नटराजासन से पहले करें ये 7 पूर्वाभ्यास आसन, शरीर को मिलेगी सही तैयारी और चोट से सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
नटराजासन — भगवान शिव के नटराज स्वरूप को समर्पित यह योगासन — शरीर के संतुलन, एकाग्रता और लचीलेपन की परम परीक्षा है। एक पैर पर खड़े होकर पूरे शरीर को पीछे की ओर खींचने वाले इस आसन को बिना उचित तैयारी के करने पर मांसपेशियों में खिंचाव या गंभीर चोट का जोखिम रहता है। इसीलिए योग विशेषज्ञ नटराजासन से पहले 7 पूर्वाभ्यास आसनों का क्रमबद्ध अभ्यास अनिवार्य मानते हैं।
नटराजासन क्यों है विशेष और चुनौतीपूर्ण
नटराजासन एक मध्यम-से-उन्नत स्तर का संतुलन आधारित आसन है, जिसमें एकसाथ पैरों, कूल्हों, कमर, कंधों और छाती में पर्याप्त लचीलापन चाहिए। यह आसन सीधे करने का प्रयास करने पर पीठ के निचले हिस्से, कंधों और जांघों में चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। योग विज्ञान के अनुसार, शरीर को किसी भी कठिन आसन के लिए 'खोलने' की प्रक्रिया को पूर्व-अभ्यास कहा जाता है — और यह चरण उतना ही महत्वपूर्ण है जितना मूल आसन।
सात आवश्यक पूर्वाभ्यास आसन
१. सूर्य नमस्कार — नटराजासन से पहले सूर्य नमस्कार शरीर को संपूर्ण वार्म-अप देता है। इसके १२ चरण एकसाथ मांसपेशियों को सक्रिय करते हैं, लचीलापन बढ़ाते हैं और संतुलन के लिए शरीर को तैयार करते हैं। इसे पूर्वाभ्यास की नींव माना जाता है।
२. वृक्षासन — एक पैर पर संतुलन बनाने की क्षमता विकसित करने का सबसे बुनियादी और प्रभावी अभ्यास वृक्षासन है। नटराजासन की सबसे पहली शर्त — एकपाद संतुलन — इसी आसन से सधती है।
३. आंजनेयासन — यह आसन हिप फ्लेक्सर्स और जांघों के सामने के हिस्से को गहरा स्ट्रेच देता है, जो नटराजासन की गहरी और कठिन मुद्रा के लिए शरीर को पूरी तरह तैयार करता है।
४. धनुरासन — योग विज्ञान में धनुरासन को 'फाउंडेशन बैकबेंड' कहा जाता है। यह कंधों, छाती और जांघों को एकसाथ स्ट्रेच करता है और शरीर को नटराजासन जैसे उन्नत संतुलन वाले आसन के लिए तैयार करता है।
५. भुजंगासन — नटराजासन में एक पैर पर खड़े होकर शरीर को पीछे खींचने के लिए मजबूत पीठ और बेहतर संतुलन अनिवार्य है। भुजंगासन शरीर के पिछले हिस्से को मजबूत कर इस चुनौतीपूर्ण मुद्रा को अधिक सुगम बनाता है।
६. वीरभद्रासन — वीरभद्रासन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, जिससे नटराजासन में पीठ के निचले हिस्से में चोट लगने का जोखिम काफी कम हो जाता है। यह आसन गहरी बैकबेंड स्थिति के लिए शरीर को मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर तैयार करता है।
७. एकपाद राजकपोतासन — यह आसन कूल्हों को खोलता है, जिससे पैर को पीछे और ऊपर की ओर ले जाना स्वाभाविक रूप से आसान हो जाता है। नटराजासन के लिए यह एक अनिवार्य प्रारंभिक आसन माना जाता है।
पूर्वाभ्यास का सही क्रम और सावधानियाँ
विशेषज्ञों के अनुसार इन सातों आसनों को उसी क्रम में करना उचित है जिसमें ये ऊपर दिए गए हैं — सूर्य नमस्कार से शुरू करें और एकपाद राजकपोतासन पर समाप्त करें। प्रत्येक आसन में पर्याप्त समय देना और श्वास-प्रश्वास पर ध्यान रखना आवश्यक है। गर्भवती महिलाओं, पीठ या घुटने की चोट से पीड़ित व्यक्तियों को किसी प्रमाणित योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही यह अभ्यास करना चाहिए।
नियमित अभ्यास से क्या लाभ मिलते हैं
इन सात पूर्वाभ्यास आसनों का नियमित अभ्यास न केवल नटराजासन को साधने में सहायता करता है, बल्कि समग्र शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। पोस्चर में सुधार, एकाग्रता में वृद्धि, कूल्हों और रीढ़ का लचीलापन तथा पैरों की मांसपेशियों की मजबूती इसके प्रमुख लाभ हैं। यह अनुक्रम उन सभी योग साधकों के लिए उपयोगी है जो उन्नत आसनों की ओर क्रमशः आगे बढ़ना चाहते हैं।