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आयुर्वेद से मिलेगा मानसिक सुकून: शिरोधारा से प्राणायाम तक, आयुष मंत्रालय ने बताए 5 अभ्यास

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आयुर्वेद से मिलेगा मानसिक सुकून: शिरोधारा से प्राणायाम तक, आयुष मंत्रालय ने बताए 5 अभ्यास

सारांश

भागदौड़ और स्क्रीन-केंद्रित जीवन में मानसिक थकान बढ़ रही है। आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद के पाँच अभ्यास — शिरोधारा, शिरो अभ्यंग, ध्यान, प्राणायाम और योगासन — को मन-शरीर संतुलन के लिए कारगर बताया है। विशेषज्ञ की सलाह से इन्हें अपनाना अधिक फायदेमंद माना जाता है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर 5 आयुर्वेदिक अभ्यासों की जानकारी साझा की।
शिरोधारा में माथे पर औषधीय तेल की धार से गहरे विश्राम की अनुभूति होती है।
शिरो अभ्यंग (सिर की औषधीय तेल मालिश) तनाव और थकान में राहत दे सकती है।
ध्यान, प्राणायाम और योगासन मन को शांत और शरीर को सक्रिय रखने में सहायक हैं।
किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को योग्य विशेषज्ञ की सलाह से ही अपनाना चाहिए।

आयुष मंत्रालय ने 20 अगस्त 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई जानकारी में बताया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आयुर्वेद में पाँच प्रमुख अभ्यासों — शिरोधारा, शिरो अभ्यंग, ध्यान, प्राणायाम और योगासन — को विशेष महत्व दिया जाता है। आयुर्वेद की दृष्टि में मानसिक स्वास्थ्य केवल तनाव या चिंता का अभाव नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच का गहरा संतुलन है।

आधुनिक जीवनशैली और मानसिक थकान

काम का बढ़ता दबाव, घंटों स्क्रीन के सामने बिताया जाने वाला समय, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या — ये सब मिलकर मानसिक थकान को गहरा करते हैं। आयुर्वेद का मानना है कि जब जीवनशैली संतुलित होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर दिखाई देता है। यह ऐसे समय में प्रासंगिक है जब मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रही है।

पाँच आयुर्वेदिक अभ्यास और उनके लाभ

शिरोधारा में माथे पर धीरे-धीरे औषधीय तेल की निरंतर धार डाली जाती है। यह प्रक्रिया तंत्रिका तंत्र को शांत करने और गहरे विश्राम की अनुभूति देने में सहायक मानी जाती है।

शिरो अभ्यंग यानी औषधीय तेल से सिर की मालिश तनाव और थकान के बीच राहत देने वाला सरल उपाय है, जिसे घर पर भी अपनाया जा सकता है।

ध्यान (मेडिटेशन) मन को एकाग्र करने और विचारों की अव्यवस्था को कम करने में मदद करता है। रोज़ाना कुछ मिनट शांत बैठकर किया गया ध्यान मानसिक स्पष्टता बढ़ा सकता है।

प्राणायाम में साँस लेने और छोड़ने की नियंत्रित तकनीकों का अभ्यास किया जाता है, जो शरीर में ऑक्सीजन प्रवाह को बेहतर बनाने के साथ-साथ मन को शांत रखने में भी सहायक हो सकती हैं।

योगासन शरीर को सक्रिय रखते हैं और नियमित अभ्यास से मानसिक रूप से हल्कापन और संतुलन महसूस होता है।

विशेषज्ञ की सलाह क्यों ज़रूरी है

आयुष मंत्रालय के अनुसार, इन अभ्यासों को स्वस्थ आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित दिनचर्या के साथ अपनाने पर इनका प्रभाव अधिक होता है। गौरतलब है कि किसी भी आयुर्वेदिक उपचार या औषधीय प्रक्रिया को किसी योग्य आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं अपनाना चाहिए।

आगे की राह

आयुष मंत्रालय लगातार पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा में लाने के प्रयास कर रहा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इन अभ्यासों को दैनिक जीवन में शामिल करने से दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य में सुधार संभव है — बशर्ते इन्हें नियमितता और सही मार्गदर्शन के साथ अपनाया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सरकारी स्वास्थ्य बजट में मानसिक स्वास्थ्य की हिस्सेदारी अभी भी बेहद सीमित है। पारंपरिक अभ्यासों को बढ़ावा देना स्वागतयोग्य है, पर यह सवाल भी उठता है कि क्या ये उपाय गंभीर मानसिक विकारों के लिए पर्याप्त हैं या केवल सामान्य तनाव प्रबंधन तक सीमित हैं। आधुनिक मनोचिकित्सा और आयुर्वेद के एकीकृत दृष्टिकोण की ज़रूरत पर विशेषज्ञ लंबे समय से ज़ोर देते आए हैं। सोशल मीडिया पोस्ट से परे, ज़मीनी स्तर पर इन सेवाओं की पहुँच और उपलब्धता सुनिश्चित करना असली चुनौती है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य के लिए कौन-से 5 अभ्यास बताए गए हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, शिरोधारा, शिरो अभ्यंग, ध्यान, प्राणायाम और योगासन — ये पाँच अभ्यास मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं। इन्हें संतुलित दिनचर्या और स्वस्थ आहार के साथ अपनाने पर अधिक लाभ मिलता है।
शिरोधारा क्या है और इसके क्या फायदे हैं?
शिरोधारा एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमें माथे पर धीरे-धीरे औषधीय तेल की निरंतर धार डाली जाती है। यह तंत्रिका तंत्र को शांत करने और गहरे विश्राम की अनुभूति देने में सहायक मानी जाती है।
क्या इन आयुर्वेदिक अभ्यासों को घर पर किया जा सकता है?
ध्यान, प्राणायाम और योगासन जैसे अभ्यास घर पर नियमित रूप से किए जा सकते हैं। हालाँकि, शिरोधारा और शिरो अभ्यंग जैसी औषधीय प्रक्रियाओं को किसी योग्य आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की देखरेख में ही अपनाना उचित है।
आयुर्वेद मानसिक स्वास्थ्य को कैसे देखता है?
आयुर्वेद मानसिक स्वास्थ्य को केवल तनाव या चिंता की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच के संतुलन के रूप में परिभाषित करता है। जब जीवनशैली संतुलित होती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर दिखाई देता है।
आयुर्वेदिक उपाय अपनाने से पहले क्या सावधानी रखें?
किसी भी आयुर्वेदिक उपचार या औषधीय प्रक्रिया को अपनाने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है। ये अभ्यास स्वस्थ आहार, पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि के पूरक हैं, न कि चिकित्सीय उपचार का विकल्प।
राष्ट्र प्रेस
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