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शवासन: रोज़ 10 मिनट का यह योगासन तनाव, अनिद्रा और थकान से दिलाएगा गहरी राहत

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शवासन: रोज़ 10 मिनट का यह योगासन तनाव, अनिद्रा और थकान से दिलाएगा गहरी राहत

सारांश

भागदौड़ भरी ज़िंदगी में तनाव और अनिद्रा से थके लोगों के लिए शवासन एक सरल लेकिन गहरा समाधान है। आयुष मंत्रालय ने इसके फायदों की पुष्टि की है — रोज़ मात्र 10 मिनट का यह अभ्यास ब्लड प्रेशर, एकाग्रता और नींद की गुणवत्ता में सुधार ला सकता है।

मुख्य बातें

शवासन योग का एक सचेतन विश्राम आसन है, जिसमें शरीर को पूरी तरह शिथिल छोड़ा जाता है।
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने इसके लाभों की आधिकारिक पुष्टि की है।
रोज़ 10 मिनट के अभ्यास से तनाव, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और माँसपेशियों के खिंचाव में राहत मिलती है।
यह देखने में सरल लेकिन अभ्यास में कठिन आसन है — नींद में जाने से बचना ज़रूरी है।
गर्भवती महिलाओं और कमर दर्द के रोगियों को विशेषज्ञ परामर्श के बाद ही इसे करना चाहिए।

शवासन — योग का वह सरल किंतु गहन आसन — आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में तनाव, अनिद्रा और मानसिक थकान से जूझ रहे लोगों के लिए एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरा है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, मात्र 10 मिनट के नियमित अभ्यास से यह आसन शरीर और मन दोनों को गहरी विश्रांति प्रदान करता है। काम का बोझ और घंटों तक मोबाइल व लैपटॉप के सामने बिताया समय शरीर की ऊर्जा को क्षीण कर देता है — और ऐसे में शवासन एक वैज्ञानिक रूप से स्वीकृत उपाय बनकर सामने आता है।

शवासन क्या है और यह कैसे काम करता है

शवासन शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है — 'शव' अर्थात् मृत शरीर और 'आसन' अर्थात् मुद्रा। इस आसन में व्यक्ति पीठ के बल लेटकर शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ देता है — ठीक वैसे जैसे कोई चेतना से परे हो। यह एक सचेतन विश्राम की अवस्था है, जिसमें शरीर की प्रत्येक माँसपेशी शिथिल होती है और मन विचारों से मुक्त होता है।

देखने में यह आसन अत्यंत सरल लगता है, किंतु योग विशेषज्ञ इसे सबसे कठिन आसनों में से एक मानते हैं। कारण यह है कि शरीर को पूर्णतः शिथिल करते हुए मन को जागृत और शांत बनाए रखना साधारण व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। अधिकांश लोग इस अवस्था में नींद में चले जाते हैं, जो इस आसन का उद्देश्य नहीं है।

आयुष मंत्रालय द्वारा प्रमाणित लाभ

आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने शवासन के निम्नलिखित स्वास्थ्य लाभों को रेखांकित किया है:

तनाव और चिंता में कमी: यह आसन तंत्रिका तंत्र को शांत करता है, जिससे कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम होता है। नींद की गुणवत्ता में सुधार: नियमित अभ्यास से अनिद्रा की समस्या में उल्लेखनीय राहत मिलती है। रक्तचाप नियंत्रण: शवासन रक्तचाप को संतुलित रखकर हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। एकाग्रता में वृद्धि: मस्तिष्क को गहरी विश्रांति मिलने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बेहतर होती है। माँसपेशियों का तनाव कम होना: शरीर की प्रत्येक माँसपेशी शिथिल होकर नई ऊर्जा ग्रहण करती है।

सही विधि और सावधानियाँ

शवासन करने के लिए एक स्वच्छ और समतल सतह पर पीठ के बल लेट जाएँ। दोनों पैरों के बीच थोड़ा अंतर रखें और हाथों को शरीर से हल्का दूर रखें, हथेलियाँ आकाश की ओर। आँखें बंद करें और शरीर के प्रत्येक अंग को धीरे-धीरे ढीला छोड़ें। 10 से 15 मिनट तक इस अवस्था में बने रहें।

