2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

3 अगस्त 1994: एम्स में देश का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट, जिसने बदली अंगदान की तस्वीर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
3 अगस्त 1994: एम्स में देश का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट, जिसने बदली अंगदान की तस्वीर

सारांश

3 अगस्त 1994 को एम्स दिल्ली में डॉ. पी. वेणुगोपाल की अगुवाई में 20 विशेषज्ञों की टीम ने 59 मिनट में देश का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया। यह तारीख आज राष्ट्रीय हृदय प्रत्यारोपण दिवस के रूप में मनाई जाती है और भारत में अंगदान आंदोलन की आधारशिला मानी जाती है।

मुख्य बातें

3 अगस्त 1994 को एम्स, नई दिल्ली में भारत का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट संपन्न हुआ।
वेणुगोपाल के नेतृत्व में करीब 20 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 59 मिनट में पूरी की।
मरीज देवी राम , आयु 42 वर्ष , की सर्जरी पूरी तरह सफल रही।
7 जुलाई 1994 को मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह ऑपरेशन संभव हुआ।
2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 3 अगस्त को राष्ट्रीय हृदय प्रत्यारोपण दिवस घोषित किया।
उसी वर्ष ORBO (ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन) को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की घोषणा की गई।

3 अगस्त 1994 भारतीय चिकित्सा इतिहास में एक निर्णायक तारीख है। इसी दिन नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में देश का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट संपन्न हुआ, जिसने लाखों हृदय रोगियों के लिए एक नई संभावना का द्वार खोला। वरिष्ठ कार्डियक सर्जन डॉ. पी. वेणुगोपाल के नेतृत्व में की गई यह सर्जरी भारत की चिकित्सा क्षमता की अंतरराष्ट्रीय पहचान बनी।

पृष्ठभूमि: कानूनी बाधा से ऐतिहासिक सफलता तक

1994 से पहले हार्ट ट्रांसप्लांट की ज़रूरत वाले भारतीय मरीजों के पास विदेश जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। यह उपचार अत्यंत महंगा था और अधिकांश परिवारों की पहुँच से परे था। भारतीय चिकित्सक इस दिशा में प्रयासरत थे, लेकिन तकनीकी और कानूनी अड़चनें रास्ते में थीं।

निर्णायक बदलाव तब आया जब 7 जुलाई 1994 को मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। इस कानून ने भारत में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण को वैधानिक आधार प्रदान किया। इसके ठीक सत्ताईस दिन बाद एम्स की टीम ने इतिहास रच दिया।

मुख्य घटनाक्रम: 59 मिनट की जटिल सर्जरी

3 अगस्त 1994 को डॉ. पी. वेणुगोपाल के नेतृत्व में करीब 20 विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने 42 वर्षीय मरीज देवी राम का हार्ट ट्रांसप्लांट किया। अपने समय के लिहाज़ से अत्यंत जटिल मानी जाने वाली यह पूरी प्रक्रिया लगभग 59 मिनट में सफलतापूर्वक पूरी हुई। यह सर्जरी न केवल तकनीकी दृष्टि से बल्कि मनोबल की दृष्टि से भी भारतीय चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी।

अंगदान जागरूकता पर असर

देवी राम की सफल सर्जरी का प्रभाव केवल एक मरीज की जान बचाने तक सीमित नहीं रहा। इसने पूरे देश में अंगदान को लेकर सामाजिक सोच बदलने का काम किया। लोगों में यह चेतना जागी कि एक व्यक्ति के अंगदान से अनेक जीवन बचाए जा सकते हैं। धीरे-धीरे देश के कई अस्पतालों में हार्ट ट्रांसप्लांट की सुविधाएँ विकसित होने लगीं।

राष्ट्रीय हृदय प्रत्यारोपण दिवस की स्थापना

इस ऐतिहासिक उपलब्धि को राष्ट्रीय सम्मान देते हुए 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 3 अगस्त को राष्ट्रीय हृदय प्रत्यारोपण दिवस घोषित किया। पहली बार यह दिवस प्रधानमंत्री आवास पर मनाया गया, जिसमें सफल हार्ट ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। इस कार्यक्रम में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज और एम्स के निदेशक डॉ. पी. वेणुगोपाल भी उपस्थित थे।

उसी कार्यक्रम में डॉ. वेणुगोपाल के प्रस्ताव पर ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन (ORBO) को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करने की घोषणा की गई, जिसने देश में अंगदान की व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में नींव रखी।

आज की स्थिति और आगे की राह

आज भारत उन देशों में शामिल है जहाँ हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सर्जरियाँ नियमित रूप से सफलतापूर्वक की जाती हैं। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित चिकित्सक और बेहतर स्वास्थ्य अवसंरचना की बदौलत हज़ारों मरीजों को नया जीवन मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएँ, तो हर वर्ष हज़ारों और जीवन बचाए जा सकते हैं — और यही 3 अगस्त 1994 की असली विरासत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

केवल कानूनी अनुमति की प्रतीक्षा थी। तीन दशक बाद भी अंगदान दर अपेक्षाकृत कम है, जो बताता है कि जागरूकता अभियान और संस्थागत ढाँचे को और मज़बूत करने की ज़रूरत है। इस तारीख को याद करना केवल इतिहास का उत्सव नहीं, बल्कि उस अधूरे काम की याद दिलाना भी है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट कब और कहाँ हुआ था?
भारत का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट 3 अगस्त 1994 को नई दिल्ली स्थित एम्स में हुआ था। यह सर्जरी डॉ. पी. वेणुगोपाल के नेतृत्व में करीब 20 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने लगभग 59 मिनट में पूरी की।
भारत के पहले हार्ट ट्रांसप्लांट के मरीज कौन थे?
42 वर्षीय देवी राम भारत के पहले सफल हार्ट ट्रांसप्लांट के मरीज थे। उनकी सर्जरी 3 अगस्त 1994 को एम्स, नई दिल्ली में की गई और यह पूरी तरह सफल रही।
मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 क्या है और इसका क्या महत्व है?
मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम को 7 जुलाई 1994 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली, जिसने भारत में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण को कानूनी आधार दिया। इसी कानून के पारित होने के बाद एम्स की टीम ने देश का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट करना संभव हो पाया।
राष्ट्रीय हृदय प्रत्यारोपण दिवस कब और किसने घोषित किया?
2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 3 अगस्त को राष्ट्रीय हृदय प्रत्यारोपण दिवस घोषित किया। पहली बार यह दिवस प्रधानमंत्री आवास पर मनाया गया, जिसमें तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज और एम्स के निदेशक डॉ. पी. वेणुगोपाल भी उपस्थित थे।
ORBO क्या है और इसकी स्थापना कैसे हुई?
ORBO यानी ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन एक संस्था है जो अंगदान की व्यवस्था को समन्वित करती है। 2003 में राष्ट्रीय हृदय प्रत्यारोपण दिवस के अवसर पर डॉ. पी. वेणुगोपाल के प्रस्ताव पर इसे राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की घोषणा की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले