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बार-बार चक्कर आना: वर्टिगो, डिहाइड्रेशन और एनीमिया समेत 6 गंभीर कारण जो आप अनदेखा कर रहे हैं

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बार-बार चक्कर आना: वर्टिगो, डिहाइड्रेशन और एनीमिया समेत 6 गंभीर कारण जो आप अनदेखा कर रहे हैं

सारांश

हर चक्कर थकान की निशानी नहीं होता। वर्टिगो, ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन, डिहाइड्रेशन, लो ब्लड शुगर, एनीमिया और माइग्रेन — ये छह कारण बताते हैं कि सिर घूमना कब गंभीर हो सकता है और कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है।

मुख्य बातें

वर्टिगो में आसपास की चीज़ें घूमती महसूस होती हैं; साथ में जी मिचलाना और संतुलन बिगड़ना भी हो सकता है।
ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन में अचानक खड़े होने पर ब्लड प्रेशर गिरने से दिमाग तक रक्त प्रवाह कम हो जाता है।
डिहाइड्रेशन — पसीना, उल्टी-दस्त या पर्याप्त तरल न लेने से — चक्कर का एक प्रमुख कारण है।
डायबिटीज़ के मरीज़ों में लो ब्लड शुगर होने पर चक्कर के साथ कंपकंपी और घबराहट हो सकती है।
एनीमिया में ऑक्सीजन की कमी से थकान, कमज़ोरी और चक्कर आते हैं; खून की जाँच ज़रूरी है।
चक्कर के साथ बोलने में दिक्कत, डबल विज़न या बेहोशी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

अचानक उठते ही सिर हल्का लगना, चलते वक्त कदम लड़खड़ाना, या कुछ पलों के लिए कमरा घूमता हुआ महसूस होना — चक्कर आना एक ऐसी समस्या है जिसे अक्सर लोग थकान या कमज़ोरी समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हर बार चक्कर का कारण साधारण नहीं होता — इसके पीछे ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन, वर्टिगो, डिहाइड्रेशन, लो ब्लड शुगर, एनीमिया और माइग्रेन जैसी चिकित्सीय स्थितियाँ भी हो सकती हैं। इनकी सही पहचान और समय पर इलाज ज़रूरी है।

वर्टिगो: चक्कर का सबसे आम रूप

चक्कर के दो प्रमुख अनुभव होते हैं — एक जिसमें व्यक्ति को लगता है कि वह बेहोश होने वाला है या शरीर हल्का पड़ रहा है, और दूसरा जिसमें आसपास की चीज़ें घूमती हुई महसूस होती हैं। दूसरी स्थिति को वर्टिगो कहा जाता है। इसके साथ जी मिचलाना, उल्टी, चलने में परेशानी और संतुलन बिगड़ना जैसे लक्षण भी देखे जाते हैं।

वर्टिगो अक्सर कान के भीतरी हिस्से की समस्या से जुड़ा होता है और इसे नज़रअंदाज़ करना रोज़मर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए बार-बार ऐसी स्थिति बनने पर विशेषज्ञ से परामर्श ज़रूरी है।

ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन: उठते ही आँखों के आगे अंधेरा

अगर लंबे समय तक बैठे या लेटे रहने के बाद अचानक खड़े होने पर आँखों के आगे अंधेरा छाने लगे, कमज़ोरी हो या सिर घूमे, तो इसका संबंध ब्लड प्रेशर में अचानक गिरावट से हो सकता है। इसे ऑर्थोस्टैटिक या पोस्चुरल हाइपोटेंशन कहा जाता है।

शरीर की स्थिति बदलने पर कुछ समय के लिए ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, जिससे दिमाग तक रक्त का प्रवाह कुछ पल के लिए घट जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जाँच कराना आवश्यक है।

डिहाइड्रेशन और लो ब्लड शुगर: अनदेखे कारण

गर्मी में अत्यधिक पसीना, उल्टी-दस्त, बुखार या पर्याप्त तरल न लेने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। डिहाइड्रेशन में थकान, मुँह सूखना, पेशाब कम होना या उसका रंग गहरा होना और चक्कर जैसे लक्षण उभर सकते हैं। यदि स्थिति अधिक बिगड़े तो यह गंभीर रूप ले सकती है।

वहीं, विशेष रूप से डायबिटीज़ की दवा या इंसुलिन लेने वाले व्यक्तियों में ब्लड शुगर बहुत कम होने पर भी चक्कर आते हैं। इसके साथ कंपकंपी, पसीना, भूख, कमज़ोरी, घबराहट या सोचने-समझने में परेशानी जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं। लंबे समय तक कुछ न खाने या ज़रूरत से कम कार्बोहाइड्रेट लेने पर भी कुछ परिस्थितियों में शुगर गिर सकती है।

एनीमिया और माइग्रेन: चक्कर के अन्य कारण

एनीमिया में शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुँचाने की क्षमता प्रभावित होती है, जिसके कारण थकान, कमज़ोरी, सिरदर्द और चक्कर जैसे लक्षण सामने आते हैं। यदि चक्कर के साथ लगातार कमज़ोरी या अत्यधिक थकान हो, तो खून की जाँच कराना ज़रूरी है।

इसके अतिरिक्त, माइग्रेन भी कुछ लोगों में चक्कर या वर्टिगो से जुड़ा हो सकता है। माइग्रेन से जुड़े चक्कर अक्सर सिरदर्द के साथ या उससे पहले आते हैं और इनका उपचार माइग्रेन प्रबंधन के ज़रिए ही होता है।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि चक्कर के साथ बोलने में दिक्कत, अचानक नज़र में बदलाव, डबल विज़न, चेहरे या हाथ-पैर में कमज़ोरी या सुन्नपन, चलने में अत्यधिक परेशानी, बेहोशी या अचानक तेज़ सिरदर्द हो, तो इसे मामूली चक्कर मानकर नज़रअंदाज़ बिल्कुल नहीं करना चाहिए। ये लक्षण किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति के संकेत हो सकते हैं।

चक्कर की बारंबारता, अवधि और उसके साथ आने वाले अन्य लक्षणों पर ध्यान देकर समय पर चिकित्सीय सहायता लेना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी इसे अधिकतर लोग 'कमज़ोरी' कहकर टाल देते हैं — यही सबसे बड़ी चूक है। वर्टिगो जैसी स्थिति कान के भीतरी हिस्से की गड़बड़ी से जुड़ी हो सकती है, जबकि ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन हृदय-संबंधी जाँच की माँग करता है। एनीमिया और लो ब्लड शुगर ऐसी स्थितियाँ हैं जो समय पर पकड़ में आएँ तो पूरी तरह प्रबंधनीय हैं, लेकिन अनदेखी पर गंभीर रूप ले सकती हैं। स्वास्थ्य साक्षरता की कमी और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच की सीमाएँ मिलकर इस 'मामूली लक्षण' को बड़ी बीमारी में बदलने का रास्ता खोलती हैं।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बार-बार चक्कर आने के मुख्य कारण क्या हैं?
बार-बार चक्कर आने के पीछे वर्टिगो, ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन, डिहाइड्रेशन, लो ब्लड शुगर, एनीमिया और माइग्रेन जैसी चिकित्सीय स्थितियाँ हो सकती हैं। हर बार इसे थकान या कमज़ोरी मान लेना उचित नहीं है; लक्षणों की पहचान कर डॉक्टर से जाँच कराना ज़रूरी है।
वर्टिगो क्या होता है और यह सामान्य चक्कर से कैसे अलग है?
वर्टिगो में व्यक्ति को आसपास की चीज़ें घूमती हुई महसूस होती हैं, जबकि सामान्य चक्कर में शरीर हल्का लगता है या बेहोशी जैसा अहसास होता है। वर्टिगो के साथ जी मिचलाना, उल्टी और संतुलन बिगड़ना भी हो सकता है, और यह अक्सर कान के भीतरी हिस्से की समस्या से जुड़ा होता है।
उठते ही आँखों के आगे अंधेरा क्यों आता है?
लंबे समय तक बैठे या लेटे रहने के बाद अचानक खड़े होने पर ब्लड प्रेशर में अचानक गिरावट आ सकती है, जिसे ऑर्थोस्टैटिक या पोस्चुरल हाइपोटेंशन कहते हैं। इस स्थिति में दिमाग तक रक्त का प्रवाह कुछ पलों के लिए कम हो जाता है, जिससे आँखों के आगे अंधेरा, कमज़ोरी या सिर घूमने जैसा महसूस होता है।
डायबिटीज़ के मरीज़ों में चक्कर आने का क्या कारण होता है?
डायबिटीज़ की दवा या इंसुलिन लेने वाले मरीज़ों में ब्लड शुगर बहुत कम होने पर चक्कर आ सकते हैं। इसके साथ कंपकंपी, पसीना, भूख, घबराहट और सोचने-समझने में परेशानी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं; ऐसे में खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
चक्कर आने पर तुरंत डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
यदि चक्कर के साथ बोलने में दिक्कत, अचानक नज़र में बदलाव, डबल विज़न, चेहरे या हाथ-पैर में कमज़ोरी या सुन्नपन, बेहोशी या अचानक तेज़ सिरदर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। ये लक्षण किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति के संकेत हो सकते हैं और इन्हें मामूली चक्कर मानकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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