क्या मीठा छोड़ना सही है? जानें आयुर्वेद में मीठे का महत्व
सारांश
Key Takeaways
- संतुलित मात्रा में मीठा सेवन आवश्यक है।
- मीठा खाने का सबसे अच्छा समय भोजन से पहले है।
- घर पर बने मीठे पदार्थ अधिक फायदेमंद होते हैं।
- पैक्ड मीठे खाद्य पदार्थों से बचें।
- मीठी चीजों की अधिकता से वजन और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।
नई दिल्ली, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान समय में 'नो शुगर' और 'लो सोडियम' आहार की लोकप्रियता बढ़ रही है, लेकिन यह जानना जरूरी है कि मीठा और नमक दोनों ही हमारे शरीर के लिए आवश्यक हैं। बस, इनका सेवन संतुलित मात्रा में होना चाहिए।
फिटनेस और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण लोग मीठे से दूर होने लगे हैं। 'नो शुगर' या 'लो शुगर' आहार का चलन भी तेजी से बढ़ा है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार, मीठे का सेवन पूरी तरह से छोड़ना उचित नहीं है। शरीर के संतुलन और ऊर्जा के लिए मीठा सीमित मात्रा में जरूरी होता है। क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में मीठे का सेवन कब और कितना किया जाना चाहिए?
समय पर लिया गया कोई भी आहार हमारे शरीर के लिए दवा के समान कार्य करता है। भोजन से लेकर पानी तक का एक निश्चित समय होता है, और जब सभी चीजें प्राकृतिक तरीके से की जाएं, तो शरीर का संतुलन बना रहता है। उसी तरह, अगर मीठा समय और सही तरीके से खाया जाए तो यह शक्ति प्रदान करता है, मन को प्रसन्न रखता है और पाचन को बेहतर बनाता है। हालांकि, अधिक मीठा या गलत समय पर मीठा खाने से मोटापा, आलस्य और कई बीमारियां हो सकती हैं।
मीठा हमारे शरीर में तुरंत ऊर्जा का संचार करता है और भूख को संतुष्ट करता है। अक्सर भोजन के बाद लोगों को मीठा खाने की इच्छा होती है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार, मीठा खाने से पहले लेना चाहिए। यदि मीठा खाने का मन करे तो घर पर बने हलवे, गुड़ या खजूर से बनी मिठाई का सेवन किया जा सकता है। इसके साथ ही, प्राकृतिक मीठे फलों का सेवन भी फायदेमंद होता है।
मीठे की तलब को शांत करने के लिए आइसक्रीम या पैक्ड खाद्य पदार्थों से बचें। ये रक्त में शर्करा की मात्रा को तेजी से बढ़ाते हैं और मधुमेह के रोगियों के लिए यह खतरनाक हो सकता है। साथ ही, खाने के बाद मीठा खाने से बचें, क्योंकि यह कफ दोष को बढ़ा सकता है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि प्राकृतिक मीठे फलों और घर पर बने मीठे पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करें। मीठे की अधिकता वजन बढ़ने, सूजन, मधुमेह, आलस्य और कफ से जुड़ी परेशानियों का कारण बन सकती है।