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ भी बरतनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं तथा कमर दर्द से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। इसके अतिरिक्त, अभ्यास के दौरान नींद में जाने से बचना चाहिए — यह आसन नींद का विकल्प नहीं, बल्कि सचेतन विश्राम का माध्यम है।

आम जीवन में शवासन की प्रासंगिकता

यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब शहरी भारत में मानसिक स्वास्थ्य संकट तेज़ी से बढ़ रहा है। कार्यस्थल का दबाव, डिजिटल स्क्रीन पर अत्यधिक निर्भरता और अनियमित दिनचर्या ने नींद की समस्याओं को एक सामान्य शिकायत बना दिया है। गौरतलब है कि शवासन जैसे आसन न केवल निःशुल्क हैं, बल्कि इनके लिए किसी उपकरण या विशेष स्थान की आवश्यकता भी नहीं होती।

आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देश और योग विशेषज्ञों की सलाह मिलकर यह स्पष्ट करती है कि शवासन केवल आराम का तरीका नहीं — यह शरीर की कोशिकाओं और तंत्रिका तंत्र को गहरी विश्रांति देने वाला एक समग्र स्वास्थ्य अभ्यास है। नियमित अभ्यास से इसके दीर्घकालिक शारीरिक और मानसिक लाभ स्वतः प्रकट होने लगते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आयुष मंत्रालय की आधिकारिक पुष्टि इसे एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य संदेश बनाती है — खासकर ऐसे समय में जब शहरी भारत में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। विडंबना यह है कि जो आसन सबसे सस्ता और सुलभ है, उसे अक्सर 'कुछ नहीं करने' की तरह देखा जाता है और इसलिए नज़रअंदाज़ किया जाता है। मुख्यधारा की स्वास्थ्य कवरेज दवाओं और तकनीकी समाधानों पर ज़्यादा ध्यान देती है, जबकि निःशुल्क, प्रमाणित और बिना दुष्प्रभाव वाले योग अभ्यास पार्श्व में रह जाते हैं। यदि सरकार वाकई मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना चाहती है, तो ऐसे साक्ष्य-आधारित अभ्यासों को स्कूल और कार्यस्थल नीतियों में शामिल करना एक तार्किक अगला कदम होगा।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शवासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
शवासन एक योग विश्राम मुद्रा है जिसमें पीठ के बल लेटकर शरीर को पूरी तरह शिथिल छोड़ दिया जाता है और मन को शांत रखा जाता है। हाथ शरीर से थोड़े दूर, हथेलियाँ ऊपर की ओर, आँखें बंद — इस अवस्था में 10 से 15 मिनट रहना इस आसन की मूल विधि है।
शवासन से तनाव और अनिद्रा में कैसे फायदा होता है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, शवासन तंत्रिका तंत्र को शांत करता है, जिससे तनाव हार्मोन का स्तर घटता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। नियमित अभ्यास से अनिद्रा की समस्या में उल्लेखनीय राहत मिल सकती है।
शवासन करते समय क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
अभ्यास के दौरान नींद में नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इसका उद्देश्य सचेतन विश्राम है, नींद नहीं। गर्भवती महिलाओं और कमर दर्द से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
शवासन को सबसे कठिन आसन क्यों माना जाता है?
देखने में सरल लगने के बावजूद, शवासन में शरीर को पूरी तरह शिथिल रखते हुए मन को जागृत और विचारमुक्त बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। अधिकांश लोग इस अवस्था में नींद में चले जाते हैं, जो इसे सचेतन रूप से करना और कठिन बना देता है।
शवासन के स्वास्थ्य लाभ क्या-क्या हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार शवासन के प्रमुख लाभों में तनाव और चिंता में कमी, नींद की गुणवत्ता में सुधार, रक्तचाप नियंत्रण, एकाग्रता में वृद्धि और माँसपेशियों के तनाव में राहत शामिल हैं। इसके नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का संचार भी बेहतर होता है।
राष्ट्र प्रेस
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