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विकसित भारत 2047: लक्ष्य पाने के लिए $10 ट्रिलियन GDP अनिवार्य, पूर्व राजनयिक की रिपोर्ट में चेतावनी

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विकसित भारत 2047: लक्ष्य पाने के लिए $10 ट्रिलियन GDP अनिवार्य, पूर्व राजनयिक की रिपोर्ट में चेतावनी

सारांश

विकसित भारत 2047 सिर्फ एक नारा नहीं — इसकी कीमत है $10 ट्रिलियन की जीडीपी। पूर्व राजनयिक मोहन कुमार की रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा $4.5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था 1.5 अरब लोगों के लिए नाकाफी है और बिना समावेशी विकास, AI कौशल और स्वास्थ्य सुधार के यह सपना अधूरा रहेगा।

मुख्य बातें

पूर्व राजनयिक मोहन कुमार की रिपोर्ट के अनुसार विकसित भारत 2047 के लिए भारत की जीडीपी को $10 ट्रिलियन तक पहुँचाना अनिवार्य है।
भारत की मौजूदा जीडीपी $4.5 ट्रिलियन है, जो 1.5 अरब की आबादी के अनुपात में अपर्याप्त बताई गई है।
लक्ष्य पाने के लिए FDI वृद्धि, वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी और गहरे आर्थिक सुधार जरूरी बताए गए।
PM मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर 1 करोड़ युवाओं को अगले एक वर्ष में AI कौशल प्रशिक्षण देने की घोषणा की।
देश में 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप और ₹1 लाख करोड़ का इनोवेशन फंड उपलब्ध।
रिपोर्ट में समावेशी विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे में बड़े सुधार को भी अनिवार्य बताया गया।

पूर्व राजनयिक मोहन कुमार ने 'द जेरूसलम पोस्ट' में प्रकाशित एक विश्लेषण में स्पष्ट किया है कि 'विकसित भारत 2047' के विजन को वास्तविक रूप देने के लिए भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को कम से कम 10 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाना अनिवार्य होगा। 16 अगस्त 2026 को सामने आई इस रिपोर्ट में भारत की मौजूदा 4.5 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी को 1.5 अरब की विशाल आबादी के अनुपात में अपर्याप्त बताया गया है।

मौजूदा आर्थिक स्थिति और अंतर

मोहन कुमार ने लिखा, 'इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत दुनिया में जीडीपी के लिहाज से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने पर गर्व कर सकता है, लेकिन करीब 1.5 अरब की आबादी वाले देश के लिए 4.5 ट्रिलियन डॉलर की मौजूदा जीडीपी अपेक्षाकृत कम है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने हाल ही में जापान और जर्मनी को पछाड़कर वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में ऊपर स्थान हासिल किया है।

10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने का रोडमैप

रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस लक्ष्य तक तीन प्रमुख मार्गों से पहुँच सकता है — वैश्विक विदेशी व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ाना, अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करना, और गहरे एवं संरचनात्मक आर्थिक सुधार लागू करना। हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि केवल जीडीपी की रफ्तार बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा — विकास का लाभ समाज के सबसे निचले पायदान तक पहुँचना भी उतना ही जरूरी है।

मोहन कुमार के शब्दों में, 'जीडीपी की वृद्धि दर तेज होनी चाहिए, इसमें कोई सवाल नहीं है, लेकिन केवल इतना पर्याप्त नहीं है। विकास समावेशी होना चाहिए और इसका लाभ आर्थिक पिरामिड के निचले पायदान पर मौजूद वंचित लोगों तक पहुँचना चाहिए।'

युवा उद्यमिता और AI कौशल की भूमिका

रिपोर्ट में भारत की युवा आबादी को पारंपरिक रोजगार पर निर्भर रहने के बजाय उद्यमी और रोजगार-सृजक बनाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। गौरतलब है कि देश में वर्तमान में 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं और युवा उद्यमियों के लिए ₹1 लाख करोड़ का इनोवेशन फंड भी उपलब्ध है।

इसी संदर्भ में, स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि सरकार अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कौशल प्रशिक्षण देने की दिशा में काम करेगी। रिपोर्ट में AI जैसी उभरती तकनीकों पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश की गई है, यह देखते हुए कि देश की शिक्षा प्रणाली अभी भी काफी हद तक परंपरागत और रटने पर आधारित है।

स्वास्थ्य और सामाजिक ढाँचे पर जोर

रिपोर्ट में स्वास्थ्य क्षेत्र को भी विकसित भारत के लिए एक अहम स्तंभ बताया गया है। आयुष्मान भारत जैसी सरकारी पहलों को स्वीकार करते हुए मोहन कुमार ने कहा कि भारत को सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे में बड़े पैमाने पर सुधार जारी रखने होंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवाएँ अधिकांश नागरिकों के लिए किफायती और सुलभ हो सकें।

मिशन मोड में काम करने की दरकार

मोहन कुमार ने अपने विश्लेषण के अंत में कहा, 'भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की स्थिति में है, लेकिन देश को मिशन मोड में काम करने की जरूरत है। यह सुनिश्चित करने के लिए पूरे सरकारी तंत्र को एकजुट होकर काम करना होगा कि इस राष्ट्रीय प्रयास में कोई कसर न छोड़ी जाए।' रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि स्पष्ट तात्कालिकता, राष्ट्रीय उद्देश्य और विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित प्रयास ही इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साकार कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस विकास का वितरण कैसा होगा — आँकड़ों में बढ़ोतरी और जमीनी बदलाव के बीच का फासला भारत में पहले भी बड़ा रहा है। मोहन कुमार का समावेशी विकास पर जोर सही दिशा में है, पर इसे नीतिगत ढाँचे में बाँधे बिना यह भी एक और इच्छासूची बनकर रह सकता है। AI कौशल और स्टार्टअप इकोसिस्टम की चमक के पीछे ग्रामीण भारत की शिक्षा और स्वास्थ्य की खाई को पाटना सबसे कठिन और सबसे जरूरी काम है — जिसकी चर्चा सबसे कम होती है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकसित भारत 2047 के लिए $10 ट्रिलियन GDP का लक्ष्य क्यों जरूरी है?
पूर्व राजनयिक मोहन कुमार की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की मौजूदा $4.5 ट्रिलियन की जीडीपी 1.5 अरब की आबादी के अनुपात में अपर्याप्त है। विकसित राष्ट्र का दर्जा पाने के लिए प्रति व्यक्ति आय और जीवन स्तर में पर्याप्त सुधार के लिए अर्थव्यवस्था को कम से कम $10 ट्रिलियन तक पहुँचाना जरूरी बताया गया है।
भारत $10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था कैसे बन सकता है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत वैश्विक विदेशी व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ाकर, अधिक FDI आकर्षित करके और गहरे संरचनात्मक आर्थिक सुधार लागू करके इस लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है। साथ ही युवा उद्यमिता और AI जैसी नई तकनीकों में कौशल विकास को भी अहम बताया गया है।
PM मोदी ने AI कौशल प्रशिक्षण को लेकर क्या घोषणा की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में घोषणा की कि सरकार अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को AI का कौशल प्रशिक्षण देने की दिशा में काम करेगी। इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को AI के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार करना है।
विकसित भारत 2047 के लिए केवल जीडीपी वृद्धि पर्याप्त क्यों नहीं है?
मोहन कुमार के अनुसार, विकास समावेशी होना चाहिए और इसका लाभ आर्थिक पिरामिड के सबसे निचले पायदान पर मौजूद लोगों तक पहुँचना जरूरी है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती बनाना और युवाओं को नई स्किल देना भी उतना ही अनिवार्य है।
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की मौजूदा स्थिति क्या है?
वर्तमान में भारत में 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हैं और युवा उद्यमियों के लिए ₹1 लाख करोड़ का इनोवेशन फंड उपलब्ध है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई अवसरों पर युवा उद्यमिता को विकसित भारत का प्रमुख स्तंभ बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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