क्या फैटी लिवर की समस्या को सुधारने के लिए हमें जीवनशैली में बदलाव करना चाहिए?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 3 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। फैटी लिवर एक सामान्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इसकी शुरुआत में यह किसी प्रकार का दर्द नहीं देता, जिस कारण लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। धीरे-धीरे, यह यकृत की अग्नि और कार्यक्षमता को कमजोर करने लगती है। इसके प्रारंभिक लक्षण हैं: थकान, पेट में भारीपन, अपच, मितली और मानसिक तनाव।
आयुर्वेद में यकृत को पित्त का मुख्य स्थान माना गया है। जब पित्त असंतुलित होता है, कफ बढ़ जाता है और अग्नि कमजोर पड़ जाती है, तब मेद धातु पच नहीं पाती और चरबी यकृत में जमा होने लगती है।
फैटी लिवर के प्रमुख कारणों में शामिल हैं: तला-भुना, मीठा, मैदा, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, देर रात का भोजन, तनाव, कम नींद, व्यायाम की कमी, पेट और शरीर पर चर्बी, मोटापा और शराब का सेवन।
इसके लक्षणों में दाईं तरफ पेट में भारीपन, गैस, अपच, मितली, भूख में परिवर्तन, थकान, सुस्ती, सुबह पेट भारी होना, जीभ पर सफेद परत और पेट पर चर्बी की वृद्धि शामिल है।
इससे बचने के लिए अनहेल्दी फूड, देर रात का भोजन और शराब से दूर रहना चाहिए। हल्का, गरम और पचने में आसान भोजन जैसे मूंग दाल, लौकी, तोरी, परवल, पालक, हल्दी, जीरा, धनिया, सौंफ, छाछ और भुना जीरा लेना चाहिए। पपीता, सेब और गुनगुना पानी भी फायदेमंद हैं। योग और हल्की कसरत भी आवश्यक हैं। सुबह धूप में 15 मिनट बैठना, भोजन के बाद वज्रासन, अनुलोम-विलोम और 4-6 सूर्य नमस्कार करना चाहिए। रात जल्दी सोना अनिवार्य है।
आयुर्वेदिक औषधियों में भूमि आमला रस, कलमेघ चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, पुनर्नवा चूर्ण और एलोवेरा रस बेहद लाभकारी हैं, लेकिन इनका उपयोग योग्य वैद्य की सलाह से ही करना चाहिए।
कुछ सरल घरेलू नुस्खों में जीरा, धनिया, सौंफ का पानी, लौकी सूप, नींबू जल, अलसी के बीज, अदरक रस और हल्दी शामिल हैं। ये पाचन में सुधार करते हैं, यकृत पर भार कम करते हैं और सूजन घटाते हैं।
याद रखें, फैटी लिवर एक चेतावनी है कि हमें अपनी जीवनशैली में सुधार करने की आवश्यकता है। रोजाना छोटे-छोटे बदलाव ही बड़े परिणाम ला सकते हैं। हल्का भोजन, पर्याप्त पानी, सही नींद, हल्की कसरत और मानसिक शांति यकृत को स्वस्थ बनाए रखते हैं।