गर्दन दर्द से राहत: डेस्क जॉब करने वालों के लिए आयुष मंत्रालय के 4 नेक मूवमेंट
सारांश
Key Takeaways
- आयुष मंत्रालय ने कॉमन योग प्रोटोकॉल में गर्दन की 4 आसान नेक मूवमेंट शामिल की हैं।
- रोज़ाना 5 से 10 मिनट के इन व्यायामों से गर्दन दर्द, जकड़न और मानसिक थकान दूर होती है।
- चार मूवमेंट हैं: फ्लेक्सन-एक्सटेंशन, साइड बेंडिंग, रोटेशन और पूर्ण रोटेशन।
- ये व्यायाम डेस्क जॉब, आईटी और बैंकिंग सेक्टर के कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।
- सभी गतिविधियां धीरे और सावधानी से करनी चाहिए; अत्यधिक दर्द में योग विशेषज्ञ की सलाह ज़रूरी है।
- यह पहल 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले योग को दैनिक जीवन में शामिल करने की व्यापक मुहिम का हिस्सा है।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आयुष मंत्रालय ने उन करोड़ों भारतीयों के लिए एक सरल और कारगर योग समाधान पेश किया है जो घंटों कंप्यूटर या स्मार्टफोन के सामने बैठकर काम करते हैं और गर्दन दर्द, जकड़न व थकान से जूझते हैं। मंत्रालय के कॉमन योग प्रोटोकॉल में शामिल चार नेक मूवमेंट को रोज़ाना मात्र 5 से 10 मिनट करने से गर्दन और कंधों की तकलीफ में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
क्यों होती है गर्दन में जकड़न और दर्द?
आधुनिक जीवनशैली में डेस्क जॉब, वर्क फ्रॉम होम और लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने की आदत ने गर्दन की समस्याओं को महामारी का रूप दे दिया है। आयुष मंत्रालय के विशेषज्ञों के अनुसार, गर्दन की मांसपेशियां खोपड़ी, जबड़े, कंधों की हड्डियों और कॉलरबोन तक फैली होती हैं।
ये मांसपेशियां सिर घुमाने, चबाने, निगलने और सांस लेने जैसी दैनिक क्रियाओं में अहम भूमिका निभाती हैं। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठा रहता है, तो ये मांसपेशियां तनावग्रस्त और अकड़ जाती हैं, जिससे असहनीय दर्द उत्पन्न होता है।
आयुष मंत्रालय के 4 नेक मूवमेंट — स्टेप बाय स्टेप
1. फ्लेक्सन और एक्सटेंशन: गर्दन को धीरे-धीरे आगे की ओर झुकाएं और ठोड़ी को छाती से लगाने का प्रयास करें, फिर सावधानी से पीछे की ओर झुकाएं। यह क्रिया गर्दन की अगली और पिछली मांसपेशियों को खोलती है और तनाव मुक्त करती है।
2. साइड बेंडिंग: गर्दन को दाईं और बाईं दिशा में बारी-बारी झुकाएं। इससे गर्दन की पार्श्व मांसपेशियां लचीली बनती हैं और जकड़न में तत्काल राहत मिलती है।
3. रोटेशन: गर्दन को दाईं और बाईं ओर घुमाएं। यह गतिविधि गर्दन की गतिशीलता बढ़ाती है और कंधों की अकड़न को भी कम करती है।
4. पूर्ण रोटेशन: गर्दन को बेहद धीरे-धीरे गोलाकार दिशा में घुमाएं — पहले दक्षिणावर्त, फिर वामावर्त। इससे मांसपेशियों को संपूर्ण खिंचाव मिलता है और वे मजबूत बनती हैं।
सावधानियां और सही तरीका
विशेषज्ञों का कहना है कि ये सभी व्यायाम अत्यंत धीरे और सतर्कता से करने चाहिए। अभ्यास के दौरान सांस को सामान्य रखें और कभी भी मांसपेशियों पर जबरदस्ती का दबाव न डालें।
आयुष मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि गर्दन की ये मांसपेशियां स्वैच्छिक होती हैं, अर्थात हम इन्हें अपनी इच्छाशक्ति से नियंत्रित कर सकते हैं। इनका नियमित और सही उपयोग शरीर की ऊपरी रीढ़ को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखता है। यदि दर्द अत्यधिक हो, तो किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही अभ्यास शुरू करें।
डेस्क वर्कर्स के लिए विशेष सुझाव
योग विशेषज्ञ और आयुष मंत्रालय दोनों ही कार्यालय में काम करने वाले लोगों से आग्रह करते हैं कि वे इन नेक मूवमेंट्स को लंच ब्रेक या छोटे कार्य-विराम के दौरान नियमित रूप से करें। इससे न केवल शारीरिक दर्द में राहत मिलेगी, बल्कि मानसिक थकान भी दूर होगी और कार्यक्षमता में सुधार आएगा।
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, गर्दन और पीठ दर्द वैश्विक स्तर पर कार्यक्षमता हानि के प्रमुख कारणों में शामिल है। भारत में आईटी सेक्टर, बैंकिंग और सरकारी कार्यालयों में कार्यरत लाखों कर्मचारी इस समस्या से पीड़ित हैं। आयुष मंत्रालय का यह कदम 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की व्यापक मुहिम का हिस्सा है।
आने वाले समय में आयुष मंत्रालय ऐसे और भी सरल योग प्रोटोकॉल जारी करने की योजना बना रहा है, जो विभिन्न व्यवसायों और आयु वर्गों के लिए विशेष रूप से तैयार किए जाएंगे।