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अर्द्धहलासन: पेट की चर्बी, पाचन और तनाव दूर करने वाला योगासन — सही विधि और सावधानियाँ

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अर्द्धहलासन: पेट की चर्बी, पाचन और तनाव दूर करने वाला योगासन — सही विधि और सावधानियाँ

सारांश

अर्द्धहलासन — हलासन का सरल रूप — पेट की चर्बी, पाचन, रीढ़ के लचीलेपन और मानसिक तनाव, सभी को एक साथ साधता है। आयुष मंत्रालय इसे मान्यता देता है। सही विधि और सावधानियाँ जानना ज़रूरी है।

मुख्य बातें

अर्द्धहलासन में पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को 90 डिग्री तक उठाया जाता है — यह हलासन का सरलीकृत रूप है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित अभ्यास से पेट की चर्बी कम होती है, पाचन तंत्र मज़बूत होता है और रक्त संचार सुधरता है।
इस अवस्था में 10 से 30 सेकंड तक रुकना और श्वास सामान्य रखना आवश्यक है।
पीठ दर्द, हर्निया या गर्भावस्था की स्थिति में इस आसन से पहले चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है।
यह आसन मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में भी सहायक माना गया है।

अर्द्धहलासन योग की उस श्रेणी में आता है जो एक साथ शरीर और मन — दोनों को साधता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से पेट की चर्बी घटती है, पाचन तंत्र मज़बूत होता है, रीढ़ में लचीलापन आता है और रक्त संचार बेहतर होता है। यह आसन उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है जो तनाव, चिंता और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

अर्द्धहलासन क्या है और इसका अर्थ

'अर्द्धहलासन' संस्कृत के दो शब्दों से बना है — 'अर्द्ध' यानी 'आधा' और 'हल' यानी 'खेत जोतने वाला हल'। यह पूर्ण हलासन का सरलीकृत रूप है। हलासन में पैरों के अंगूठे सिर के पीछे ज़मीन को छूते हैं, जबकि अर्द्धहलासन में पैरों को केवल 90 डिग्री तक ऊपर उठाया जाता है — जो इसे शुरुआती अभ्यासियों के लिए भी उपयुक्त बनाता है।

यह ऐसे समय में प्रासंगिक है जब शहरी जीवनशैली में बैठकर काम करने की आदत, अनियमित खानपान और मानसिक दबाव के कारण पेट और रीढ़ से जुड़ी समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को स्वास्थ्य लाभ के लिए मान्यता दी है।

अर्द्धहलासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, अर्द्धहलासन के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

पेट की अतिरिक्त चर्बी कम होती है और पाचन तंत्र सुदृढ़ होता है। रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ता है, जो लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही रक्त संचार में सुधार होता है और पैरों की मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं। मानसिक स्तर पर यह आसन तनाव और चिंता को कम करने में सहायक पाया गया है।

सही विधि: चरण-दर-चरण अभ्यास

अर्द्धहलासन को सही तरीके से करने के लिए इन चरणों का पालन करें:

पहला चरण: पीठ के बल समतल ज़मीन पर लेट जाएँ। दोनों हाथ शरीर के बगल में सीधे रखें और हथेलियाँ ज़मीन की ओर हों।

दूसरा चरण: धीरे-धीरे श्वास भरते हुए, घुटनों को बिना मोड़े दोनों पैरों को ऊपर उठाएँ। पैरों और ज़मीन के बीच 90 डिग्री का कोण बनाएँ।

तीसरा चरण: इस अवस्था में नितंब से कंधे तक शरीर एक सीध में रहेगा। सामान्य गति से श्वास लेते हुए इस स्थिति में 10 से 30 सेकंड तक बने रहें।

चौथा चरण: श्वास छोड़ते हुए, सिर को ज़मीन से उठाए बिना, धीरे-धीरे पैरों को वापस ज़मीन पर लाएँ। अंत में शवासन में कुछ देर विश्राम करें।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

यह आसन अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए सुरक्षित है, परंतु कुछ परिस्थितियों में विशेष सतर्कता ज़रूरी है। जिन व्यक्तियों को पीठ दर्द, हर्निया, या कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें इस आसन का अभ्यास करने से पहले किसी चिकित्सक या प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक से परामर्श लेना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को यह आसन करने से बचना चाहिए।

योग विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस आसन का अभ्यास खाली पेट, प्राथमिकतः सुबह के समय करें और शुरुआत में किसी प्रशिक्षक की निगरानी में करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उतना ही ज़रूरी है कि स्वास्थ्य दावों को प्रकाशित शोध से पुष्ट किया जाए, न कि केवल परंपरागत संदर्भ से। भारत में योग की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ी है, पर प्रशिक्षित मार्गदर्शन के बिना अभ्यास चोट का कारण भी बन सकता है — यह पहलू अक्सर मुख्यधारा की कवरेज में अनदेखा रहता है। सरकार को योग प्रसार के साथ-साथ प्रमाणित प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्द्धहलासन क्या है और यह हलासन से कैसे अलग है?
अर्द्धहलासन हलासन का आधा रूप है, जिसमें पीठ के बल लेटकर पैरों को ज़मीन से 90 डिग्री ऊपर उठाया जाता है। हलासन में पैरों के अंगूठे सिर के पीछे ज़मीन को छूते हैं, जबकि अर्द्धहलासन अपेक्षाकृत सरल है और शुरुआती अभ्यासियों के लिए उपयुक्त है।
अर्द्धहलासन के मुख्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, अर्द्धहलासन से पेट की चर्बी कम होती है, पाचन तंत्र मज़बूत होता है, रीढ़ में लचीलापन आता है, रक्त संचार सुधरता है और पैरों की मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं। यह मानसिक तनाव और चिंता को दूर करने में भी सहायक है।
अर्द्धहलासन कितनी देर तक करना चाहिए?
इस आसन में पैरों को 90 डिग्री पर उठाकर 10 से 30 सेकंड तक रुकना चाहिए। इस दौरान श्वास सामान्य रखें और सिर ज़मीन पर टिका रहे। अभ्यास के बाद शवासन में विश्राम करें।
किन लोगों को अर्द्धहलासन नहीं करना चाहिए?
पीठ दर्द, हर्निया, गर्भावस्था या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन करने से पहले चिकित्सक या प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इस आसन से बचना चाहिए।
अर्द्धहलासन करने का सबसे सही समय कौन सा है?
योग विशेषज्ञों के अनुसार, अर्द्धहलासन का अभ्यास खाली पेट, प्राथमिकतः सुबह के समय करना सबसे लाभकारी होता है। शुरुआती अभ्यासियों को किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की निगरानी में इसे सीखना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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