20 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आयुष्मान भारत योजना से जालना में थैलेसीमिया पीड़ित दो भाई-बहनों को मिला मुफ्त इलाज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आयुष्मान भारत योजना से जालना में थैलेसीमिया पीड़ित दो भाई-बहनों को मिला मुफ्त इलाज

सारांश

जालना के एक परिवार के दो बच्चे थैलेसीमिया से जूझ रहे हैं और हर 21 दिन पर रक्ताधान की जरूरत है। आयुष्मान भारत योजना ने इस परिवार की जमा-पूँजी को खत्म होने से बचाया — यह कहानी उस योजना की ज़मीनी सच्चाई है जो करोड़ों गरीब परिवारों के लिए बनाई गई थी।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के जालना में संदीप साबले के दो बच्चे — संबोधि और संघप्रिया — थैलेसीमिया से पीड़ित हैं।
दोनों बच्चों का इलाज आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत संजीवनी अस्पताल में निःशुल्क हो रहा है।
दोनों बच्चों को लगभग हर 21 दिन पर रक्ताधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की आवश्यकता होती है।
बेटे संबोधि में लगभग एक वर्ष की उम्र में और बेटी संघप्रिया में लगभग चार वर्ष बाद थैलेसीमिया का पता चला।
अस्पताल के चिकित्सकों की जानकारी से परिवार को योजना का लाभ मिला; साबले ने अन्य पात्र परिवारों से भी इस योजना का फायदा उठाने की अपील की।

महाराष्ट्र के जालना जिले में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) एक गरीब परिवार के लिए संजीवनी बनकर सामने आई है। नूतन वसाहत इलाके के निवासी संदीप साबले के दो बच्चे — बेटा संबोधि और बेटी संघप्रिया — थैलेसीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित हैं, और दोनों का इलाज अब संजीवनी अस्पताल में इस केंद्रीय स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत निःशुल्क हो रहा है।

बीमारी का पता और परिवार पर आर्थिक संकट

साबले परिवार की मुश्किलें तब शुरू हुईं जब बेटे संबोधि को लगभग एक वर्ष की आयु में स्वास्थ्य समस्याएँ होने लगीं। जाँच के बाद डॉक्टरों ने थैलेसीमिया की पुष्टि की — एक ऐसी आनुवंशिक रक्त विकार, जिसमें शरीर पर्याप्त स्वस्थ हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता और नियमित रक्ताधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की जरूरत पड़ती है।

शुरुआती दौर में परिवार ने अपनी जमा-पूँजी से इलाज का खर्च उठाया, परंतु बार-बार की चिकित्सा लागत धीरे-धीरे उनकी आर्थिक सामर्थ्य से बाहर होती चली गई।

आयुष्मान भारत योजना ने दिखाई राह

इसी दौरान संजीवनी अस्पताल के चिकित्सकों ने साबले परिवार को आयुष्मान भारत योजना के प्रावधानों से अवगत कराया। इसके बाद संबोधि का उपचार इस योजना के दायरे में आ गया और परिवार पर पड़ने वाला वित्तीय भार काफी हद तक कम हुआ।

परिस्थितियाँ तब और जटिल हो गईं जब लगभग चार वर्ष बाद उनकी बेटी संघप्रिया को भी थैलेसीमिया होने का पता चला। दूसरे बच्चे में भी यही बीमारी सामने आने के बाद परिवार के समक्ष दोनों बच्चों की एक साथ नियमित चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने की गंभीर चुनौती उत्पन्न हुई। तत्पश्चात संघप्रिया का इलाज भी इस योजना के अंतर्गत आरंभ हो गया।

हर 21 दिन पर रक्ताधान की जरूरत

परिवार के अनुसार, दोनों बच्चों को लगभग हर 21 दिन पर रक्ताधान कराना पड़ता है, जिससे उन्हें निरंतर चिकित्सा निगरानी की आवश्यकता रहती है। यह स्थिति किसी भी सामान्य परिवार के लिए आर्थिक रूप से अत्यंत कठिन होती है, विशेषकर जब दोनों बच्चों का इलाज एक साथ चल रहा हो।

