14 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शवासन: रोज़ 10 मिनट का यह योगाभ्यास तनाव, अनिद्रा और थकान से दिला सकता है राहत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शवासन: रोज़ 10 मिनट का यह योगाभ्यास तनाव, अनिद्रा और थकान से दिला सकता है राहत

सारांश

देखने में सबसे सरल, लेकिन असल में सबसे प्रभावशाली — शवासन वह आसन है जिसे आयुष मंत्रालय ने तनाव, अनिद्रा और रक्तचाप के लिए अनुशंसित किया है। रोज़ सिर्फ 10 मिनट का यह सचेतन विश्राम शरीर और मन दोनों को नई ऊर्जा दे सकता है।

मुख्य बातें

शवासन योग का सचेतन विश्राम आसन है जिसमें शरीर को पूरी तरह शिथिल छोड़ा जाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन तनाव, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और मांसपेशियों के खिंचाव को कम करने में सहायक है।
रोज़ाना 10 मिनट के अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
देखने में सरल लेकिन सचेतन रहते हुए पूरी तरह शिथिल होना इसे सबसे कठिन आसनों में से एक बनाता है।
गर्भवती महिलाएँ और कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही इसे करें।

शवासन — योग का वह आसन जो देखने में सबसे सरल लगता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार सबसे प्रभावशाली विश्राम-तकनीकों में गिना जाता है — आज की भागदौड़ भरी दिनचर्या में तनाव, अनिद्रा और मानसिक थकान से जूझ रहे लोगों के लिए एक कारगर उपाय के रूप में उभर रहा है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन के शारीरिक एवं मानसिक लाभों को रेखांकित किया है।

शवासन क्या है और यह कठिन क्यों है

'शव' अर्थात मृत शरीर के समान — पूरी तरह स्थिर और शिथिल — लेटने की इस मुद्रा में शरीर के हर अंग को ढीला छोड़ा जाता है और मन को सचेतन रूप से शांत किया जाता है। सचेतन विश्राम (Conscious Relaxation) इस आसन का मूल उद्देश्य है, न कि केवल लेट जाना।

यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे योग के सबसे कठिन आसनों में से एक मानते हैं — क्योंकि शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ते हुए मन को एकाग्र और जाग्रत रखना सहज नहीं होता। नींद आ जाना इस आसन की सबसे बड़ी बाधा मानी जाती है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार शवासन के प्रमुख लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित शवासन से निम्नलिखित स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं:

यह आसन तनाव और चिंता को कम करने में सहायक है। नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और अनिद्रा की समस्या दूर होती है। रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित कर हृदय-स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है।

इसके अतिरिक्त, शवासन मस्तिष्क को शांत कर एकाग्रता बढ़ाता है। मांसपेशियों का तनाव घटता है और शरीर की कोशिकाओं एवं तंत्रिका तंत्र को गहरी विश्रांति मिलती है। नियमित अभ्यास से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।

आम जनता पर असर: किन लोगों को सबसे अधिक लाभ

काम के अत्यधिक दबाव, घंटों मोबाइल और लैपटॉप के उपयोग और अनियमित दिनचर्या के कारण शरीर और मन दोनों थकान का शिकार होते हैं। शवासन इस डिजिटल थकान को कम करने का एक बिना-लागत का, सुलभ तरीका है जिसे घर पर भी किया जा सकता है।

यह आसन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है बल्कि मानसिक संतुलन और आंतरिक शांति भी प्रदान करता है — दोनों ही आज के समय की सबसे ज़रूरी ज़रूरतें हैं।

सावधानियाँ और विशेषज्ञ सलाह

विशेषज्ञ कुछ सावधानियाँ बरतने की सलाह देते हैं। शवासन के दौरान नींद में न जाएँ — क्योंकि इसका उद्देश्य सचेतन विश्राम है, न कि नींद।

गर्भवती महिलाएँ और कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति इस आसन को करने से पहले किसी योग-विशेषज्ञ या चिकित्सक की राय ज़रूर लें। सामान्य स्वस्थ व्यक्तियों के लिए प्रतिदिन 10 मिनट का शवासन पर्याप्त माना जाता है।

क्या होगा आगे

आयुष मंत्रालय की बढ़ती सक्रियता और योग के वैश्विक प्रसार के बीच, शवासन जैसे सरल किंतु वैज्ञानिक रूप से समर्थित अभ्यासों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सलाह में और अधिक स्थान मिलने की संभावना है। मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के इस दौर में, यह आसन एक सुलभ और प्रभावी पहला कदम हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि गंभीर अनिद्रा या चिकित्सकीय चिंता विकार के मामलों में योग एकमात्र समाधान नहीं है। मुख्यधारा की मीडिया अक्सर ऐसी सलाह को सार्वभौमिक उपचार के रूप में पेश करती है, जबकि विशेषज्ञ इसे पूरक अभ्यास मानते हैं। मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर सरकारी संचार को स्पष्ट रूप से यह बताना चाहिए कि कब योग काफी है और कब पेशेवर चिकित्सा सहायता ज़रूरी है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शवासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
शवासन एक योग विश्राम-मुद्रा है जिसमें पीठ के बल सीधे लेटकर शरीर के हर अंग को पूरी तरह शिथिल छोड़ा जाता है और मन को सचेतन रूप से शांत रखा जाता है। 'शव' यानी मृत शरीर के समान स्थिर रहते हुए गहरी और धीमी साँस लेना इस आसन की मूल विधि है।
शवासन तनाव और अनिद्रा में कैसे मदद करता है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, शवासन तंत्रिका तंत्र को गहरी विश्रांति देता है, जिससे तनाव हार्मोन का स्तर घटता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। नियमित अभ्यास से अनिद्रा की समस्या में उल्लेखनीय सुधार देखा जाता है।
शवासन को सबसे कठिन आसन क्यों माना जाता है?
देखने में यह आसान लगता है, लेकिन शरीर को पूरी तरह शिथिल रखते हुए मन को जाग्रत और एकाग्र बनाए रखना बेहद कठिन होता है। इस दौरान नींद आ जाना सबसे बड़ी बाधा है, क्योंकि इसका उद्देश्य सचेतन विश्राम है, न कि सोना।
शवासन कितने समय तक करना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य स्वस्थ व्यक्तियों के लिए प्रतिदिन 10 मिनट का शवासन पर्याप्त माना जाता है। इसे अन्य योगाभ्यास के अंत में करना सबसे अधिक लाभकारी होता है।
शवासन करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शवासन के दौरान नींद न आने दें — यह सचेतन विश्राम की मुद्रा है। गर्भवती महिलाएँ और कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति इस आसन को करने से पहले किसी योग-विशेषज्ञ या चिकित्सक की राय लें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले