहोत्री के अनुसार, राजनीति व्यवहार को नियंत्रित करती है, जबकि कला अर्थ को। उन्होंने इसे एक सटीक उदाहरण से समझाया — सरकार गुलामी के खिलाफ कानून बना सकती है, लेकिन यह कला ही है जो लोगों के भीतर गुलामी को अस्वीकार करने की भावना जगाती है। उन्होंने आगे कहा, 'आर्ट वह अदृश्य दस्तावेज है, जिससे अंततः सभी दृश्यमान कानून निकलते हैं।'

सभ्यता की आत्मा का लेखन

अपनी पोस्ट के अंत में अग्निहोत्री ने कला को 'ऑपरेटिंग सिस्टम' की संज्ञा देते हुए कहा, 'कला सपनों, डर, प्रतीकों और कहानियों को आकार देती है, जिनसे बाद में संस्थाएं और व्यवस्थाएं बनती हैं। राजनीति सभ्यता के नियम लिखती है, लेकिन कला उस आत्मा को लिखती है, जो उन नियमों को जन्म देती है।' यह विचार उनकी उस व्यापक दृष्टि का हिस्सा है, जो सिनेमा को सामाजिक जिम्मेदारी के माध्यम के रूप में देखती है।

अग्निहोत्री का यह वैचारिक विमर्श ऐसे समय में आया है जब भारतीय सिनेमा और कला जगत में सामग्री की सामाजिक जिम्मेदारी पर बहस तेज हो रही है। उनके विचार इस चर्चा को एक नई दार्शनिक दिशा देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उनकी स्थिति की ताकत भी है और सीमा भी — क्योंकि जब कला को 'कानून बनाने' का माध्यम माना जाए, तो यह सवाल स्वाभाविक है कि किसके लिए और किस दिशा में।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कला को 'ऑपरेटिंग सिस्टम' क्यों कहा?
अग्निहोत्री का तर्क है कि जैसे कंप्यूटर का ऑपरेटिंग सिस्टम बाकी सब कुछ चलाता है, वैसे ही कला समाज की सोच, सपनों और मूल्यों को आकार देती है जिनसे बाद में संस्थाएं और कानून बनते हैं। उनके अनुसार राजनीति केवल व्यवहार नियंत्रित करती है, जबकि कला उस अर्थ को नियंत्रित करती है जो व्यवहार को जन्म देता है।
अग्निहोत्री ने यह विचार कहाँ और कब साझा किए?
उन्होंने ये विचार 9 जून को अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट के माध्यम से साझा किए। वे नियमित रूप से सोशल मीडिया पर सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर अपनी राय रखते हैं।
क्या अग्निहोत्री का मानना है कि कला राजनीति से ज़्यादा शक्तिशाली है?
हाँ, उनके अनुसार कला और राजनीति दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग हैं — राजनीति नियम लिखती है, लेकिन कला उस आत्मा को लिखती है जो उन नियमों को जन्म देती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि सरकार गुलामी के खिलाफ कानून बना सकती है, लेकिन यह कला ही है जो लोगों के भीतर गुलामी को अस्वीकार करने की चेतना जगाती है।
विवेक रंजन अग्निहोत्री कौन हैं और वे किस बात के लिए जाने जाते हैं?
विवेक रंजन अग्निहोत्री एक भारतीय फिल्म निर्माता-निर्देशक हैं जो 'द कश्मीर फाइल्स' जैसी सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर आधारित फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। वे सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए भी चर्चित हैं।
अग्निहोत्री के अनुसार क्रांति और कला का क्या संबंध है?
उनके अनुसार कोई भी सामाजिक क्रांति सड़कों पर आने से बहुत पहले कहानियों, गानों, पेंटिंग्स, फिल्मों और मिथकों में दिखाई देने लगती है। कला वह स्थान है जहाँ कोई सभ्यता अपने भविष्य की तैयारी करती है।
राष्ट्र प्रेस
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