माइग्रेन से राहत के लिए आयुष मंत्रालय ने बताए 6 कारगर योगासन, विश्व योग दिवस से पहले जारी की सलाह

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माइग्रेन से राहत के लिए आयुष मंत्रालय ने बताए 6 कारगर योगासन, विश्व योग दिवस से पहले जारी की सलाह

सारांश

आयुष मंत्रालय ने माइग्रेन को नियंत्रित करने के लिए भुजंगासन, पवनमुक्तासन और भ्रामरी प्राणायाम सहित 6 योगासन की सलाह दी है। विश्व योग दिवस (21 जून) से पहले जारी यह सिफारिश दवाओं की जगह दीर्घकालिक योगाभ्यास को प्राथमिकता देने पर ज़ोर देती है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 14 मई 2025 को माइग्रेन के लिए योग को प्राकृतिक समाधान बताया।
विश्व योग दिवस (21 जून) से पहले मंत्रालय का जागरूकता अभियान जारी है।
अनुशंसित आसनों में भुजंगासन, पवनमुक्तासन, मार्जरी आसन, ताड़ासन, भ्रामरी प्राणायाम और शीतली प्राणायाम शामिल हैं।
प्रतिदिन 15-20 मिनट शांत वातावरण में अभ्यास की सलाह; शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना चाहिए।
स्क्रीन टाइम, गलत मुद्रा, अनियमित नींद और तनाव माइग्रेन के प्रमुख ट्रिगर्स बताए गए।

आयुष मंत्रालय ने 14 मई 2025 को माइग्रेन की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए योगाभ्यास को प्राकृतिक और दीर्घकालिक समाधान के रूप में अनुशंसित किया है। विश्व योग दिवस (21 जून) की तैयारियों के तहत मंत्रालय लगातार विभिन्न योगासनों की जानकारी साझा कर रहा है, जिसमें इस बार माइग्रेन-नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया गया है।

माइग्रेन क्या है और यह क्यों होता है

माइग्रेन एक साधारण सिरदर्द से कहीं अधिक जटिल स्नायविक समस्या है। यह तेज दर्द प्रायः सिर के एक तरफ होता है और इसके साथ जी मिचलाना, चक्कर आना, तेज रोशनी तथा तीव्र आवाज़ के प्रति संवेदनशीलता जैसे लक्षण भी देखे जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आज की जीवनशैली में मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने घंटों बैठना, गलत मुद्रा में काम करना, अनियमित नींद और लगातार मानसिक तनाव माइग्रेन के प्रमुख कारण हैं। ये आदतें गर्दन, कंधे और सिर की मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करती हैं, जो धीरे-धीरे माइग्रेन के दौरे को ट्रिगर करती हैं।

आयुष मंत्रालय की सिफारिश — योग क्यों है प्रभावी

आयुष मंत्रालय ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में स्पष्ट किया कि नियमित योगाभ्यास से शरीर की मुद्रा सुधरती है, मांसपेशियों का तनाव घटता है, रक्त संचार बेहतर होता है और मन को गहरी शांति मिलती है। मंत्रालय के अनुसार, दवाओं पर निर्भरता की तुलना में दीर्घकालिक योगाभ्यास माइग्रेन की तीव्रता और आवृत्ति को जड़ से नियंत्रित करने में अधिक सहायक हो सकता है।

माइग्रेन में उपयोगी 6 योगासन और प्राणायाम

भुजंगासन (कोबरा पोज़) रीढ़ की हड्डी को मज़बूत करता है और गर्दन के तनाव को कम करता है। पवनमुक्तासन पेट व कमर के खिंचाव को दूर कर गैस और अपच से राहत दिलाता है, जो माइग्रेन के सहायक कारण बन सकते हैं।

मार्जरी आसन (कैट-काउ पोज़) गर्दन और पीठ की अकड़न दूर करता है। ताड़ासन शरीर की समग्र मुद्रा सुधारता है और एकाग्रता बढ़ाता है। भ्रामरी प्राणायाम मन को तत्काल शांत कर तनाव-जनित सिरदर्द में राहत देता है, जबकि शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडक प्रदान कर माइग्रेन के गर्मी-संबंधी ट्रिगर्स को नियंत्रित करता है।

अभ्यास का सही तरीका और सावधानियाँ

मंत्रालय की सलाह है कि इन आसनों का अभ्यास प्रतिदिन सुबह या शाम के समय शांत वातावरण में 15-20 मिनट करना चाहिए। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही शुरुआत करने की सलाह दी गई है, ताकि गलत मुद्रा से चोट का जोखिम न रहे।

आगे क्या

21 जून को मनाए जाने वाले विश्व योग दिवस तक आयुष मंत्रालय इसी तरह विभिन्न रोगों के लिए योग-आधारित समाधान साझा करता रहेगा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि माइग्रेन के गंभीर मामलों में योगाभ्यास के साथ-साथ चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि योग माइग्रेन का पूरक प्रबंधन हो सकता है, पूर्ण चिकित्सीय विकल्प नहीं। मंत्रालय की इंस्टाग्राम-केंद्रित संचार रणनीति व्यापक जन-जागरूकता के लिए उपयोगी है, परंतु गंभीर माइग्रेन रोगियों को बिना न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह के केवल योग पर निर्भर करने की सिफारिश भ्रामक हो सकती है। सरकारी स्वास्थ्य संचार में 'योग से जड़ से ठीक' जैसे दावों के साथ नैदानिक साक्ष्य का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माइग्रेन के लिए आयुष मंत्रालय ने कौन-से योगासन सुझाए हैं?
आयुष मंत्रालय ने माइग्रेन से राहत के लिए भुजंगासन, पवनमुक्तासन, मार्जरी आसन, ताड़ासन, भ्रामरी प्राणायाम और शीतली प्राणायाम की सिफारिश की है। इन्हें प्रतिदिन 15-20 मिनट शांत वातावरण में करने की सलाह दी गई है।
क्या योग माइग्रेन को पूरी तरह ठीक कर सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योगाभ्यास माइग्रेन की तीव्रता और आवृत्ति को कम करने में सहायक हो सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में चिकित्सक से परामर्श अनिवार्य है। योग को दवाओं के पूर्ण विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पूरक उपाय के रूप में देखना उचित है।
भ्रामरी प्राणायाम माइग्रेन में कैसे मदद करता है?
भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत करता है और तनाव-जनित सिरदर्द में तत्काल राहत देता है। इसकी गुनगुनाहट की ध्वनि तंत्रिका तंत्र को शांत करती है, जिससे माइग्रेन के दौरे की तीव्रता कम हो सकती है।
माइग्रेन के योगासन का अभ्यास कब और कैसे करें?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इन आसनों का अभ्यास प्रतिदिन सुबह या शाम के समय शांत वातावरण में 15-20 मिनट करना चाहिए। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में शुरुआत करने की सलाह दी गई है।
आयुष मंत्रालय विश्व योग दिवस से पहले क्यों दे रहा है यह सलाह?
21 जून को मनाए जाने वाले विश्व योग दिवस की तैयारी के तहत आयुष मंत्रालय लोगों को योग से जोड़ने और रोगमुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसी जागरूकता अभियान के तहत मंत्रालय विभिन्न रोगों के लिए योग-आधारित समाधान साझा कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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