कसौली: केंद्रीय अनुसंधान संस्थान में जेपी नड्डा ने टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया वैक्सीन का शुभारंभ किया
सारांश
Key Takeaways
- टीडी वैक्सीन का शुभारंभ स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
- केंद्रीय अनुसंधान संस्थान 55 लाख खुराक प्रदान करेगा।
- भारत ने 99 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज हासिल किया है।
- स्वदेशी टीके वैश्विक स्वास्थ्य में भारत की स्थिति को मजबूत करेंगे।
- कोविड-19 टीकों का विकास तेजी से हुआ।
कसौली, 21 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि के रूप में, हिमाचल प्रदेश के कसौली में स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान ने स्वदेशी रूप से निर्मित टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का शुभारंभ किया है।
इस टीडी वैक्सीन के शुभारंभ समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी उपस्थित थे। उन्होंने इस पहल को सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। गौर करने वाली बात यह है कि केंद्रीय अनुसंधान संस्थान ने पहली बार स्वदेशी टिटनेस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का शुभारंभ किया है।
इस अवसर पर, जेपी नड्डा ने केंद्रीय अनुसंधान संस्थान की टीम की सराहना की और कहा कि यह स्वदेशी टीडी वैक्सीन स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस वैक्सीन के शुभारंभ से भारत ने 99 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज प्राप्त कर लिया है, जिसे वैश्विक दृष्टि में स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
ज्ञात हो कि टीडी वैक्सीन के औपचारिक शुभारंभ के साथ, केंद्रीय अनुसंधान संस्थान अप्रैल 2026 तक सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत 55 लाख खुराक प्रदान करेगा। इसके साथ ही, टीडी वैक्सीन के उत्पादन को धीरे-धीरे वृद्धि दी जाएगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य और औषधि क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी राज्यों की सरकारें अथक प्रयास कर रही हैं। स्वदेशी टीडी वैक्सीन का शुभारंभ स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा कि भारत पहले ही 'विश्व का औषधालय' के रूप में जाना जाता है और हमारे देश ने उभरते टीका निर्माताओं में से एक का स्थान प्राप्त किया है। इसके साथ ही, भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियामक प्रणालियों में तीसरा स्तर प्राप्त किया है, जो हमारे लिए गर्व की बात है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने याद दिलाया कि ऐतिहासिक रूप से, टीकों और दवाओं के विकास में लंबा समय लगता था। टिटनेस के टीके का विकास विश्व स्तर पर दशकों का समय लेता था, जबकि भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान केवल नौ महीनों में दो स्वदेशी टीके विकसित किए और 220 करोड़ से अधिक खुराकें प्रदान कीं। उन्होंने यह भी बताया कि कोविड-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र डिजिटल रूप से वितरित किए गए, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में भारत के डिजिटल परिवर्तन का संकेत है।