क्या भारत में सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ रहा है? हर आठ मिनट में एक मौत: डॉ. मीरा पाठक

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क्या भारत में सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ रहा है? हर आठ मिनट में एक मौत: डॉ. मीरा पाठक

सारांश

क्या आप जानते हैं कि हर आठ मिनट में एक महिला सर्वाइकल कैंसर के कारण अपनी जान गंवा रही है? भारत में इस गंभीर बीमारी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। डॉ. मीरा पाठक ने इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपायों पर रोशनी डाली है। महिलाओं के लिए यह जानकारी जानना बेहद जरूरी है।

Key Takeaways

  • सर्वाइकल कैंसर
  • हर आठ मिनट में एक महिला की मौत।
  • एचपीवी वायरस मुख्य कारण है।
  • स्क्रीनिंग और वैक्सीनेशन से बचाव संभव है।
  • सामान्य लक्षणों की पहचान महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, १७ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में सर्वाइकल कैंसर का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है और यह अब केवल बड़ी उम्र की महिलाओं की बीमारी नहीं रह गई है। भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर और गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, हर आठ मिनट में एक महिला की मौत केवल इस कैंसर के कारण होती है। यह आंकड़ा अत्यंत चिंताजनक है और इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में डॉ. पाठक ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण एचपीवी वायरस (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) है, विशेषकर इसके हाई-रिस्क स्ट्रेन्स जैसे टाइप १६ और १८। यह वायरस सेक्स के माध्यम से फैलता है और इसके लगभग २०० प्रकार होते हैं। इनमें से कुछ ही कैंसर का कारण बनते हैं। डॉ. पाठक ने बताया कि लगभग ९५ प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के मामले लंबे समय तक एचपीवी संक्रमण के कारण होते हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ महिलाओं में इसकी संभावना अधिक होती है। उदाहरण के लिए, जिन महिलाओं में सेक्सुअल एक्टिविटी जल्दी शुरू होती है, जिनकी प्यूबर्टी जल्दी आती है या जिनका मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) देर से होता है, उनमें यह बीमारी जल्दी हो सकती है। इसके अलावा, जिनके मल्टीपल सेक्सुअल पार्टनर्स हैं या जिनका हाई पेरेंटिटी (कई बार बच्चा जन्म देने का इतिहास) है, उनके लिए भी खतरा बढ़ जाता है।

जीवनशैली संबंधी कुछ आदतें भी इस रिस्क को बढ़ाती हैं। स्मोकिंग, शराब का सेवन, लंबे समय तक ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का इस्तेमाल या कोई इम्यून सिस्टम कमजोर करने वाली बीमारी जैसे एचआईवी भी सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं।

अब बात करें लक्षणों की। सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती संकेत कई महिलाओं द्वारा अनदेखा कर दिए जाते हैं। सबसे आम लक्षण है एबनॉर्मल वजाइनल ब्लीडिंग, जो सेक्स के बाद, पीरियड्स के बीच या मेनोपॉज के बाद हो सकती है। दूसरा लक्षण है फाउल स्मेलिंग वॉटररी डिस्चार्ज, जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है, तो वजन घटना, पीठ या कमर में दर्द, यूरिन करने में परेशानी और कब्ज जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।

डॉ. पाठक की सलाह है कि महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। कोई भी असामान्य ब्लीडिंग या डिस्चार्ज अनदेखा न करें। समय पर जांच और सावधानी ही इस जानलेवा बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा तरीका है।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के दो मुख्य तरीके हैं। पहला है सक्रिय स्क्रीनिंग, जैसे पैप स्मीयर टेस्ट, जिससे शुरुआती बदलावों का पता लगाया जा सकता है। दूसरा है एचपीवी वैक्सीन, जो संक्रमण और कैंसर दोनों से बचाव करती है। डॉक्टर सुझाव देते हैं कि युवा और मध्य आयु वर्ग की महिलाएं इसे जरूर लगवाएं।

अगर स्क्रीनिंग में कोई एबनॉर्मलिटी आती है, तो आगे की जांच में कोलपोस्कोपी या सर्वाइकल बायोप्सी की जाती है। इसके बाद अगर कैंसर पाया जाता है तो उसकी स्टेजिंग की जाती है। शुरुआती स्टेज में केवल सर्जरी (हिस्ट्रेक्टोमी) की जा सकती है, जबकि एडवांस्ड स्टेज में सर्जरी के साथ रेडिएशन या कीमोथेरेपी दी जाती है। स्टेजिंग के आधार पर डॉक्टर सबसे सही इलाज तय करते हैं।

डॉ. पाठक कहती हैं कि जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। कई महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं और यही देर उन्हें जानलेवा साबित कर सकती है। इसलिए अगर किसी महिला को ब्लीडिंग, अजीब डिस्चार्ज, बैक पेन या वजन में अचानक कमी नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

Point of View

यह स्पष्ट है कि सर्वाइकल कैंसर की समस्या अब एक गंभीर संकट बनती जा रही है। महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। जागरूकता और नियमित जांच के माध्यम से हम इस बीमारी को रोक सकते हैं।
NationPress
17/01/2026

Frequently Asked Questions

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण क्या हैं?
सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों में एबनॉर्मल वजाइनल ब्लीडिंग, अजीब डिस्चार्ज, वजन में कमी, और पीठ या कमर में दर्द शामिल हैं।
एचपीवी वैक्सीन कब लगवानी चाहिए?
युवाओं और मध्य आयु वर्ग की महिलाओं को एचपीवी वैक्सीन लगवानी चाहिए, खासकर जिनकी सेक्सुअल एक्टिविटी शुरू हो चुकी है।
क्या सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकता है?
हाँ, सक्रिय स्क्रीनिंग और एचपीवी वैक्सीन के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर की जांच कैसे की जाती है?
सर्वाइकल कैंसर की जांच पैप स्मीयर टेस्ट और अन्य जांचों के माध्यम से की जाती है।
क्या सर्वाइकल कैंसर का इलाज संभव है?
हाँ, शुरुआती स्टेज में सर्जरी और एडवांस्ड स्टेज में रेडिएशन या कीमोथेरेपी से इलाज संभव है।
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