भारत की जीडीपी में तेजी: जापान को पीछे छोड़कर तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एनएक्सटी फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत भारत प्रोग्रेस रिपोर्ट 2025-26 में उल्लेख किया गया है कि भारत 4.8 ट्रिलियन डॉलर की नॉमिनल जीडीपी के साथ जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। 8.2 प्रतिशत की विकास दर के साथ, यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है और जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी जीडीपी बनने की दिशा में अग्रसर है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, राजमार्गों, रेलवे, अंतरिक्ष और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 101 महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जो देश को एक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य की ओर ले जा रही हैं।
इस रिपोर्ट के अनुसार, कई उच्च-फ्रीक्वेंसी संकेतक देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं। जीएसटी कलेक्शन अप्रैल 2025 में रिकॉर्ड 2.17 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया था। इसके साथ ही, भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एयूएम 80 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) भी 1.15 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, जो निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।
भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का विकास अन्य देशों द्वारा भी अपनाया जा रहा है। इसका सबूत यूपीआई के माध्यम से होने वाले मासिक लेनदेन में मिलता है, जो 21 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जबकि आधार प्रमाणीकरण एक अरब से अधिक हो चुका है। इससे देश में वित्तीय समावेशन में वृद्धि हुई है और गरीबों को सरकारी सेवाएं पारदर्शी तरीके से सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाने में मदद मिली है।
बुनियादी ढांचे और संपर्क के क्षेत्र में, प्रमुख उपलब्धियों में विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे मेहराब पुल, चेनाब रेल पुल का निर्माण और वंदे भारत रेल नेटवर्क का निरंतर विस्तार शामिल है, जिससे उच्च गति रेल संपर्क में वृद्धि हुई है। देश ने अपने राष्ट्रीय राजमार्गों और रसद नेटवर्क का विस्तार किया है, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाओं में सुधार और परिवहन लागत में कमी आई है।
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में, नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। सौर, जलविद्युत और पवन ऊर्जा में मजबूत वृद्धि के बल पर, देश की गैर-जीवाश्म ईंधन विद्युत क्षमता का हिस्सा 2030 के लक्ष्य से पांच साल पहले ही 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि देश नई विश्व व्यवस्था में वैश्विक विकास का एक प्रमुख चालक बन रहा है।