क्या 20 मिनट का ध्यान तन और मन के लिए संजीवनी बन सकता है, क्या यह हार्मोन संतुलन में मदद कर सकता है?

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क्या 20 मिनट का ध्यान तन और मन के लिए संजीवनी बन सकता है, क्या यह हार्मोन संतुलन में मदद कर सकता है?

सारांश

क्या आप जानते हैं कि 20 मिनट का ध्यान आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर सकता है? यह ना सिर्फ तनाव कम करता है, बल्कि याददाश्त को भी मजबूत करता है। जानें कैसे ध्यान आपके जीवन को संतुलित करने में मदद कर सकता है।

Key Takeaways

  • ध्यान से मानसिक तनाव में कमी आती है।
  • रोजाना 20 मिनट ध्यान करने से याददाश्त में सुधार होता है।
  • ध्यान स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है और बीमारियों का खतरा कम करता है।
  • ध्यान गहरी नींद लाने में मदद करता है।
  • यह हैप्पी हार्मोन का उत्पादन बढ़ाता है।

नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज के प्रतिस्पर्धात्मक जीवन में, करियर में आगे बढ़ने की होड़ में, जीवन की मूलभूत आवश्यकताएँ अक्सर पीछे छूट जाती हैं। खान-पान की अनदेखी हो रही है और स्वास्थ्य हाशिये पर चला गया है। लोग शारीरिक फिटनेस बनाए रखने के लिए रोज़ाना जिम में घंटों पसीना बहाते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अक्सर भूल जाते हैं।

मन और मस्तिष्क में अशांति धीरे-धीरे तनाव, अनिद्रा और बेचैनी का रूप ले लेती है। इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है और व्यक्ति मानसिक और शारीरिक बीमारियों का शिकार बन जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेडिटेशन मन और मस्तिष्क के लिए संजीवनी का काम कर सकता है, जो भीतर की शांति लौटाने के साथ जीवन को संतुलित करने में मदद करता है?

ध्यान केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर की असीम ऊर्जा से जुड़ने का एक विज्ञान है। दिन में 20 मिनट का ध्यान मन, मस्तिष्क और पूरे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और असीम शांति लाता है। आयुर्वेद में ध्यान को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ा गया है, जबकि विज्ञान में इसे मस्तिष्क का री-स्टार्ट बटन कहा जाता है, जो मस्तिष्क में 'अल्फा' और 'थीटा' तरंगों का उत्सर्जन करता है और 'ओवरक्लॉकिंग', यानी ओवर थिंकिंग, को रोकने की कोशिश करता है।

ध्यान कई मायनों में मन और तन दोनों के लिए आवश्यक है। रोजाना 20 मिनट ध्यान करने से तनाव में कमी आती है और 'कोर्टिसोल' (तनाव हार्मोन) का स्तर शरीर में कम होता है। ध्यान हैप्पी हार्मोन के उत्पादन को बढ़ावा देता है और अच्छे विचारों पर ध्यान केंद्रित करता है। दूसरी बात, याददाश्त की मजबूती। आजकल छोटी उम्र से ही चीजें भूलने की समस्या बच्चों से लेकर बड़ों में देखी जा रही हैं।

गर्भावस्था के दौरान और उसके बाद महिलाओं में भूलने की समस्या अधिक देखी जाती है, जो हार्मोन के असंतुलन के कारण होती है। इस स्थिति में ध्यान याददाश्त को बढ़ाने में सहायक होता है और सीखने की क्षमता को भी बढ़ाता है। यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि ध्यान रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में मदद करता है। नियमित ध्यान से बीमार होने का खतरा कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य को भी बढ़ावा मिलता है।

तीसरी बात, गहरी और अच्छी नींद। पूरे दिन सिस्टम पर काम करने और फोन का अत्यधिक उपयोग करने के कारण नींद सबसे अधिक प्रभावित होती है। ध्यान 'मेलाटोनिन', यानी नींद के हार्मोन, के निर्माण में सहायता करता है, जिससे अच्छी और गहरी नींद आ सके। इसके अलावा, नियमित ध्यान से बुढ़ापे की प्रक्रिया धीमी होती है और कोशिकाएं सही तरीके से मरम्मत करती रहती हैं।

Point of View

यह कहना उचित है कि मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना आज की आवश्यकता है। ध्यान न केवल हमारे मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि यह शारीरिक स्वास्थ्य में भी सुधार लाता है। हमें इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने की आवश्यकता है।

NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

ध्यान करने का सही समय कब है?
सुबह का समय सबसे अच्छा होता है, जब मन शांत और ताज़ा होता है।
क्या ध्यान करना सभी के लिए आवश्यक है?
हाँ, यह सभी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है।
क्या ध्यान से नींद में सुधार होता है?
जी हाँ, ध्यान से मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन बढ़ता है, जिससे अच्छी नींद आती है।
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