AI-आधारित दवा विकास के लिए TDB ने पेप्ट्रिस को दी ₹86 करोड़ की सहायता, 4 बीमारियों पर होगा काम
सारांश
मुख्य बातें
टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने 12 अक्टूबर 2026 को पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित दवा विकास कार्यक्रम के लिए ₹86 करोड़ की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत आने वाले TDB ने यह राशि रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड के तहत जारी की है। ₹172 करोड़ की कुल लागत वाली इस परियोजना में सरकार आधा हिस्सा वहन करेगी।
वीगर कार्यक्रम: क्या है यह परियोजना
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना का नाम 'वीगर: एडवांसिंग एआई-डिस्कवर्ड मॉलीक्यूल्स फ्रॉम बेंच टू क्लीनिक' रखा गया है। इसका उद्देश्य AI की सहायता से खोजे गए चार संभावित दवा उम्मीदवारों को टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल TRL-4 से TRL-6 तक पहुँचाना है। इस प्रक्रिया में प्री-क्लिनिकल विकास, वैज्ञानिक वैलिडेशन और क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी शामिल है।
गौरतलब है कि वित्तीय सहायता ऑप्शनली कन्वर्टिबल डेट (OCD) के रूप में दी जाएगी, जो सरकारी वित्तपोषण का एक संरचित रूप है और निवेश की जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
किन बीमारियों पर होगा शोध
यह कार्यक्रम उन बीमारियों को लक्षित करता है जहाँ अभी भी प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है। परियोजना में निम्नलिखित चार दवा उम्मीदवार शामिल हैं:
PEPR111 — न्यूरोमस्कुलर विकार और कैंसर के लिए; PEPRX101 — बाल झड़ने की समस्या (एलोपेसिया) के लिए; PEPR202 — न्यूरोपैथी के लिए; और PEPR112 — ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लिए। ये सभी दुर्लभ या गंभीर बीमारियाँ हैं जिनके लिए वैश्विक स्तर पर सीमित उपचार विकल्प उपलब्ध हैं।
तीन वर्षों में क्या-क्या होगा
तीन वर्ष की इस परियोजना में उन्नत प्री-क्लिनिकल अध्ययन, इन्वेस्टिगेशनल न्यू ड्रग (IND) से संबंधित परीक्षण, फॉर्मूलेशन विकास और क्लिनिकल ट्रायल की प्रारंभिक तैयारी शामिल होगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये सभी गतिविधियाँ नियामकीय और वैज्ञानिक आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित की जाएंगी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार बायोटेक्नोलॉजी और AI-सक्षम स्वास्थ्यसेवा को अपनी नवाचार नीति का केंद्र बना रही है। मंत्रालय का मानना है कि यह परियोजना AI-आधारित खोज और वास्तविक क्लिनिकल विकास के बीच की महत्वपूर्ण खाई को पाटने में सहायक होगी।
विशेषज्ञ और कंपनी की राय
TDB सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि फार्मास्युटिकल अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग नई दवाओं की खोज और विकास की प्रक्रिया को बदलने की क्षमता रखता है। उन्होंने जोड़ा कि संभावनाशील खोजों को वास्तविक दवाओं में बदलने के लिए निरंतर निवेश और वैज्ञानिक सत्यापन अनिवार्य है।
पेप्ट्रिस के प्रतिनिधि के अनुसार, RDI फंड का यह समर्थन कंपनी को महत्वपूर्ण प्री-क्लिनिकल चरणों को पूरा करने और AI से खोजे गए अणुओं को तेज़ी से क्लिनिकल विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगा। कंपनी ने बताया कि उनका मॉडल AI-आधारित खोज, प्रयोगात्मक सत्यापन और स्थापित दवा विकास प्रक्रियाओं का संयोजन है।
भारत की फार्मा और AI क्षमता के लिए मायने
भारत पहले से ही वैश्विक जेनेरिक दवा बाज़ार में अग्रणी स्थान रखता है, और AI-संचालित दवा खोज इस क्षेत्र में अगली बड़ी छलाँग मानी जा रही है। वीगर कार्यक्रम की सफलता न केवल पेप्ट्रिस के लिए, बल्कि भारत के समग्र बायोटेक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक मिसाल बन सकती है। अगले तीन वर्षों में परियोजना के परिणाम यह तय करेंगे कि AI-आधारित दवा विकास में भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कहाँ खड़ा होता है।