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फार्मा PLI योजना: मार्च 2026 तक ₹6,659 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी, थोक दवाओं में देरी की बाधा

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फार्मा PLI योजना: मार्च 2026 तक ₹6,659 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी, थोक दवाओं में देरी की बाधा

सारांश

केंद्र सरकार ने संसद में खुलासा किया कि फार्मा PLI के लिए स्वीकृत ₹15,000 करोड़ में से मार्च 2026 तक केवल ₹6,659 करोड़ जारी हुए हैं, जबकि थोक दवाओं में ₹6,940 करोड़ के परिव्यय में से मात्र ₹87.70 करोड़ वितरित हो पाए — किण्वन प्रक्रिया और पर्यावरण मंजूरी की बाधाएँ बड़ी वजह।

मुख्य बातें

फार्मास्युटिकल PLI योजना के ₹15,000 करोड़ के परिव्यय में से मार्च 2026 तक ₹6,659 करोड़ जारी।
थोक दवा PLI में ₹6,940 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले केवल ₹87.70 करोड़ वितरित — मात्र 1.26%।
देरी के कारण: भूमि अधिग्रहण , पर्यावरण मंजूरी , उच्च उपयोगिता लागत और किण्वन-आधारित उत्पादन की लंबी अवधि ।
चिकित्सा उपकरण PLI के तहत ₹266.64 करोड़ वितरित।
PMBJP के तहत पिछले दो वर्षों में कुल ₹4,274.66 करोड़ की जेनेरिक दवा बिक्री।

केंद्र सरकार ने 7 अगस्त 2026 को लोकसभा में बताया कि फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना के तहत मार्च 2026 तक ₹6,659 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी संसद को दी।

योजना का वित्तीय ढाँचा

फार्मास्युटिकल सेक्टर की PLI योजना वित्त वर्ष 2022-23 में शुरू हुई थी। इसके लिए स्वीकृत कुल वित्तीय परिव्यय ₹15,000 करोड़ है, जिसमें से अब तक ₹6,659 करोड़ — यानी लगभग 44% — जारी किए जा चुके हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि योजना क्रियान्वयन की गति धीमी रही है।

थोक दवाओं (Bulk Drugs) के लिए अलग PLI योजना भी चल रही है, जिसके तहत ₹6,940 करोड़ के कुल परिव्यय में से मार्च 2026 तक केवल ₹87.70 करोड़ ही वितरित हो पाए हैं — कुल राशि का मात्र 1.26%।

थोक दवा PLI में देरी के कारण

मंत्री पटेल ने थोक दवाओं की PLI परियोजनाओं में आई बाधाओं का विस्तार से उल्लेख किया। इनमें भूमि अधिग्रहण में देरी, पर्यावरण मंजूरी की जटिल प्रक्रिया, उच्च उपयोगिता लागत, और किण्वन (Fermentation) आधारित थोक औषधियों के निर्माण में लगने वाली लंबी उत्पादन अवधि प्रमुख हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि रासायनिक संश्लेषण के विपरीत, किण्वन प्रक्रिया जीवित कोशिकाओं की जैविक गतिविधि पर निर्भर होती है, जिनकी वृद्धि स्वाभाविक रूप से धीमी होती है। चूँकि प्रोत्साहन राशि उत्पादों की वास्तविक बिक्री से जुड़ी है, परियोजना शुरू होने में देरी का सीधा असर निधि वितरण पर पड़ा है।

चिकित्सा उपकरण PLI और जनऔषधि योजना

सरकार ने संसद को यह भी बताया कि चिकित्सा उपकरणों के लिए PLI योजना के तहत मार्च 2026 तक ₹266.64 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं।

इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के अंतर्गत पिछले दो वित्त वर्षों में अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर कुल बिक्री ₹4,274.66 करोड़ रही। इसमें वित्त वर्ष 2024-25 में ₹2,022.47 करोड़ और वित्त वर्ष 2025-26 में ₹2,252.19 करोड़ की बिक्री शामिल है — जो साल-दर-साल वृद्धि का संकेत देती है।

आम जनता पर असर

फार्मा PLI योजना का उद्देश्य भारत को दवा निर्माण में आत्मनिर्भर बनाना और आयात पर निर्भरता घटाना है। गौरतलब है कि भारत थोक दवाओं के लिए बड़े पैमाने पर चीन पर निर्भर रहा है, और यह योजना उसी निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है।

जनऔषधि केंद्रों के ज़रिए सस्ती जेनेरिक दवाओं की बढ़ती बिक्री आम नागरिकों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी कम कीमत पर दवाएँ उपलब्ध करा रही है। आने वाले वित्त वर्ष में PLI परियोजनाओं के पूर्ण उत्पादन में आने के बाद प्रोत्साहन वितरण में तेज़ी आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

940 करोड़ के परिव्यय के मुकाबले केवल ₹87.70 करोड़ का वितरण — यानी 1% से भी कम — यह संकेत देता है कि महत्वाकांक्षी आत्मनिर्भरता लक्ष्य और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच गहरी खाई है। किण्वन-आधारित उत्पादन की जटिलताएँ पहले से ज्ञात थीं, फिर भी परियोजना डिज़ाइन में इन्हें पर्याप्त रूप से नहीं समेटा गया। जब तक भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रियाएँ तेज़ नहीं होतीं, PLI का वास्तविक प्रभाव कागज़ों तक सीमित रहने का जोखिम है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फार्मास्युटिकल PLI योजना के तहत अब तक कितनी राशि जारी हुई है?
मार्च 2026 तक फार्मास्युटिकल PLI योजना के तहत ₹6,659 करोड़ जारी किए जा चुके हैं, जो कुल ₹15,000 करोड़ के परिव्यय का लगभग 44% है। यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में दी।
थोक दवाओं की PLI योजना में वितरण इतना कम क्यों है?
थोक दवाओं की PLI में ₹6,940 करोड़ के परिव्यय के मुकाबले केवल ₹87.70 करोड़ जारी हुए हैं। इसकी मुख्य वजहें हैं — भूमि अधिग्रहण में देरी, पर्यावरण मंजूरी की जटिलता, उच्च उपयोगिता लागत और किण्वन-आधारित उत्पादन की स्वाभाविक रूप से लंबी अवधि।
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना की बिक्री कितनी रही?
PMBJP के तहत पिछले दो वित्त वर्षों में MRP पर कुल ₹4,274.66 करोड़ की बिक्री हुई। वित्त वर्ष 2024-25 में ₹2,022.47 करोड़ और वित्त वर्ष 2025-26 में ₹2,252.19 करोड़ की बिक्री दर्ज की गई।
चिकित्सा उपकरण PLI योजना का क्या हाल है?
चिकित्सा उपकरणों के लिए PLI योजना के तहत मार्च 2026 तक ₹266.64 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं। यह जानकारी भी संसद में दी गई।
फार्मा PLI योजना कब शुरू हुई और इसका उद्देश्य क्या है?
फार्मास्युटिकल सेक्टर की PLI योजना वित्त वर्ष 2022-23 में शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य भारत में दवा निर्माण को बढ़ावा देना, आयात निर्भरता घटाना और घरेलू उत्पादन क्षमता को मज़बूत करना है।
राष्ट्र प्रेस
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