25 जुलाई 2026
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मंगोलिया में ब्यूबोनिक प्लेग की पुष्टि, मार्मोट का मांस खाने से हुआ संक्रमण; 17 प्रांत खतरे में

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मंगोलिया में ब्यूबोनिक प्लेग की पुष्टि, मार्मोट का मांस खाने से हुआ संक्रमण; 17 प्रांत खतरे में

सारांश

मंगोलिया के खोव्द प्रांत में ब्यूबोनिक प्लेग का एक मामला प्रयोगशाला में पुष्ट हुआ है — संक्रमण की वजह मार्मोट का मांस खाना बताया गया है। देश के 21 में से 17 प्रांत खतरे की जद में हैं। WHO के अनुसार समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी 24 घंटे में जानलेवा हो सकती है।

मुख्य बातें

मंगोलिया के खोव्द प्रांत में ब्यूबोनिक प्लेग के एक मामले की बैक्टीरियोलॉजिकल जाँच में पुष्टि हुई।
संक्रमित व्यक्ति ने बायान-उल्गी प्रांत के उलानखुस क्षेत्र में मार्मोट का मांस खाया था।
मंगोलिया के 21 में से 17 प्रांत प्लेग-प्रभावित या उच्च जोखिम श्रेणी में हैं।
पिछले वर्ष सितंबर में तीन मामलों की पुष्टि हुई थी; 80 संपर्कों को पृथक किया गया था।
WHO के अनुसार, समय पर उपचार न मिलने पर प्लेग 24 घंटे में जानलेवा हो सकता है; एंटीबायोटिक से उपचार संभव है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने मार्मोट का शिकार, मांस और मृत कृंतकों के संपर्क से बचने की सख्त चेतावनी जारी की।

मंगोलिया के पश्चिमी खोव्द प्रांत में ब्यूबोनिक प्लेग के एक मामले की प्रयोगशाला जाँच में आधिकारिक पुष्टि हो गई है। राष्ट्रीय जूनोटिक रोग केंद्र (एनसीजेडडी) ने 25 जुलाई को बताया कि अंतिम बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण में संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमित व्यक्ति ने पड़ोसी बायान-उल्गी प्रांत के उलानखुस क्षेत्र की यात्रा के दौरान मार्मोट (एक प्रकार की जंगली गिलहरी) का मांस खाया था, जिसके बाद यह संक्रमण हुआ।

मुख्य घटनाक्रम

एनसीजेडडी के अनुसार, संक्रमित व्यक्ति ने बायान-उल्गी प्रांत में यात्रा के दौरान मार्मोट का मांस खाया। इसके बाद किए गए बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षणों में येर्सिनिया पेस्टिस जीवाणु की पुष्टि हुई, जो ब्यूबोनिक प्लेग का कारक है। मामला खोव्द प्रांत में दर्ज किया गया है और स्वास्थ्य अधिकारी संपर्क-अनुरेखण (कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग) में जुटे हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों की चेतावनी

एनसीजेडडी ने जनता से मार्मोट का शिकार न करने, उसका मांस या आंतरिक अंग न छूने और मृत अथवा बीमार जंगली कृंतकों के संपर्क से दूर रहने की अपील की है। केंद्र ने स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियाँ संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं।

गौरतलब है कि मंगोलिया में मार्मोट के शिकार पर कानूनी प्रतिबंध है, फिर भी कुछ लोग इसे पारंपरिक व्यंजन मानते हुए अवैध शिकार जारी रखते हैं। यही अवैध शिकार और मांस का सेवन हर गर्मी में प्लेग के मामलों की प्रमुख वजह बनता है।

खतरे का दायरा

एनसीजेडडी ने बताया कि मंगोलिया के 21 में से 17 प्रांत वर्तमान में प्लेग-प्रभावित या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की श्रेणी में हैं। गर्मियों के महीनों में ग्रामीण इलाकों में आवाजाही बढ़ने के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।

