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आयुर्वेद से मानसिक शांति: शिरोधारा, प्राणायाम समेत 5 उपाय जो तनाव घटाएँ

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आयुर्वेद से मानसिक शांति: शिरोधारा, प्राणायाम समेत 5 उपाय जो तनाव घटाएँ

सारांश

भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक थकान एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। आयुष मंत्रालय ने शिरोधारा, शिरो अभ्यंग, ध्यान, प्राणायाम और योगासन को मन-शरीर संतुलन के लिए कारगर बताया है — लेकिन विशेषज्ञ की सलाह के बिना इन्हें न अपनाएँ।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 20 अगस्त को एक्स पर 5 आयुर्वेदिक अभ्यासों की जानकारी साझा की।
शिरोधारा में माथे पर औषधीय तेल की धार डाली जाती है — तंत्रिका तंत्र को शांत करने में सहायक।
शिरो अभ्यंग यानी सिर की औषधीय तेल मालिश तनाव और थकान में राहत देती है।
ध्यान और प्राणायाम मन को एकाग्र कर मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
किसी भी आयुर्वेदिक प्रक्रिया को प्रशिक्षित विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही अपनाएँ।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, आयुर्वेद मानसिक स्वास्थ्य को केवल तनाव या चिंता तक सीमित नहीं मानता — बल्कि इसे मन, शरीर और आत्मा के बीच समग्र संतुलन का विषय मानता है। 20 अगस्त को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई जानकारी में मंत्रालय ने पाँच पारंपरिक आयुर्वेदिक अभ्यासों को रेखांकित किया जो आधुनिक जीवनशैली की थकान से राहत दिला सकते हैं।

क्यों ज़रूरी है आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आज की दिनचर्या में काम का दबाव, घंटों स्क्रीन के सामने बिताया समय, नींद की कमी और अनियमित खान-पान मिलकर मानसिक थकान को बढ़ाते हैं। आयुर्वेद की मान्यता है कि जब जीवनशैली संतुलित होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर दिखता है। यह दृष्टिकोण रोगोपचार से अधिक, रोग-निवारण पर केंद्रित है।

पाँच प्रमुख आयुर्वेदिक अभ्यास

शिरोधारा में माथे पर एक निश्चित गति से औषधीय तेल की धार डाली जाती है। यह प्रक्रिया तंत्रिका तंत्र को शांत करने और गहरे विश्राम की अनुभूति देने में सहायक मानी जाती है।

शिरो अभ्यंग यानी औषधीय तेल से सिर की मालिश तनाव और थकान के बीच राहत देने वाली सरल प्रक्रिया है, जिसे घर पर भी अपनाया जा सकता है।

ध्यान — एकाग्रता का नियमित अभ्यास — मन को शांत कर विचारों को व्यवस्थित करने में मदद करता है। प्रतिदिन कुछ मिनट शांत बैठकर ध्यान करने से मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।

प्राणायाम में साँस लेने और छोड़ने की नियंत्रित तकनीकों का अभ्यास किया जाता है। नियमित प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है।

योगासन शरीर को सक्रिय रखते हुए मन को हल्का और स्थिर रखने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में इन्हें दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा माना गया है।

किन बातों का रखें ध्यान

इन अभ्यासों का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इन्हें संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और अनुशासित दिनचर्या के साथ अपनाया जाए। किसी भी औषधीय आयुर्वेदिक प्रक्रिया को अपनाने से पहले किसी प्रशिक्षित आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है।

आगे की राह

आयुष मंत्रालय लगातार पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने के प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन अभ्यासों को स्कूल और कार्यस्थल के स्तर पर प्रोत्साहित किए जाने से मानसिक स्वास्थ्य संकट को दीर्घकालिक रूप से कम किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सोशल मीडिया पर साझा की गई सलाह और चिकित्सकीय परामर्श के बीच की खाई को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। शिरोधारा जैसी प्रक्रियाएँ प्रशिक्षित वैद्य की देखरेख में ही सुरक्षित हैं, जबकि आम जनता इन्हें स्वयं आज़माने की कोशिश कर सकती है। असली ज़रूरत यह है कि मानसिक स्वास्थ्य को आयुर्वेद की रोशनी में देखने की पहल को सरकारी स्वास्थ्य ढाँचे में व्यवस्थित रूप से जोड़ा जाए — केवल जागरूकता पोस्ट से आगे बढ़कर।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य के लिए कौन-से उपाय बताए गए हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार शिरोधारा, शिरो अभ्यंग, ध्यान, प्राणायाम और योगासन — ये पाँच प्रमुख आयुर्वेदिक अभ्यास मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में सहायक माने जाते हैं। इन्हें संतुलित जीवनशैली के साथ अपनाने पर अधिक लाभ मिलता है।
शिरोधारा क्या है और यह कैसे काम करती है?
शिरोधारा एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमें माथे पर एक निश्चित गति से औषधीय तेल की धार डाली जाती है। यह तंत्रिका तंत्र को शांत कर गहरे विश्राम की अनुभूति देती है और तनाव कम करने में सहायक मानी जाती है।
क्या ये आयुर्वेदिक उपाय घर पर किए जा सकते हैं?
ध्यान, प्राणायाम और योगासन जैसे अभ्यास घर पर किए जा सकते हैं। हालाँकि शिरोधारा जैसी औषधीय प्रक्रियाओं के लिए प्रशिक्षित आयुर्वेद विशेषज्ञ की देखरेख आवश्यक है।
मानसिक थकान के लिए प्राणायाम कितना कारगर है?
प्राणायाम में साँस लेने और छोड़ने की नियंत्रित तकनीकों का अभ्यास किया जाता है। नियमित रूप से किए जाने पर यह मानसिक संतुलन बनाए रखने और तनाव घटाने में सहायक माना जाता है, हालाँकि इसके दावों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार परखना ज़रूरी है।
आयुर्वेदिक उपाय अपनाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
इन अभ्यासों को संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ अपनाना अधिक प्रभावी माना जाता है। किसी भी औषधीय प्रक्रिया को शुरू करने से पहले किसी प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लेना अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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