गुजरात में स्तन कैंसर: जीसीआरआई में 2025 में 1,541 नए मामले, महिलाओं में 31.2% कैंसर इसी का
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने 18 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व स्तन कैंसर अनुसंधान दिवस की पूर्व संध्या पर सोमवार को राज्य की महिलाओं से नियमित स्तन कैंसर जांच कराने की अपील की। राज्य के आंकड़ों के अनुसार, अहमदाबाद स्थित गुजरात कैंसर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीसीआरआई) में 2025 में स्तन कैंसर के 1,541 नए मामले दर्ज किए गए — और यह बीमारी गुजरात की महिलाओं में होने वाले कुल कैंसर मामलों का 31.2 प्रतिशत है।
जीसीआरआई के आंकड़े: किस आयु वर्ग में सबसे अधिक मामले
जीसीआरआई के 2015–2025 के दीर्घकालिक आंकड़ों से पता चलता है कि 41 से 50 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में सर्वाधिक 469 मामले सामने आए, इसके बाद 51 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 436 मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा इस ओर संकेत करता है कि मध्यम आयु की महिलाएं इस बीमारी की सबसे अधिक चपेट में हैं।
2025 में जीसीआरआई ने कुल 26,812 कैंसर रोगियों को पंजीकृत किया, जिनमें से 17,665 गुजरात के और 9,147 मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से आए। यह संस्थान की क्षेत्रीय महत्ता को रेखांकित करता है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर का परिदृश्य
ग्लोबोकैन 2022 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में उस वर्ष कैंसर के कुल 14,13,316 नए मामले दर्ज हुए। इनमें स्तन कैंसर भारतीय महिलाओं में सबसे प्रचलित कैंसर रहा, जिसके 1,92,020 नए मामले सामने आए — यानी महिलाओं में होने वाले सभी कैंसरों का 26.6 प्रतिशत।
गुजरात में स्थिति राष्ट्रीय औसत से अधिक गंभीर है। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुमानों के अनुसार, राज्य में 2024 में कैंसर के लगभग 77,205 मामले होने का अनुमान लगाया गया था। इनमें महिलाओं के कैंसर मामलों में स्तन कैंसर की हिस्सेदारी 31.2 प्रतिशत — राष्ट्रीय 26.6% से करीब पाँच प्रतिशत अधिक — चिंताजनक है।
स्वास्थ्य मंत्री की अपील और सरकार की प्रतिबद्धता
मंत्री पानसेरिया ने कहा, 'कैंसर के खिलाफ लड़ाई में शीघ्र निदान और जागरूकता सबसे बड़े हथियार हैं। अगर स्तन कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो यह पूरी तरह से ठीक हो सकता है।' उन्होंने 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को नियमित रूप से स्वयं स्तन परीक्षण करने और 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को डिजिटल मैमोग्राफी जांच कराने की सलाह दी।
उन्होंने यह भी आग्रह किया कि शरीर में किसी असामान्य गांठ या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत निकटतम सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या जीसीआरआई से संपर्क किया जाए। राज्य सरकार ने नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और किफायती कैंसर उपचार उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।
जीसीआरआई: एक परिचय
1972 में स्थापित जीसीआरआई सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत संचालित होने वाला एक आदर्श राज्य कैंसर संस्थान बन चुका है। पाँच दशकों में यह संस्थान न केवल गुजरात बल्कि समूचे पश्चिम-मध्य भारत के कैंसर रोगियों के लिए एक प्रमुख रेफरल केंद्र के रूप में उभरा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते मामलों के पीछे जागरूकता में वृद्धि के कारण अधिक जांच और बेहतर रिपोर्टिंग भी एक कारण हो सकती है — लेकिन वास्तविक रोकथाम के लिए स्क्रीनिंग को जमीनी स्तर तक पहुँचाना अनिवार्य है।