देर रात भोजन करना हो सकता है हानिकारक, जानें आयुर्वेद के अनुसार सही समय पर खाने के लाभ
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान समय की जीवनशैली ने सही समय पर भोजन करना कठिन बना दिया है। आयुर्वेद के अनुसार, हमें भोजन सूर्य की स्थिति के अनुसार करना चाहिए।
सूर्य की किरणों के अनुसार हमारी पाचन अग्नि काम करती है, जो भोजन को पचाने में सहायता करती है। लेकिन आजकल हम प्राकृतिक तरीके से नहीं, बल्कि अपनी दिनचर्या के अनुसार खाते हैं। हम अक्सर सोने के समय खाना खाते हैं, लेकिन क्या यह सही है? नहीं, आयुर्वेद के अनुसार, देर रात का भोजन सबसे हानिकारक होता है, क्योंकि यह पोषण नहीं, बल्कि बीमारियाँ लाता है।
हम सोचते हैं कि हम कभी भी भोजन कर सकते हैं, जिससे शरीर को पोषण मिलेगा, लेकिन यह एक गलत धारणा है। रात में खाया गया थोड़ा सा खाना भी शरीर को बीमार बना देता है। रात के समय भोजन करने से पेट में भारीपन, सुस्ती, आलस्य, गैस, नींद की कमी और सुबह ठीक से पेट साफ न होने जैसी समस्याएँ होती हैं। इसका कारण यह है कि रात में हमारी पाचन अग्नि कमजोर होती है और शरीर मरम्मत के कार्य में व्यस्त होता है। ऐसे में भोजन करने से शरीर की ऊर्जा भोजन को पचाने में लग जाती है।
धीमा पाचन रात के समय भोजन को सही से नहीं पचाता, जिससे सुबह पेट भारी और गैस, बदहजमी जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। शरीर में भोजन पचने के बजाय टॉक्सिन बनने लगते हैं और आंतों में गंदगी जमा हो जाती है। टॉक्सिन के जमा होने से शरीर सुस्त और कमजोर महसूस करता है, जिससे दिनभर ऊर्जा की कमी होती है।
तो सवाल यह है कि कब और कितना खाना चाहिए? यदि आप अपने शरीर और पाचन को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो सूर्य की स्थिति के अनुसार भोजन करना शुरू करें। कोशिश करें कि सूरज ढलने के बाद भोजन न करें। यदि भोजन आवश्यक है, तो रात का खाना 7 से 8 बजे के बीच कर लें। इसके साथ ही, भोजन हल्का और कम तैलीय होना चाहिए, ताकि पाचन में अधिक मेहनत न करनी पड़े। आयुर्वेद के अनुसार, खाना खाने के बाद लेटना नहीं चाहिए; थोड़ी देर टहलें। यदि टहलने में कठिनाई हो, तो वज्रासन में कुछ देर बैठें और पीठ को सीधा रखें। एक स्वस्थ शरीर की शुरुआत सही समय पर भोजन से होती है।