गर्दन-कंधों की जकड़न मिटाएँगे ये 4 योग मूवमेंट्स, आयुष मंत्रालय की सिफारिश
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने 4 सरल योग मूवमेंट्स को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी है, जो गर्दन, कंधों और पीठ की जकड़न दूर करने, ऊर्जा बढ़ाने और तनाव घटाने में कारगर बताए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली में मस्तिष्क पर सूचनाओं का अत्यधिक बोझ शरीर में मांसपेशियों की अकड़न और थकान के रूप में प्रकट होता है।
क्यों ज़रूरी हैं ये मूवमेंट्स
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, तेज़ रफ्तार जीवन में मानसिक दबाव सबसे पहले गर्दन, कंधों और पीठ की मांसपेशियों में जमा होता है। यह ऐसे समय में आया है जब डेस्क-वर्क और स्क्रीन-टाइम के कारण कार्यालयों में मस्कुलोस्केलेटल समस्याएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। मंत्रालय का सुझाव है कि दिन में कुछ मिनट रुककर गहरी साँस लें और शरीर को 'रीसेट' करें।
गौरतलब है कि ये मूवमेंट्स बिना किसी उपकरण के घर, दफ्तर या कहीं भी किए जा सकते हैं और इनके लिए किसी विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है।
चार मुख्य योग मूवमेंट्स
ट्रंक ट्विस्टिंग — कमर को दाएँ-बाएँ घुमाने वाला यह अभ्यास रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, पीठ और कमर की अकड़न दूर करता है तथा पाचन क्रिया को भी बेहतर करता है।
नी मूवमेंट — घुटनों को हल्के-हल्के घुमाने या ऊपर-नीचे करने से पैरों और घुटनों की जकड़न कम होती है। लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी है।
शोल्डर मूवमेंट — कंधों को आगे-पीछे और वृत्ताकार घुमाने से कंधों और गर्दन के ऊपरी हिस्से का तनाव तुरंत कम होता है। यह उन लोगों के लिए विशेष राहत देता है जो घंटों कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठते हैं।
नेक मूवमेंट — गर्दन को धीरे-धीरे दाएँ-बाएँ, ऊपर-नीचे और वृत्ताकार घुमाने से स्क्रीन-टाइम के कारण होने वाले नेक पेन में राहत मिलती है।
नियमित अभ्यास के फायदे
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इन मूवमेंट्स के नियमित अभ्यास से न केवल शारीरिक थकान कम होती है, बल्कि शरीर की मोबिलिटी बढ़ती है और ध्यान वर्तमान क्षण में केंद्रित होता है। इससे मानसिक शांति भी मिलती है और दिनभर की उत्पादकता में सुधार आता है।
किसे होगा सबसे अधिक फायदा
ये मूवमेंट्स विशेष रूप से डेस्क जॉब करने वाले पेशेवरों, छात्रों और उन लोगों के लिए अनुशंसित हैं जो प्रतिदिन लंबे समय तक डिजिटल स्क्रीन के सामने बिताते हैं। मंत्रालय का कहना है कि इन्हें दिनचर्या में शामिल करने से दीर्घकालिक मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं की रोकथाम संभव है।
आयुष मंत्रालय की यह पहल 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की दिशा में जन-जागरूकता अभियान का हिस्सा है।