गौरतलब है कि थैलेसीमिया के ऐसे मामलों में आजीवन उपचार की जरूरत होती है और बोन मैरो ट्रांसप्लांट को छोड़कर फिलहाल नियमित रक्ताधान ही मुख्य प्रबंधन विकल्प है, जिसकी लागत कम आय वाले परिवारों पर भारी पड़ती है।

परिवार ने जताया आभार, दूसरों से की अपील

संदीप साबले ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मिली सहायता से परिवार का आर्थिक बोझ उल्लेखनीय रूप से घटा है और इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि दोनों बच्चों को समय पर आवश्यक उपचार मिलता रहे।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके परिवार को विकट परिस्थिति में संबल दिया। साबले ने आर्थिक तंगी का सामना कर रहे अन्य पात्र परिवारों से भी अपील की कि वे इस योजना की जानकारी लें और इसका लाभ उठाएँ।

जालना का यह मामला इस बात की मिसाल है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाएँ ज़मीनी स्तर पर कैसे जीवन बदल सकती हैं — बशर्ते पात्र परिवारों तक जानकारी और पंजीकरण की सुविधा समय पर पहुँचे।

संपादकीय दृष्टिकोण

सिर्फ इसलिए कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली। साबले परिवार को अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया — यह संयोग था, नीतिगत पहुँच नहीं। थैलेसीमिया जैसी आजीवन चलने वाली बीमारियों में योजना की कवरेज और नामांकन की सक्रिय जिम्मेदारी सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की होनी चाहिए, न कि परिवार की।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष्मान भारत योजना के तहत थैलेसीमिया का इलाज मुफ्त होता है?
हाँ, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत थैलेसीमिया सहित कई गंभीर बीमारियों का निःशुल्क इलाज पात्र परिवारों को मिलता है। जालना के संदीप साबले के दोनों बच्चों का उपचार इसी योजना के अंतर्गत संजीवनी अस्पताल में हो रहा है।
थैलेसीमिया क्या है और इसमें किस इलाज की जरूरत होती है?
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है जिसमें शरीर पर्याप्त स्वस्थ हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इसके अधिकांश मरीजों को नियमित रक्ताधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की जरूरत होती है — जालना के इन दोनों बच्चों को लगभग हर 21 दिन पर यह प्रक्रिया करानी पड़ती है।
आयुष्मान भारत योजना का लाभ कैसे उठाएँ?
पात्र परिवार नजदीकी सरकारी या सूचीबद्ध निजी अस्पताल में जाकर अपना आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं। योजना की जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क किया जा सकता है। जालना के साबले परिवार को यह जानकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने दी थी।
इस परिवार में दोनों बच्चों को थैलेसीमिया कब और कैसे पता चला?
बेटे संबोधि में लगभग एक वर्ष की उम्र में स्वास्थ्य समस्याएँ सामने आईं और जाँच में थैलेसीमिया की पुष्टि हुई। लगभग चार वर्ष बाद बेटी संघप्रिया को भी यही बीमारी होने का पता चला, जिससे परिवार के सामने दोनों बच्चों की एक साथ देखभाल की चुनौती खड़ी हो गई।
क्या आयुष्मान भारत योजना में पुरानी (क्रोनिक) बीमारियाँ भी कवर होती हैं?
आयुष्मान भारत योजना में थैलेसीमिया जैसी पुरानी और दीर्घकालिक बीमारियाँ भी शामिल हैं। जालना का यह मामला इस बात का उदाहरण है कि योजना के तहत नियमित रक्ताधान जैसी महँगी प्रक्रियाओं का खर्च पात्र परिवारों के लिए वहनीय हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 7 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले