चेन्नई में 2 लाख आवारा कुत्तों का रेबीज रोधी टीकाकरण अभियान, जीसीसी अगस्त के दूसरे सप्ताह से करेगा शुरू
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) अगस्त 2026 के दूसरे सप्ताह से एक व्यापक शहरव्यापी रेबीज रोधी टीकाकरण अभियान शुरू करने जा रहा है, जिसके तहत लगभग 2 लाख आवारा कुत्तों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान रेबीज नियंत्रण और पशु कल्याण को मज़बूत करने की दिशा में नगर निगम के अब तक के सबसे बड़े प्रयासों में से एक है।
अभियान का दायरा और लक्ष्य
यह अभियान चेन्नई के सभी क्षेत्रों में एक साथ संचालित किया जाएगा। आवारा कुत्तों के अलावा, पालतू कुत्तों के मालिकों को भी रेबीज और परजीवी रोधी टीके निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। जीसीसी ने पालतू जानवरों के मालिकों, स्थानीय पशुपालकों और बचावकर्ताओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया है।
पिछले वर्ष नगर निगम ने लगभग 1.47 लाख आवारा कुत्तों का टीकाकरण किया था, जब शहर में इनकी अनुमानित आबादी 1.80 लाख थी। तब से जनसंख्या में वृद्धि की आशंका को देखते हुए इस वर्ष लक्ष्य बढ़ाकर 2 लाख कर दिया गया है।
पशु जन्म नियंत्रण केंद्रों का विस्तार
यह टीकाकरण अभियान जीसीसी के पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) बुनियादी ढाँचे के विस्तार के साथ-साथ चलाया जा रहा है। वर्तमान में चेन्नई के 15 एबीसी केंद्रों में से 11 चालू हैं। नन्दंबक्कम और पेरंगुडी में दो और केंद्र अगले सप्ताह से परिचालन शुरू करेंगे, जबकि अंबत्तूर के अथिपटू और शोलिंगनल्लूर में शेष केंद्र अगस्त के चौथे सप्ताह तक चालू हो जाने की उम्मीद है।
सभी 15 केंद्रों के पूरी तरह चालू होने पर नसबंदी की दैनिक क्षमता मौजूदा 200 ऑपरेशन से दोगुनी होकर लगभग 400 ऑपरेशन प्रतिदिन हो जाने का अनुमान है।
नसबंदी अभियान में तेज़ी
इस वर्ष जनवरी से अब तक आवारा कुत्तों पर लगभग 24,000 गर्भनिरोधक ऑपरेशन किए जा चुके हैं। आँकड़े लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं — जनवरी में 1,490, फरवरी में 2,493, मार्च में 3,058, अप्रैल में 3,259, मई में 3,637 और जून में 4,765 सर्जरी की गईं। जुलाई में यह संख्या अब तक के उच्चतम स्तर 5,324 पर पहुँच गई।
पशु कल्याण कार्यकर्ताओं की चिंताएँ
यह अभियान पशु कल्याण कार्यकर्ताओं द्वारा जताई गई कुछ चिंताओं के बीच शुरू हो रहा है। कार्यकर्ताओं ने आवारा कुत्तों को पकड़ने के तरीके, टीकाकरण के दौरान उनके साथ व्यवहार, तथा टीकों के लिए आवश्यक कोल्ड-चेन स्थितियों को बनाए रखने पर सवाल उठाए हैं। टीका लगाए गए जानवरों को उनके मूल क्षेत्रों में सुरक्षित वापस भेजने की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्तियाँ सामने आई हैं।
जीसीसी ने टीकों के अनुचित प्रबंधन के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि टीकाकरण की शीशियों को आवश्यक सुरक्षा उपायों के साथ संग्रहित और परिवहन किया जाता है।
आगे की राह
जीसीसी का यह समन्वित अभियान — टीकाकरण और नसबंदी को एक साथ आगे बढ़ाते हुए — चेन्नई में रेबीज संचरण के जोखिम को कम करने और आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी पर दीर्घकालिक नियंत्रण पाने की रणनीति का हिस्सा है। सभी 15 एबीसी केंद्रों के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद इस दिशा में प्रगति की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।