विकसित भारत 2047: लक्ष्य पाने के लिए $10 ट्रिलियन GDP अनिवार्य, पूर्व राजनयिक की रिपोर्ट में चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व राजनयिक मोहन कुमार ने 'द जेरूसलम पोस्ट' में प्रकाशित एक विश्लेषण में स्पष्ट किया है कि 'विकसित भारत 2047' के विजन को वास्तविक रूप देने के लिए भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को कम से कम 10 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाना अनिवार्य होगा। 16 अगस्त 2026 को सामने आई इस रिपोर्ट में भारत की मौजूदा 4.5 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी को 1.5 अरब की विशाल आबादी के अनुपात में अपर्याप्त बताया गया है।
मौजूदा आर्थिक स्थिति और अंतर
मोहन कुमार ने लिखा, 'इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत दुनिया में जीडीपी के लिहाज से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने पर गर्व कर सकता है, लेकिन करीब 1.5 अरब की आबादी वाले देश के लिए 4.5 ट्रिलियन डॉलर की मौजूदा जीडीपी अपेक्षाकृत कम है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने हाल ही में जापान और जर्मनी को पछाड़कर वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में ऊपर स्थान हासिल किया है।
10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने का रोडमैप
रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस लक्ष्य तक तीन प्रमुख मार्गों से पहुँच सकता है — वैश्विक विदेशी व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ाना, अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करना, और गहरे एवं संरचनात्मक आर्थिक सुधार लागू करना। हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि केवल जीडीपी की रफ्तार बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा — विकास का लाभ समाज के सबसे निचले पायदान तक पहुँचना भी उतना ही जरूरी है।
मोहन कुमार के शब्दों में, 'जीडीपी की वृद्धि दर तेज होनी चाहिए, इसमें कोई सवाल नहीं है, लेकिन केवल इतना पर्याप्त नहीं है। विकास समावेशी होना चाहिए और इसका लाभ आर्थिक पिरामिड के निचले पायदान पर मौजूद वंचित लोगों तक पहुँचना चाहिए।'
युवा उद्यमिता और AI कौशल की भूमिका
रिपोर्ट में भारत की युवा आबादी को पारंपरिक रोजगार पर निर्भर रहने के बजाय उद्यमी और रोजगार-सृजक बनाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। गौरतलब है कि देश में वर्तमान में 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं और युवा उद्यमियों के लिए ₹1 लाख करोड़ का इनोवेशन फंड भी उपलब्ध है।
इसी संदर्भ में, स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि सरकार अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कौशल प्रशिक्षण देने की दिशा में काम करेगी। रिपोर्ट में AI जैसी उभरती तकनीकों पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश की गई है, यह देखते हुए कि देश की शिक्षा प्रणाली अभी भी काफी हद तक परंपरागत और रटने पर आधारित है।
स्वास्थ्य और सामाजिक ढाँचे पर जोर
रिपोर्ट में स्वास्थ्य क्षेत्र को भी विकसित भारत के लिए एक अहम स्तंभ बताया गया है। आयुष्मान भारत जैसी सरकारी पहलों को स्वीकार करते हुए मोहन कुमार ने कहा कि भारत को सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे में बड़े पैमाने पर सुधार जारी रखने होंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवाएँ अधिकांश नागरिकों के लिए किफायती और सुलभ हो सकें।
मिशन मोड में काम करने की दरकार
मोहन कुमार ने अपने विश्लेषण के अंत में कहा, 'भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की स्थिति में है, लेकिन देश को मिशन मोड में काम करने की जरूरत है। यह सुनिश्चित करने के लिए पूरे सरकारी तंत्र को एकजुट होकर काम करना होगा कि इस राष्ट्रीय प्रयास में कोई कसर न छोड़ी जाए।' रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि स्पष्ट तात्कालिकता, राष्ट्रीय उद्देश्य और विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित प्रयास ही इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साकार कर सकते हैं।