25 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

विकसित भारत 2047: इकोनॉमिक्स ऑब्जर्वेटरी रिपोर्ट में 80 वर्षों की आर्थिक प्रगति का लेखा-जोखा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
विकसित भारत 2047: इकोनॉमिक्स ऑब्जर्वेटरी रिपोर्ट में 80 वर्षों की आर्थिक प्रगति का लेखा-जोखा

सारांश

आजादी के 80 वर्षों में भारत ने प्रति व्यक्ति जीडीपी से लेकर साक्षरता तक हर मोर्चे पर ऐतिहासिक छलांग लगाई है — लेकिन इकोनॉमिक्स ऑब्जर्वेटरी की रिपोर्ट चेताती है कि 'विकसित भारत 2047' की मंजिल पाने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार में अभी और निवेश की जरूरत है।

मुख्य बातें

इकोनॉमिक्स ऑब्जर्वेटरी की रिपोर्ट के अनुसार 1947 के बाद से भारत की आर्थिक प्रगति ने 'विकसित भारत 2047' के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।
पिछले 80 वर्षों में प्रति व्यक्ति जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि, औसत आयु दोगुने से अधिक और वयस्क साक्षरता दर में लगभग छह गुना बढ़ोतरी दर्ज हुई।
1.4 अरब से अधिक की आबादी और विशाल युवा कार्यबल भारत के लिए अवसर और चुनौती दोनों हैं।
रिपोर्ट में स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में मध्यम अवधि के निवेश को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है।
मानव विकास सूचकांक (HDI) में सुधार के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में और अधिक प्रगति आवश्यक बताई गई है।
भारत वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाने और रुपए का अंतरराष्ट्रीय उपयोग बढ़ाने की दिशा में प्रयासरत है।

इकोनॉमिक्स ऑब्जर्वेटरी की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से भारत ने जो असाधारण आर्थिक रूपांतरण हासिल किया है, उसने 'विकसित भारत 2047' के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए एक ठोस आधार तैयार कर दिया है। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि इस गति को बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और ग्रीन एनर्जी में निरंतर निवेश अनिवार्य होगा।

आठ दशकों में भारत का आर्थिक सफर

रिपोर्ट के अनुसार, आजादी के समय भारत व्यापक गरीबी, सीमित औद्योगिक क्षमता और जर्जर बुनियादी ढाँचे से जूझ रहा था। आज वही देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले लगभग 80 वर्षों में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है, लोगों की औसत आयु दोगुने से अधिक हो गई है और वयस्क साक्षरता दर में लगभग छह गुना बढ़ोतरी हुई है।

प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर भी भारत की छलांग उल्लेखनीय रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक समय मिट्टी के तेल के दीयों पर निर्भर रहने वाला देश आज परमाणु कार्यक्रम जैसी उन्नत तकनीकी क्षमताएँ विकसित कर चुका है — यह परिवर्तन किसी भी मानक से असाधारण है।

जनसांख्यिकी: अवसर भी, चुनौती भी

रिपोर्ट के अनुसार, 1.4 अरब से अधिक की आबादी के साथ विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बनना भारत के लिए दोधारी तलवार है। एक ओर विशाल युवा कार्यबल आर्थिक विकास को नई गति दे सकता है, वहीं दूसरी ओर इस जनशक्ति को कुशल और उत्पादक बनाए रखने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, कौशल विकास और रोजगार सृजन में पर्याप्त निवेश की दरकार होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत के श्रम बाजार पर ऑटोमेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दबाव बढ़ रहा है, जिससे कौशल विकास की प्राथमिकता और भी बढ़ जाती है।

मानव विकास सूचकांक पर ध्यान जरूरी

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि मानव विकास सूचकांक (HDI) में सुधार से भी मापा जाना चाहिए। पिछले दो दशकों में आय स्तर में तेजी से सुधार हुआ है, लेकिन स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में अभी और अधिक प्रगति आवश्यक है। रिपोर्ट में नीति-निर्माताओं को सुझाव दिया गया है कि वे स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में मध्यम अवधि के निवेश को प्राथमिकता दें।

