फार्मा PLI योजना: मार्च 2026 तक ₹6,659 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी, थोक दवाओं में देरी की बाधा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 7 अगस्त 2026 को लोकसभा में बताया कि फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना के तहत मार्च 2026 तक ₹6,659 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी संसद को दी।
योजना का वित्तीय ढाँचा
फार्मास्युटिकल सेक्टर की PLI योजना वित्त वर्ष 2022-23 में शुरू हुई थी। इसके लिए स्वीकृत कुल वित्तीय परिव्यय ₹15,000 करोड़ है, जिसमें से अब तक ₹6,659 करोड़ — यानी लगभग 44% — जारी किए जा चुके हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि योजना क्रियान्वयन की गति धीमी रही है।
थोक दवाओं (Bulk Drugs) के लिए अलग PLI योजना भी चल रही है, जिसके तहत ₹6,940 करोड़ के कुल परिव्यय में से मार्च 2026 तक केवल ₹87.70 करोड़ ही वितरित हो पाए हैं — कुल राशि का मात्र 1.26%।
थोक दवा PLI में देरी के कारण
मंत्री पटेल ने थोक दवाओं की PLI परियोजनाओं में आई बाधाओं का विस्तार से उल्लेख किया। इनमें भूमि अधिग्रहण में देरी, पर्यावरण मंजूरी की जटिल प्रक्रिया, उच्च उपयोगिता लागत, और किण्वन (Fermentation) आधारित थोक औषधियों के निर्माण में लगने वाली लंबी उत्पादन अवधि प्रमुख हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि रासायनिक संश्लेषण के विपरीत, किण्वन प्रक्रिया जीवित कोशिकाओं की जैविक गतिविधि पर निर्भर होती है, जिनकी वृद्धि स्वाभाविक रूप से धीमी होती है। चूँकि प्रोत्साहन राशि उत्पादों की वास्तविक बिक्री से जुड़ी है, परियोजना शुरू होने में देरी का सीधा असर निधि वितरण पर पड़ा है।
चिकित्सा उपकरण PLI और जनऔषधि योजना
सरकार ने संसद को यह भी बताया कि चिकित्सा उपकरणों के लिए PLI योजना के तहत मार्च 2026 तक ₹266.64 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं।
इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के अंतर्गत पिछले दो वित्त वर्षों में अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर कुल बिक्री ₹4,274.66 करोड़ रही। इसमें वित्त वर्ष 2024-25 में ₹2,022.47 करोड़ और वित्त वर्ष 2025-26 में ₹2,252.19 करोड़ की बिक्री शामिल है — जो साल-दर-साल वृद्धि का संकेत देती है।
आम जनता पर असर
फार्मा PLI योजना का उद्देश्य भारत को दवा निर्माण में आत्मनिर्भर बनाना और आयात पर निर्भरता घटाना है। गौरतलब है कि भारत थोक दवाओं के लिए बड़े पैमाने पर चीन पर निर्भर रहा है, और यह योजना उसी निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है।
जनऔषधि केंद्रों के ज़रिए सस्ती जेनेरिक दवाओं की बढ़ती बिक्री आम नागरिकों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी कम कीमत पर दवाएँ उपलब्ध करा रही है। आने वाले वित्त वर्ष में PLI परियोजनाओं के पूर्ण उत्पादन में आने के बाद प्रोत्साहन वितरण में तेज़ी आने की संभावना है।