अर्चना पूरन सिंह का खुलासा: किशोर अभिषेक बच्चन ने पार्टी में स्विमिंग पूल में दिया था धक्का
सारांश
मुख्य बातें
मनोरंजन जगत की जानी-मानी अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह ने हाल ही में एक पुराना और मज़ेदार किस्सा साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे अभिषेक बच्चन ने बचपन में उन्हें एक पार्टी के दौरान स्विमिंग पूल में धक्का दे दिया था। यह घटना उस समय की है जब अमिताभ बच्चन को फिल्म 'अग्निपथ' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था और बच्चन परिवार ने एक होटल में जश्न की पार्टी रखी थी।
पार्टी में हुई शरारत
अर्चना पूरन सिंह ने बताया कि उस रात पार्टी में सभी लोग कराओके गा रहे थे और माहौल बेहद उत्सवी था। स्विट्जरलैंड से लौटे तब के किशोर अभिषेक बच्चन ने पीछे से आकर उन्हें स्विमिंग पूल में धकेल दिया। अर्चना ने कहा, 'मैंने मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी। उन्होंने मुझे पीछे से स्विमिंग पूल में धक्का दे दिया।'
अभिषेक ने खुद 'द कपिल शर्मा शो' में इस घटना का ज़िक्र करते हुए कहा था, 'सब लोग कराओके गा रहे थे और मजा कर रहे थे। वहाँ एक स्विमिंग पूल भी था। मैं बच्चा था और शरारती भी। शायद मैं 13-14 वर्ष का रहा होऊंगा। तब मैंने अर्चना पूरन सिंह को स्विमिंग पूल में धक्का दे दिया।'
बच्चन परिवार की शर्मिंदगी
इस अप्रत्याशित शरारत से अमिताभ बच्चन और जया बच्चन को काफी शर्मिंदगी महसूस हुई। दोनों ने तुरंत अर्चना को सूखे कपड़े ऑफर किए। अमिताभ बच्चन ने कहा, 'ऊपर मेरे कुर्ते और पजामे रखे हैं। तो, अगर आप चाहें तो...' लेकिन अर्चना ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और हँसते हुए जवाब दिया, 'मैं कुर्ता-पजामा पहनकर पार्टी में शामिल नहीं रहूंगी और वो भी अमित जी के साइज़ का।'
फिल्म 'अग्निपथ' की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि मुकुल आनंद के निर्देशन में बनी 'अग्निपथ' को यश जौहर ने धर्मा प्रोडक्शन्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया था। यह फिल्म विजय दीनानाथ चौहान के किरदार की कहानी है — जिसे अमिताभ बच्चन ने निभाया था — जो मुंबई अंडरवर्ल्ड में प्रवेश कर अपने पिता की हत्या और परिवार पर हुए अन्याय का बदला लेने निकलता है।
इस फिल्म का शीर्षक प्रसिद्ध कवि और अमिताभ के पिता हरिवंश राय बच्चन की उसी नाम की कविता 'अग्निपथ' से प्रेरित था — जो इस फिल्म को एक साहित्यिक विरासत से भी जोड़ती है।
यादों की यह झलक क्यों है खास
यह किस्सा इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि यह बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों में से एक के निजी और हल्के-फुल्के पल को सामने लाता है। अर्चना पूरन सिंह की यह याद दर्शाती है कि सेलिब्रिटी जीवन के पर्दे के पीछे भी सामान्य पारिवारिक पल होते हैं — जो दशकों बाद भी मुस्कान लाते हैं।