गौरतलब है कि रिपोर्ट ने राज्यों के विकास परिणामों की बेहतर निगरानी और पिछड़े क्षेत्रों को आगे लाने के लिए डेटा प्रणालियों को मजबूत बनाने की भी सिफारिश की है।

डॉलर पर निर्भरता घटाने की दिशा में प्रयास

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारत वैश्विक व्यापार और वित्त में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, रुपए का अंतरराष्ट्रीय उपयोग बढ़ाने, निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने और अर्थव्यवस्था में विविधता लाने से भारत बाहरी आर्थिक झटकों का सामना करने में अधिक सक्षम बन सकता है।

आगे की राह

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारत की यात्रा प्रेरणादायक तो है, लेकिन 2047 तक 'विकसित राष्ट्र' का दर्जा पाने के लिए आर्थिक और सामाजिक दोनों मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। नीतिगत सुधारों की गति, निवेश की निरंतरता और समावेशी विकास की प्रतिबद्धता ही तय करेगी कि भारत इस लक्ष्य को समय पर हासिल कर पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'विकसित भारत 2047' एक नीतिगत रोडमैप है या एक राजनीतिक नारा। प्रति व्यक्ति जीडीपी और साक्षरता में सुधार के आँकड़े उत्साहजनक हैं, परंतु HDI में भारत की स्थिति अभी भी अपेक्षाकृत कमजोर है — और यह अंतर केवल निवेश की कमी से नहीं, बल्कि नीतिगत क्रियान्वयन की खामियों से भी उपजा है। रिपोर्ट की सिफारिशें — डेटा प्रणाली मजबूत करना, राज्यस्तरीय निगरानी — सही दिशा में हैं, लेकिन इन्हें लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति और जवाबदेही तंत्र के बिना ये कागजी सुझाव ही बने रहेंगे।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इकोनॉमिक्स ऑब्जर्वेटरी की रिपोर्ट में 'विकसित भारत 2047' के बारे में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट के अनुसार, 1947 के बाद से भारत की आर्थिक प्रगति ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। हालाँकि, इस लक्ष्य को पाने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और ग्रीन एनर्जी में निरंतर निवेश आवश्यक बताया गया है।
पिछले 80 वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति के मुख्य संकेतक क्या हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले लगभग 80 वर्षों में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, औसत आयु दोगुने से अधिक हो गई है और वयस्क साक्षरता दर में लगभग छह गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत परमाणु कार्यक्रम जैसी उन्नत तकनीकी क्षमताएँ भी विकसित कर चुका है।
भारत के युवा कार्यबल को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का विशाल युवा कार्यबल आर्थिक विकास को नई गति दे सकता है, लेकिन इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, कौशल विकास और रोजगार सृजन में पर्याप्त निवेश जरूरी होगा। 1.4 अरब से अधिक की आबादी को रिपोर्ट ने अवसर और चुनौती दोनों बताया है।
मानव विकास सूचकांक (HDI) में सुधार के लिए रिपोर्ट में क्या सुझाव दिए गए हैं?
रिपोर्ट में नीति-निर्माताओं को स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में मध्यम अवधि के निवेश को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। साथ ही, राज्यों के विकास परिणामों की बेहतर निगरानी और पिछड़े क्षेत्रों को आगे लाने के लिए डेटा प्रणालियों को मजबूत बनाने की भी सिफारिश की गई है।
भारत डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए क्या कदम उठा रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत रुपए का अंतरराष्ट्रीय उपयोग बढ़ाने, निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने और अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की दिशा में प्रयास कर रहा है। इन उपायों से भारत बाहरी आर्थिक झटकों का सामना करने में अधिक सक्षम बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले