पिता भी नवजात के जन्म के बाद अनुभव करते हैं डिप्रेशन: नई स्टडी से खुलासा
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नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एक नए सदस्य का आगमन घर में खुशियों की लहर लेकर आता है, लेकिन इसके साथ ही कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। नवजात बच्चे के जन्म के बाद मां के 'पोस्टपार्टम ब्लूज' के बारे में चर्चा तो होती है, लेकिन अक्सर हम उस पिता को नजरअंदाज कर देते हैं, जो इस परिवर्तन के साथ सामंजस्य बनाने की कोशिश कर रहा होता है।
हाल ही में एक अध्ययन ने इस विषय पर नई रोशनी डाली है। 'जेएएमए नेटवर्क ओपन' में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद नहीं, बल्कि करीब एक साल के अंदर पिता की मानसिक सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस अवधि में डिप्रेशन और तनाव की समस्याएं 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ जाती हैं।
यह अध्ययन स्वीडन में किया गया था, जिसमें लगभग 10 लाख पुरुषों (पिता) के डेटा का विश्लेषण किया गया। इस व्यापक शोध ने स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक महीनों में पिता आमतौर पर स्थिर नजर आते हैं, क्योंकि उनका ध्यान मां और नवजात की देखभाल में होता है। अपनी थकान और मानसिक दबाव को वे अक्सर अनदेखा कर देते हैं।
लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और मानसिक दबाव भी धीरे-धीरे बढ़ता है। शोध के अनुसार, बच्चे के जन्म के 9 से 12 महीने के बीच का वक्त सबसे संवेदनशील होता है। इस समय नींद की कमी, काम और परिवार के बीच संतुलन की कमी, वित्तीय दबाव और रिश्तों में बदलाव पिता के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, जो डिप्रेशन या तनाव डिसऑर्डर के रूप में प्रकट होता है।
अध्ययन यह भी बताता है कि पिता अपनी मानसिक स्थिति के बारे में खुलकर बात नहीं करते। सामाजिक दबाव और भावनाओं को छिपाने की प्रवृत्ति के कारण वे मदद मांगने से कतराते हैं, जिससे समस्या गंभीर होने तक पहचान में नहीं आती। इसलिए, पिता के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सपोर्ट सिस्टम की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।