मंगोलिया में ब्यूबोनिक प्लेग की पुष्टि, मार्मोट का मांस खाने से हुआ संक्रमण; 17 प्रांत खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
मंगोलिया के पश्चिमी खोव्द प्रांत में ब्यूबोनिक प्लेग के एक मामले की प्रयोगशाला जाँच में आधिकारिक पुष्टि हो गई है। राष्ट्रीय जूनोटिक रोग केंद्र (एनसीजेडडी) ने 25 जुलाई को बताया कि अंतिम बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण में संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमित व्यक्ति ने पड़ोसी बायान-उल्गी प्रांत के उलानखुस क्षेत्र की यात्रा के दौरान मार्मोट (एक प्रकार की जंगली गिलहरी) का मांस खाया था, जिसके बाद यह संक्रमण हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
एनसीजेडडी के अनुसार, संक्रमित व्यक्ति ने बायान-उल्गी प्रांत में यात्रा के दौरान मार्मोट का मांस खाया। इसके बाद किए गए बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षणों में येर्सिनिया पेस्टिस जीवाणु की पुष्टि हुई, जो ब्यूबोनिक प्लेग का कारक है। मामला खोव्द प्रांत में दर्ज किया गया है और स्वास्थ्य अधिकारी संपर्क-अनुरेखण (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) में जुटे हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों की चेतावनी
एनसीजेडडी ने जनता से मार्मोट का शिकार न करने, उसका मांस या आंतरिक अंग न छूने और मृत अथवा बीमार जंगली कृंतकों के संपर्क से दूर रहने की अपील की है। केंद्र ने स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियाँ संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं।
गौरतलब है कि मंगोलिया में मार्मोट के शिकार पर कानूनी प्रतिबंध है, फिर भी कुछ लोग इसे पारंपरिक व्यंजन मानते हुए अवैध शिकार जारी रखते हैं। यही अवैध शिकार और मांस का सेवन हर गर्मी में प्लेग के मामलों की प्रमुख वजह बनता है।
खतरे का दायरा
एनसीजेडडी ने बताया कि मंगोलिया के 21 में से 17 प्रांत वर्तमान में प्लेग-प्रभावित या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की श्रेणी में हैं। गर्मियों के महीनों में ग्रामीण इलाकों में आवाजाही बढ़ने के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
पिछले वर्ष सितंबर में देश में ब्यूबोनिक प्लेग के तीन मामलों की पुष्टि हुई थी, जिनमें से दो खुव्सगुल प्रांत के थे। सभी मरीजों का उपचार खुव्सगुल प्रांतीय जनरल अस्पताल में किया गया था और संक्रमितों के संपर्क में आए 80 लोगों को पृथक कर स्थानीय अस्पतालों में इलाज दिया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब मंगोलिया में हर गर्मी में प्लेग के मामले सामने आते रहे हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ब्यूबोनिक प्लेग एक जीवाणुजनित (बैक्टीरियल) बीमारी है जो जंगली कृंतकों पर रहने वाले पिस्सुओं के माध्यम से फैलती है। WHO ने चेतावनी दी है कि समय पर उपचार न मिलने पर यह रोग 24 घंटे के भीतर जानलेवा हो सकता है।
WHO के मुताबिक, इतिहास में प्लेग ने कई विनाशकारी महामारियाँ पैदा की हैं — जिनमें 14वीं शताब्दी की 'ब्लैक डेथ' भी शामिल है, जिसने यूरोप में 5 करोड़ से अधिक लोगों की जान ली थी। हालाँकि आज एंटीबायोटिक दवाओं और सामान्य सावधानियों से इस बीमारी का प्रभावी उपचार संभव है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य
WHO के अनुसार, प्लेग ओशिनिया को छोड़कर सभी महाद्वीपों में पाया जाता है। 1990 के दशक के बाद से इसके अधिकांश मानव मामले अफ्रीका में दर्ज हुए हैं। वर्तमान में डीआरसी (कांगो), मेडागास्कर और पेरू इस बीमारी से सर्वाधिक प्रभावित देशों में शामिल हैं। मंगोलिया में इस मामले की पुष्टि के साथ, स्वास्थ्य विशेषज्ञ गर्मियों में यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।