20 अगस्त 2026
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नीति आयोग का टीबी-मुक्त भारत पर मंथन: स्क्रीनिंग से AI तक सात क्षेत्रों की रणनीति तैयार

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नीति आयोग का टीबी-मुक्त भारत पर मंथन: स्क्रीनिंग से AI तक सात क्षेत्रों की रणनीति तैयार

सारांश

नीति आयोग ने टीबी-मुक्त भारत के लक्ष्य को पाने के लिए सात मोर्चों — स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स, इलाज, रोकथाम, पोषण, सामाजिक सुरक्षा और AI तकनीक — पर एक साथ काम करने की रणनीति बनाई। सुझाव केंद्र और राज्य सरकारों के साथ साझा किए जाएंगे।

मुख्य बातें

नीति आयोग ने 19 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में 'टीबी: आगे का रास्ता' विषय पर उच्चस्तरीय विचार-मंथन सत्र आयोजित किया।
सत्र की संयुक्त अध्यक्षता प्रो.
श्रीनिवास , पुण्या सलिला श्रीवास्तव और ICMR महानिदेशक डॉ.
चर्चा स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स, इलाज, रोकथाम, पोषण, सामाजिक सुरक्षा और तकनीक — इन सात प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रही।
AI और डेटा एनालिटिक्स के ज़रिए मरीज़ों की दवा नियमितता और फॉलोअप बेहतर करने पर विशेष ज़ोर दिया गया।
सत्र के सुझाव संकलित कर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ साझा किए जाएंगे।

नीति आयोग ने 19 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में 'टीबी: आगे का रास्ता' विषय पर एक उच्चस्तरीय विचार-मंथन सत्र आयोजित किया, जिसका उद्देश्य टीबी-मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए ठोस रणनीति और नीतिगत सुझाव तैयार करना था। इस सत्र में देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता और नीति-निर्माता एक मंच पर आए।

सत्र का नेतृत्व और संरचना

इस विचार-मंथन की संयुक्त अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य प्रो. एम. श्रीनिवास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने की। सत्र का समन्वय अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली की डॉ. उर्वशी बी. सिंह ने संभाला।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त सचिव एवं प्रबंध निदेशक आराधना पटनायक ने राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति और प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीबी डिवीजन से प्राप्त आँकड़ों और जानकारियों ने चर्चा को दिशा प्रदान की।

सात प्रमुख क्षेत्रों पर गहन चर्चा

सत्र में स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स, इलाज, रोकथाम, पोषण, सामाजिक सुरक्षा और तकनीक — इन सात प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने शुरुआती चरण में ही टीबी की पहचान के लिए स्क्रीनिंग प्रक्रिया को तेज़ करने और नए, सटीक डायग्नोस्टिक उपकरण अपनाने पर बल दिया।

इलाज की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ मरीज़ों को पोषण सहायता उपलब्ध कराने, सामाजिक कलंक और भेदभाव समाप्त करने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाने पर भी विस्तार से विचार हुआ।

तकनीक और AI की भूमिका

सत्र में डिजिटल निगरानी, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित उपकरणों के ज़रिए टीबी मामलों की ट्रैकिंग पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी हस्तक्षेप से मरीज़ों की दवा नियमितता और फॉलोअप प्रक्रिया में उल्लेखनीय सुधार संभव है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत वैश्विक टीबी बोझ में सबसे बड़े हिस्सेदार देशों में शामिल है।

रोकथाम और जागरूकता पर ज़ोर

रोकथाम की दिशा में जागरूकता अभियान चलाने, भीड़भाड़ वाले इलाकों में नियमित जाँच और उच्च जोखिम वाले समूहों — जैसे कुपोषित, मधुमेह रोगी और घनी बस्तियों में रहने वाले लोग — पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। गौरतलब है कि भारत ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा था, जिसे अब संशोधित रणनीति के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

आगे की राह

नीति आयोग के इस विचार-मंथन सत्र में प्राप्त सुझावों को संकलित कर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि नीतियों में आवश्यक संशोधन किए जा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बहु-आयामी दृष्टिकोण से टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की गति और प्रभावशीलता दोनों में वृद्धि होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — भारत पहले भी टीबी उन्मूलन की समयसीमाएँ चूक चुका है। सात क्षेत्रों की व्यापक रूपरेखा तो उत्साहजनक है, पर AI और डिजिटल निगरानी तभी कारगर होंगे जब ज़िला-स्तरीय स्वास्थ्य ढाँचा उन्हें झेल सके। यह भी ध्यान देने योग्य है कि पोषण और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्र स्वास्थ्य मंत्रालय की अकेली क्षमता से परे हैं — इनके लिए अंतर-मंत्रालयी समन्वय अनिवार्य है, जो अब तक सबसे कमज़ोर कड़ी रहा है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीति आयोग का 'टीबी: आगे का रास्ता' सत्र क्या था?
यह 19 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय विचार-मंथन सत्र था, जिसका उद्देश्य टीबी-मुक्त भारत के लक्ष्य को समय पर हासिल करने के लिए नीतिगत रणनीति और सुझाव तैयार करना था। इसमें स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता और नीति-निर्माता शामिल हुए।
इस सत्र में किन सात क्षेत्रों पर चर्चा हुई?
सत्र में स्क्रीनिंग, डायग्नोस्टिक्स, इलाज, रोकथाम, पोषण, सामाजिक सुरक्षा और तकनीक — इन सात प्रमुख क्षेत्रों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने प्रत्येक क्षेत्र में सुधार के लिए ठोस सुझाव दिए।
टीबी नियंत्रण में AI और तकनीक की क्या भूमिका बताई गई?
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल निगरानी, डेटा एनालिटिक्स और AI आधारित उपकरणों से टीबी मामलों की ट्रैकिंग, मरीज़ों की दवा नियमितता और फॉलोअप प्रक्रिया में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। यह तकनीकी हस्तक्षेप विशेष रूप से दूरदराज़ के क्षेत्रों में प्रभावी हो सकता है।
इस सत्र के सुझावों का आगे क्या होगा?
सत्र में प्राप्त सुझावों को संकलित कर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि टीबी नियंत्रण नीतियों में आवश्यक संशोधन किए जा सकें। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम की गति और प्रभावशीलता दोनों को बढ़ाना है।
इस सत्र का नेतृत्व किसने किया?
सत्र की संयुक्त अध्यक्षता नीति आयोग के सदस्य प्रो. एम. श्रीनिवास, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव और ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने की। सत्र का समन्वय AIIMS नई दिल्ली की डॉ. उर्वशी बी. सिंह ने किया।
राष्ट्र प्रेस
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