श्वेता तिवारी का तीखा सवाल: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पंजाब के शिक्षा मंत्री कब देंगे इस्तीफा?
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने 25 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके से सीधा सवाल पूछा — अगर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है, तो पंजाब के शिक्षा मंत्री कब पद छोड़ेंगे? नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर देशव्यापी छात्र आंदोलन के बीच यह सवाल चर्चा का केंद्र बन गया है।
श्वेता तिवारी ने क्या कहा
तिवारी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया जिसमें अभिजीत दिपके यह कहते नज़र आ रहे हैं कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब कैबिनेट में किसी भी ऐसे मंत्री का इस्तीफा माँगा जा सकता है जो अपेक्षित काम नहीं कर रहा। इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेत्री ने लिखा, 'अब, पंजाब के शिक्षा मंत्री कब इस्तीफा दे रहे हैं? और आप लोग वहाँ कब विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, कॉकरोच जनता पार्टी?'
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: पृष्ठभूमि
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक चले बड़े छात्र विरोध-प्रदर्शनों के बाद शनिवार, 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। छात्र मुख्य रूप से नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर उनका इस्तीफा माँग रहे थे।
यह इस्तीफा 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद आया, जिसने पूरे देश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी। इसके बाद बड़ी संख्या में नागरिक छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पर उमड़ पड़े।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और पुलिस कार्रवाई
आंदोलन उस समय और तीव्र हो गया जब 18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर के विरोध स्थल से जबरदस्ती हटा दिया। वांगचुक 21 दिनों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पूरी कर चुके थे और कथित परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, उनकी बिगड़ती सेहत, चिकित्सकीय सलाह और दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। वांगचुक ने गुरुवार की देर रात अपना अनशन तोड़ दिया था।
आंदोलन का विस्तार
विरोध प्रदर्शन दिल्ली से शुरू होकर पहले मेट्रो शहरों और फिर छोटे कस्बों तक फैल गए। गौरतलब है कि यह आंदोलन केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा — देशभर में छात्रों और नागरिकों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की माँग को लेकर सड़कों पर उतरे।
आगे क्या
श्वेता तिवारी के सवाल ने राजनीतिक जवाबदेही की बहस को एक नया आयाम दिया है। यह देखना अहम होगा कि क्या विपक्षी दल और नागरिक समाज राज्य स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर इसी तरह की जवाबदेही की माँग करते हैं। CJP और अन्य संगठनों की आगामी प्रतिक्रिया इस बहस की दिशा तय करेगी।