20 अगस्त 2026
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आयुर्वेद से मानसिक शांति: शिरोधारा, ध्यान और प्राणायाम समेत 5 अभ्यास जो तनाव घटाएँ

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आयुर्वेद से मानसिक शांति: शिरोधारा, ध्यान और प्राणायाम समेत 5 अभ्यास जो तनाव घटाएँ

सारांश

भागदौड़ और स्क्रीन टाइम के बीच मानसिक थकान आम होती जा रही है। आयुष मंत्रालय ने शिरोधारा, ध्यान और प्राणायाम समेत 5 आयुर्वेदिक अभ्यास सुझाए हैं — जो मन, शरीर और आत्मा के संतुलन पर आधारित इस प्राचीन पद्धति की आधुनिक प्रासंगिकता को रेखांकित करते हैं।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 20 अगस्त 2026 को एक्स पर 5 आयुर्वेदिक अभ्यास मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनुशंसित किए।
शिरोधारा (माथे पर औषधीय तेल की धार) और शिरो अभ्यंग (सिर की मालिश) तनाव घटाने में सहायक बताए गए।
ध्यान और प्राणायाम मानसिक एकाग्रता और भावनात्मक स्थिरता के लिए उपयोगी माने जाते हैं।
योगासन को प्राणायाम के साथ मिलाकर अपनाने से शरीर और मन दोनों को लाभ मिल सकता है।
किसी भी औषधीय आयुर्वेदिक प्रक्रिया को प्रशिक्षित चिकित्सक की सलाह से ही अपनाना चाहिए।

आयुष मंत्रालय ने 20 अगस्त 2026 को एक्स पर साझा की गई जानकारी में बताया कि आयुर्वेद मानसिक स्वास्थ्य को केवल तनाव या चिंता तक सीमित नहीं मानता, बल्कि इसे मन, शरीर और आत्मा के बीच के संतुलन से जोड़ता है। मंत्रालय के अनुसार, जब जीवनशैली संतुलित होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर दिखाई देता है।

आधुनिक जीवन और मानसिक थकान

काम का बढ़ता दबाव, लगातार स्क्रीन टाइम, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या — ये सभी मिलकर मानसिक थकान को बढ़ावा देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिस्थितियों में पारंपरिक आयुर्वेदिक अभ्यास एक प्रभावी पूरक भूमिका निभा सकते हैं, बशर्ते इन्हें संतुलित जीवनशैली के साथ अपनाया जाए।

आयुष मंत्रालय की 5 अनुशंसित प्रक्रियाएँ

शिरोधारा: इस प्रक्रिया में माथे पर धीरे-धीरे औषधीय तेल की निरंतर धार डाली जाती है। यह गहरी विश्रांति देने वाली विधि मानी जाती है और तंत्रिका तंत्र को शांत करने में सहायक बताई जाती है।

शिरो अभ्यंग: यानी औषधीय तेल से सिर की मालिश। यह अभ्यास तनाव और शारीरिक थकान के बीच राहत देने वाला माना जाता है। नियमित अभ्यास से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।

ध्यान: मन को एकाग्र करने की यह विधि विचारों को व्यवस्थित करने और भावनात्मक स्थिरता बनाए रखने में मददगार हो सकती है। रोज़ाना कुछ मिनट शांत बैठकर ध्यान करने से मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।

प्राणायाम: सांस लेने और छोड़ने की नियंत्रित तकनीकों का यह अभ्यास तंत्रिका तंत्र पर सीधा प्रभाव डालता है। नियमित प्राणायाम से चिंता और मानसिक बेचैनी में कमी आ सकती है।

योगासन: शरीर को सक्रिय रखने के साथ-साथ योगासन मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक हैं। प्राणायाम के साथ मिलकर ये अभ्यास शरीर और मन दोनों को हल्का महसूस कराते हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, इन अभ्यासों का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इन्हें स्वस्थ आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित दिनचर्या के साथ अपनाया जाए। किसी भी औषधीय आयुर्वेदिक प्रक्रिया को शुरू करने से पहले प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक बताया जाता है।

आगे की राह

आयुष मंत्रालय की यह पहल ऐसे समय में आई है जब शहरी भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक जीवनशैली के बीच सेतु बनाने की यह कोशिश व्यापक जन-स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल जागरूकता पोस्ट पर्याप्त है। शहरी भारत में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएँ गहरी हैं और प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सकों की पहुँच सीमित — खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में। शिरोधारा जैसी प्रक्रियाएँ महंगी और विशेषज्ञ-निर्भर हैं, जो इन्हें आम जन के लिए सुलभ नहीं बनातीं। मंत्रालय को जागरूकता से आगे बढ़कर सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में इन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य को कैसे देखा जाता है?
आयुर्वेद मानसिक स्वास्थ्य को मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन के रूप में परिभाषित करता है — न कि केवल तनाव या चिंता की अनुपस्थिति के रूप में। संतुलित जीवनशैली को इस पद्धति में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की नींव माना जाता है।
शिरोधारा क्या है और यह कैसे काम करती है?
शिरोधारा एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमें माथे पर धीरे-धीरे औषधीय तेल की निरंतर धार डाली जाती है। यह तंत्रिका तंत्र को शांत करने और गहरी विश्रांति देने में सहायक मानी जाती है, तथा इसे प्रशिक्षित चिकित्सक की देखरेख में ही करवाना चाहिए।
प्राणायाम और योगासन मानसिक स्वास्थ्य में कैसे मदद करते हैं?
प्राणायाम में सांस की नियंत्रित तकनीकें तंत्रिका तंत्र पर सीधा प्रभाव डालती हैं और चिंता कम कर सकती हैं। योगासन के साथ मिलाकर ये अभ्यास शरीर को सक्रिय और मन को संतुलित रखने में मददगार बताए जाते हैं।
क्या इन आयुर्वेदिक अभ्यासों को घर पर अपनाया जा सकता है?
ध्यान और प्राणायाम जैसे अभ्यास घर पर किए जा सकते हैं, लेकिन शिरोधारा और शिरो अभ्यंग जैसी औषधीय प्रक्रियाओं के लिए प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह और देखरेख आवश्यक है। स्व-उपचार से बचना चाहिए।
आयुष मंत्रालय ने ये सुझाव कब और क्यों जारी किए?
आयुष मंत्रालय ने 20 अगस्त 2026 को एक्स पर यह जानकारी साझा की, जो आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती मानसिक थकान और तनाव के संदर्भ में पारंपरिक आयुर्वेदिक अभ्यासों की प्रासंगिकता को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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