पिछले वर्ष सितंबर में देश में ब्यूबोनिक प्लेग के तीन मामलों की पुष्टि हुई थी, जिनमें से दो खुव्सगुल प्रांत के थे। सभी मरीजों का उपचार खुव्सगुल प्रांतीय जनरल अस्पताल में किया गया था और संक्रमितों के संपर्क में आए 80 लोगों को पृथक कर स्थानीय अस्पतालों में इलाज दिया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब मंगोलिया में हर गर्मी में प्लेग के मामले सामने आते रहे हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ब्यूबोनिक प्लेग एक जीवाणुजनित (बैक्टीरियल) बीमारी है जो जंगली कृंतकों पर रहने वाले पिस्सुओं के माध्यम से फैलती है। WHO ने चेतावनी दी है कि समय पर उपचार न मिलने पर यह रोग 24 घंटे के भीतर जानलेवा हो सकता है।

WHO के मुताबिक, इतिहास में प्लेग ने कई विनाशकारी महामारियाँ पैदा की हैं — जिनमें 14वीं शताब्दी की 'ब्लैक डेथ' भी शामिल है, जिसने यूरोप में 5 करोड़ से अधिक लोगों की जान ली थी। हालाँकि आज एंटीबायोटिक दवाओं और सामान्य सावधानियों से इस बीमारी का प्रभावी उपचार संभव है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य

WHO के अनुसार, प्लेग ओशिनिया को छोड़कर सभी महाद्वीपों में पाया जाता है। 1990 के दशक के बाद से इसके अधिकांश मानव मामले अफ्रीका में दर्ज हुए हैं। वर्तमान में डीआरसी (कांगो), मेडागास्कर और पेरू इस बीमारी से सर्वाधिक प्रभावित देशों में शामिल हैं। मंगोलिया में इस मामले की पुष्टि के साथ, स्वास्थ्य विशेषज्ञ गर्मियों में यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक पूर्वानुमेय चक्र है जो कानूनी प्रतिबंध के बावजूद मार्मोट के अवैध शिकार और उसके मांस के सेवन से चलता रहता है। असली सवाल यह है कि प्रतिबंध होने के बाद भी यह परंपरा क्यों जारी है — और स्वास्थ्य तंत्र हर साल प्रतिक्रियात्मक (रिएक्टिव) मोड में क्यों रहता है। 21 में से 17 प्रांतों का जोखिम क्षेत्र में होना बताता है कि यह केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य विफलता की ओर इशारा करता है। WHO-अनुशंसित एंटीबायोटिक उपचार उपलब्ध है, पर दूरदराज के इलाकों में समय पर पहुँच ही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगोलिया में ब्यूबोनिक प्लेग कैसे फैला?
संक्रमित व्यक्ति ने बायान-उल्गी प्रांत के उलानखुस क्षेत्र की यात्रा के दौरान मार्मोट का मांस खाया, जिसके बाद संक्रमण हुआ। एनसीजेडडी के अनुसार, मार्मोट जैसे जंगली कृंतकों पर रहने वाले पिस्सू इस बीमारी के प्रमुख वाहक हैं।
ब्यूबोनिक प्लेग क्या है और यह कितना खतरनाक है?
ब्यूबोनिक प्लेग येर्सिनिया पेस्टिस जीवाणु से होने वाली बीमारी है, जो संक्रमित पिस्सुओं के काटने से फैलती है। WHO के अनुसार, समय पर उपचार न मिलने पर यह 24 घंटे के भीतर जानलेवा हो सकती है, हालाँकि एंटीबायोटिक दवाओं से इसका प्रभावी इलाज संभव है।
मंगोलिया में कितने प्रांत प्लेग के खतरे में हैं?
एनसीजेडडी के अनुसार, मंगोलिया के 21 में से 17 प्रांत वर्तमान में प्लेग-प्रभावित या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की श्रेणी में हैं। गर्मियों में ग्रामीण यात्राएँ बढ़ने से खतरा और अधिक हो जाता है।
मार्मोट का शिकार मंगोलिया में क्यों जारी है जबकि यह प्रतिबंधित है?
मंगोलिया में मार्मोट के शिकार पर कानूनी प्रतिबंध है, लेकिन कुछ लोग इसे पारंपरिक व्यंजन मानते हैं और अवैध शिकार जारी रखते हैं। यही कारण है कि हर गर्मी में प्लेग के मामले सामने आते रहते हैं।
ब्यूबोनिक प्लेग से बचाव के लिए क्या सावधानियाँ बरतें?
स्वास्थ्य अधिकारियों ने मार्मोट का शिकार न करने, उसका मांस या आंतरिक अंग न छूने और मृत या बीमार जंगली कृंतकों के संपर्क से बचने की सलाह दी है। संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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