तमिलनाडु: 3 वर्षीय ऋत्विक पर कुत्ते के हमले के बाद वेल्लोर-रानीपेट में टीकाकरण-नसबंदी अभियान तेज
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के तिरुपत्तूर जिले में लावारिस कुत्तों के झुंड द्वारा 3 वर्षीय एन. ऋत्विक पर किए गए हमले के बाद, वेल्लोर, रानीपेट और तिरुवन्नामलाई जिलों की नगर निकायों ने सामुदायिक कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी अभियान को व्यापक पैमाने पर तेज कर दिया है। इस घटना का फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जनता में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ गई, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन को तत्काल कदम उठाने पड़े।
अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
स्थानीय प्रशासन को एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) और वैक्सीनेशन कार्यक्रम को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं। यह अभियान पशुपालन विभाग (Animal Husbandry Department), तमिलनाडु एनिमल वेलफेयर बोर्ड और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के संयुक्त प्रयास से चलाया जा रहा है। वेल्लोर और तिरुवन्नामलाई नगर निगम समेत बड़ी शहरी स्थानीय निकायें पिछले एक महीने से प्रत्येक शनिवार को साप्ताहिक टीकाकरण और नसबंदी शिविर आयोजित कर रही हैं।
ज़िलेवार आँकड़े और प्रगति
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, वेल्लोर जिले में लगभग 45,829 सामुदायिक कुत्ते हैं, जिनमें से वेल्लोर नगर निगम की सीमा में 27,102, पेरनामबुट में 2,188 और गुडियाथम में 1,973 कुत्ते हैं। 25 जुलाई तक जिले भर में कुल 15,641 कुत्तों को टीका लगाया जा चुका था, जिनमें वेल्लोर नगर निगम क्षेत्र के 7,496 कुत्ते शामिल हैं।
तिरुवन्नामलाई में शहर के लगभग 5,175 सामुदायिक कुत्तों में से 4,000 से अधिक को पहले ही टीका लगाया जा चुका है। वहीं रानीपेट जिले में रानीपेट, शोलिंगहुर, वालाजाह, आरकोट, अरक्कोणम और मेलविशरम जैसे प्रमुख शहरों में लगभग 12,000 सामुदायिक कुत्तों की पहचान की गई है, जिनमें अकेले रानीपेट शहर में 5,787 कुत्ते हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिले के पहचाने गए 60 प्रतिशत से अधिक सामुदायिक कुत्तों को पहले ही टीका लगाया जा चुका है।
नया ABC केंद्र और बुनियादी ढाँचा
नसबंदी प्रयासों को और गति देने के लिए नगर निगम की ओर से ₹64 लाख की लागत से पहला समर्पित एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) केंद्र निर्माणाधीन है। यह केंद्र दीर्घकालिक आधार पर लावारिस कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आम जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों ने सरकार के इस अभियान का स्वागत किया है। उनका मानना है कि निरंतर टीकाकरण और नसबंदी से आवारा कुत्तों की संख्या धीरे-धीरे घटेगी और आवासीय क्षेत्र बच्चों तथा बुज़ुर्गों के लिए अधिक सुरक्षित बनेंगे। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में लावारिस कुत्तों के हमलों की घटनाएँ सार्वजनिक बहस का केंद्र बनी हुई हैं।
आगे की राह
अधिकारियों के अनुसार, अभियान को शहरी स्थानीय निकायों में निर्बाध जारी रखा जाएगा और ABC केंद्र के चालू होने के बाद नसबंदी की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो इसे तमिलनाडु के अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की संभावना है।