दवा लिफाफों पर हिंदी विवाद: तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री अरुणराज का डीएमके पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. के.जी. अरुणराज ने 7 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि करूर और कोयंबटूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में दवाइयों के लिफाफों पर हिंदी के इस्तेमाल को लेकर विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) राजनीतिक लाभ के लिए भाषाई भावनाओं का दोहन कर रही है। उन्होंने दावा किया कि विवादित लिफाफे वास्तव में डीएमके सरकार के कार्यकाल में ही तैयार और स्वीकृत किए गए थे।
मुख्य आरोप और प्रतिआरोप
अरुणराज ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि जैसे ही यह मामला सरकार के संज्ञान में आया, दोनों अस्पतालों में तत्काल विवादित लिफाफों का उपयोग बंद करा दिया गया। उनके अनुसार, मौजूदा सरकार ने पिछली सरकार से प्राप्त लिफाफों के डिजाइन या भाषा में कोई परिवर्तन नहीं किया था — इसलिए इसकी जिम्मेदारी सत्तारूढ़ दल पर नहीं बनती।
मंत्री ने आरोप लगाया कि डीएमके खरीद से जुड़े तथ्यों को छिपाकर जनता को गुमराह कर रही है और उनके विरोध को राजनीतिक लाभ के लिए भाषाई संवेदनशीलता का उपकरण बनाने की कोशिश बताया।
करूर अस्पताल: लिफाफों की खरीद का विवरण
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि करूर सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आमतौर पर दवाइयों के लिफाफे केंद्रीय जेल की ओर से उपलब्ध कराए जाते हैं, जिन पर खुराक संबंधी निर्देश केवल तमिल भाषा में होते हैं। दिसंबर 2025 में जेल-आपूर्ति में कमी के कारण तत्काल 4 लाख लिफाफों का ऑर्डर ईरोड जिला प्रिंटिंग इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव सोसाइटी को दिया गया था।
अरुणराज के अनुसार, यह ऑर्डर 31 दिसंबर 2025 को डीएमके सरकार के कार्यकाल में दिया गया और जनवरी 2026 में, जब वही सरकार सत्ता में थी, मरीजों को ये लिफाफे वितरित किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि तब डीएमके ने कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई।
कोयंबटूर अस्पताल: तीन साल पुरानी मंजूरी
कोयंबटूर सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मामले में मंत्री ने दावा किया कि विवादित प्रारूप वाले लिफाफे चिंतामणि कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से छपवाए गए थे। इसके लिए प्रशासनिक मंजूरी करीब तीन वर्ष पहले डीएमके सरकार के कार्यकाल में दी गई थी। मंत्री ने तर्क दिया कि जिस प्रारूप को पूर्ववर्ती सरकार ने स्वीकृति दी, उसी के लिए मौजूदा सरकार को दोषी ठहराना तार्किक नहीं है।
भाषा नीति पर सरकार का रुख
अरुणराज ने तमिलनाडु की दो-भाषा नीति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि तमिलगा वेत्री कझगम भाषाई मुद्दों पर किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा सरकार ने केवल स्टॉक की तत्काल जरूरत पूरी करने के लिए लिफाफे खरीदे थे — न तो डिजाइन बदला गया और न ही भाषा में कोई परिवर्तन किया गया।
मंत्री ने डीएमके से अपील की कि वह रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाए और भाषाई भावनाओं को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल न करे। गौरतलब है कि तमिलनाडु में हिंदी-विरोध एक ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रहा है, जहाँ भाषा की राजनीति चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में सक्षम रही है।
आगे क्या होगा
सरकार ने विवादित लिफाफों का उपयोग बंद करने का आदेश दे दिया है। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब तमिलनाडु में भाषा नीति को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच तनाव पहले से बना हुआ है। खरीद और वितरण के दस्तावेज़ी साक्ष्यों के आधार पर यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।